विजयवाड़ा कस्टोडियल डेथ: सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर एसआईटी ने सीआई नागराजू से शुरू की पूछताछ
सारांश
मुख्य बातें
आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा में 25 वर्षीय साईं कृष्णा की पुलिस हिरासत में कथित मौत के मामले की जांच कर रही स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) ने 30 जुलाई को निलंबित सर्कल इंस्पेक्टर एसएसवीवी नागराजू को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया। सर्वोच्च न्यायालय ने सात दिन की पुलिस कस्टडी में पूछताछ की मंजूरी देने के बाद एसआईटी ने नागराजू को राजामहेंद्रवरम सेंट्रल जेल से विजयवाड़ा लाया।
मुख्य घटनाक्रम
सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों का पालन करते हुए एसआईटी ने पूछताछ के लिए हिरासत में लेने से पहले आरोपी अधिकारी को विजयवाड़ा की अदालत में पेश किया। इंस्पेक्टर जनरल ऑफ पुलिस एम. रवि प्रकाश की अगुवाई वाली एसआईटी ने नागराजू और उसके साथ चार कॉन्स्टेबलों को गलत तरीके से कैद करने, यातना देने, हिरासत में मौत और सबूत मिटाने के आरोप में पहले ही गिरफ्तार कर लिया था।
एसआईटी ने 23 जून को नागराजू को गिरफ्तार किया था। इसके बाद दो हेड कॉन्स्टेबल और दो कॉन्स्टेबल को भी हिरासत में लिया गया, जिन पर नागराजू की मदद करने का आरोप है।
सर्वोच्च न्यायालय का आदेश
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने राज्य सरकार की अपील स्वीकार करते हुए आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय की उन कई शर्तों में ढील दी, जो पूछताछ को राजामहेंद्रवरम सेंट्रल जेल तक सीमित रखती थीं। पीठ ने कहा कि ऐसी बाधा जांच को अव्यावहारिक बनाती है।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि एसआईटी को आरोपी को संबंधित स्थानों पर ले जाने की स्वतंत्रता होनी चाहिए और उसे अपराध स्थल से 160 किलोमीटर दूर जेल में पूछताछ तक सीमित नहीं रखा जा सकता। इसके साथ ही एसआईटी को अपने निर्धारित पूछताछ केंद्र या विजयवाड़ा में किसी अन्य सुरक्षित स्थान पर नागराजू से पूछताछ की अनुमति दी गई।
मामले की पृष्ठभूमि
इस साल मई में एनटीआर पुलिस कमिश्नरेट के कृष्णा लंका पुलिस स्टेशन में कथित यातना के कारण साईं कृष्णा की मौत हो गई थी। साईं कृष्णा पर कुछ मामले और गैर-जमानती वारंट लंबित थे। उन्हें 6 मई को मरकापुरम से हिरासत में लिया गया और कृष्णा लंका पुलिस स्टेशन ले जाया गया, जहाँ बाद में वे लापता हो गए।
साईं कृष्णा की माँ गाडे विजया लक्ष्मी ने आरोप लगाया कि उनके बेटे को गैरकानूनी तरीके से हिरासत में लिया गया, बुरी तरह यातना दी गई और पीट-पीटकर मार डाला गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस ने बाद में शव का अंतिम संस्कार कर दिया और सबूत मिटा दिए। विजया लक्ष्मी की शिकायत पर 19 जून को मामला दर्ज किया गया।
जांच की चुनौतियाँ
एसआईटी ने सर्वोच्च न्यायालय को बताया कि पीड़ित का शव अभी तक नहीं मिला है और सीसीटीवी हार्ड डिस्क भी बरामद नहीं हुई है। इन दोनों अहम साक्ष्यों की बरामदगी के लिए नागराजू से सीधी और स्थान-आधारित पूछताछ आवश्यक बताई गई। यह मामला न केवल न्यायिक निगरानी में पुलिस जवाबदेही का सवाल उठाता है, बल्कि हिरासत में मौत के मामलों में साक्ष्य संरक्षण की प्रणालीगत कमज़ोरियों को भी उजागर करता है।
आगे क्या होगा
एसआईटी के पास अब सात दिन की पुलिस कस्टडी में नागराजू से पूछताछ का समय है, जिसमें उसे संबंधित स्थानों पर ले जाने की भी अनुमति है। जांचकर्ताओं को उम्मीद है कि इस दौरान साईं कृष्णा के शव के ठिकाने और सीसीटीवी फुटेज को लेकर अहम सुराग मिल सकते हैं। मामले की अगली सुनवाई में सर्वोच्च न्यायालय जांच की प्रगति की समीक्षा करेगा।