महाराष्ट्र सूखा संकट: कांग्रेस के सपकाल का महायुति सरकार पर तीखा हमला, किसानों को राहत नहीं
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र में भीषण सूखे जैसी स्थिति के बीच कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने सोमवार, 21 सितंबर 2026 को मुंबई में पत्रकारों से बात करते हुए महायुति सरकार पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि त्योहारी मौसम में जब किसानों की फसलें बर्बाद हो रही हैं, तब सरकार उनकी पीड़ा के प्रति पूरी तरह उदासीन है।
किसानों की दुर्दशा और सरकार पर आरोप
सपकाल ने कहा कि बेबस किसान बर्बाद हो चुकी फसलों पर ही खेती करने को विवश हैं, जबकि सरकार उनके बैंक खातों में सीधी वित्तीय सहायता पहुँचाने के बजाय महज कागजी वादों तक सीमित है। उनके अनुसार, सरकार बार-बार यह कहती है कि 'प्रक्रिया शुरू हो गई है', परंतु किसानों के खातों में तत्काल राहत राशि जमा नहीं हो रही। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कर्ज माफी का वादा पूरी तरह से खोखला साबित हुआ है।
बैठक में अधिकारियों की लापरवाही का आरोप
सपकाल ने एक विशेष घटना का हवाला देते हुए बताया कि सूखे की गंभीर स्थिति पर चर्चा के लिए बुलाई गई एक आधिकारिक बैठक में प्रशासनिक अधिकारी अपने मोबाइल फोन पर वीडियो देखते हुए पाए गए, जबकि सत्ताधारी दल के सांसद सूखे मेवे खाते नजर आए। उन्होंने इसकी तुलना उन पूर्व प्रकरणों से की जिनमें विधानसभा में मंत्रियों को मोबाइल पर गेम खेलते देखा गया था। यह Nवीं ऐसी घटना है जो महाराष्ट्र के शासन-तंत्र में गंभीर सवाल खड़े करती है।
फडणवीस पर निशाना और 'बांटो-राज करो' का आरोप
कांग्रेस नेता ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के हालिया बयान पर भी पलटवार किया। सपकाल के अनुसार, फडणवीस का वह बयान कांग्रेस नेता राहुल गांधी की 'छात्रों की गूंज' पहल की बढ़ती लोकप्रियता को लेकर उनकी बेचैनी दर्शाता है। सपकाल ने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा, 'ऐसा लगता है कि फडणवीस की मानसिक सेहत बिगड़ गई है। मैं उनसे बस इतना ही कहना चाहता हूँ — जल्द स्वस्थ हो जाइए, देवेंद्र जी।'
इसके साथ ही उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर ब्रिटिश काल की 'बांटो और राज करो' नीति अपनाने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि सरकार मराठा, ओबीसी, आदिवासी और वीजेएनटी समुदायों के बीच आरक्षण के मुद्दे पर सामाजिक विभाजन को जानबूझकर बढ़ावा दे रही है।
राजनीतिक संदर्भ और आगे की स्थिति
यह ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र में ग्रामीण संकट और कृषि राहत में देरी के मुद्दे राजनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील हो गए हैं। गौरतलब है कि आगामी राज्य चुनावों की पृष्ठभूमि में विपक्ष इन मुद्दों को केंद्र में रखकर सरकार को घेरने की कोशिश कर रहा है।
उल्लेखनीय है कि महायुति सरकार ने अभी तक कांग्रेस नेतृत्व द्वारा लगाए गए इन विशिष्ट आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। सरकार की चुप्पी विपक्ष को और मुखर होने का मौका दे रही है। आने वाले दिनों में कृषि राहत वितरण की स्थिति और सरकार का जवाब, दोनों ही महाराष्ट्र की राजनीति की दिशा तय करेंगे।