21 सितंबर 2026
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महाराष्ट्र सूखा संकट: कांग्रेस के सपकाल का महायुति सरकार पर तीखा हमला, किसानों को राहत नहीं

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महाराष्ट्र सूखा संकट: कांग्रेस के सपकाल का महायुति सरकार पर तीखा हमला, किसानों को राहत नहीं

सारांश

महाराष्ट्र में सूखे की मार झेल रहे किसानों को राहत नहीं मिल रही — और कांग्रेस ने इसे महायुति सरकार की उदासीनता का प्रमाण बताया है। बैठकों में अधिकारियों की लापरवाही, कर्ज माफी के खोखले वादे और सामाजिक विभाजन के आरोप — विपक्ष का यह हमला चुनावी रण की आहट दे रहा है।

मुख्य बातें

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने 21 सितंबर 2026 को महायुति सरकार पर महाराष्ट्र के सूखे में किसानों की अनदेखी का आरोप लगाया।
सपकाल के अनुसार, किसानों के बैंक खातों में तत्काल राहत राशि जमा नहीं हो रही और कर्ज माफी का वादा खोखला साबित हुआ है।
सूखे पर बुलाई गई बैठक में प्रशासनिक अधिकारियों के मोबाइल पर वीडियो देखने और सत्ताधारी सांसदों के सूखे मेवे खाने का आरोप लगाया गया।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के बयान पर कांग्रेस का तीखा पलटवार; सपकाल ने व्यंग्यात्मक टिप्पणी की।
BJP पर मराठा, ओबीसी, आदिवासी और वीजेएनटी समुदायों के बीच 'बांटो और राज करो' की नीति अपनाने का आरोप।
महायुति सरकार ने अब तक इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।

महाराष्ट्र में भीषण सूखे जैसी स्थिति के बीच कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने सोमवार, 21 सितंबर 2026 को मुंबई में पत्रकारों से बात करते हुए महायुति सरकार पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि त्योहारी मौसम में जब किसानों की फसलें बर्बाद हो रही हैं, तब सरकार उनकी पीड़ा के प्रति पूरी तरह उदासीन है।

किसानों की दुर्दशा और सरकार पर आरोप

सपकाल ने कहा कि बेबस किसान बर्बाद हो चुकी फसलों पर ही खेती करने को विवश हैं, जबकि सरकार उनके बैंक खातों में सीधी वित्तीय सहायता पहुँचाने के बजाय महज कागजी वादों तक सीमित है। उनके अनुसार, सरकार बार-बार यह कहती है कि 'प्रक्रिया शुरू हो गई है', परंतु किसानों के खातों में तत्काल राहत राशि जमा नहीं हो रही। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कर्ज माफी का वादा पूरी तरह से खोखला साबित हुआ है।

बैठक में अधिकारियों की लापरवाही का आरोप

सपकाल ने एक विशेष घटना का हवाला देते हुए बताया कि सूखे की गंभीर स्थिति पर चर्चा के लिए बुलाई गई एक आधिकारिक बैठक में प्रशासनिक अधिकारी अपने मोबाइल फोन पर वीडियो देखते हुए पाए गए, जबकि सत्ताधारी दल के सांसद सूखे मेवे खाते नजर आए। उन्होंने इसकी तुलना उन पूर्व प्रकरणों से की जिनमें विधानसभा में मंत्रियों को मोबाइल पर गेम खेलते देखा गया था। यह Nवीं ऐसी घटना है जो महाराष्ट्र के शासन-तंत्र में गंभीर सवाल खड़े करती है।

फडणवीस पर निशाना और 'बांटो-राज करो' का आरोप

कांग्रेस नेता ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के हालिया बयान पर भी पलटवार किया। सपकाल के अनुसार, फडणवीस का वह बयान कांग्रेस नेता राहुल गांधी की 'छात्रों की गूंज' पहल की बढ़ती लोकप्रियता को लेकर उनकी बेचैनी दर्शाता है। सपकाल ने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा, 'ऐसा लगता है कि फडणवीस की मानसिक सेहत बिगड़ गई है। मैं उनसे बस इतना ही कहना चाहता हूँ — जल्द स्वस्थ हो जाइए, देवेंद्र जी।'

इसके साथ ही उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर ब्रिटिश काल की 'बांटो और राज करो' नीति अपनाने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि सरकार मराठा, ओबीसी, आदिवासी और वीजेएनटी समुदायों के बीच आरक्षण के मुद्दे पर सामाजिक विभाजन को जानबूझकर बढ़ावा दे रही है।

राजनीतिक संदर्भ और आगे की स्थिति

यह ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र में ग्रामीण संकट और कृषि राहत में देरी के मुद्दे राजनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील हो गए हैं। गौरतलब है कि आगामी राज्य चुनावों की पृष्ठभूमि में विपक्ष इन मुद्दों को केंद्र में रखकर सरकार को घेरने की कोशिश कर रहा है।

उल्लेखनीय है कि महायुति सरकार ने अभी तक कांग्रेस नेतृत्व द्वारा लगाए गए इन विशिष्ट आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। सरकार की चुप्पी विपक्ष को और मुखर होने का मौका दे रही है। आने वाले दिनों में कृषि राहत वितरण की स्थिति और सरकार का जवाब, दोनों ही महाराष्ट्र की राजनीति की दिशा तय करेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इस बार राजनीतिक दाँव ऊँचे हैं। असली सवाल यह है कि महायुति सरकार इन आरोपों का जवाब कब और कैसे देती है — क्योंकि चुप्पी चुनावी नुकसान में बदल सकती है। आरक्षण के मुद्दे पर 'बांटो और राज करो' का आरोप भी गंभीर है, जो दर्शाता है कि सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ही ग्रामीण मतदाताओं को साधने की होड़ में हैं।
RashtraPress
21 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महाराष्ट्र में सूखे को लेकर कांग्रेस ने क्या आरोप लगाए हैं?
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने महायुति सरकार पर आरोप लगाया है कि किसानों की बर्बाद फसलों के बावजूद उनके बैंक खातों में तत्काल राहत राशि नहीं पहुँचाई जा रही और कर्ज माफी का वादा खोखला साबित हुआ है। उनका कहना है कि सरकार केवल कागजी वादे कर रही है।
हर्षवर्धन सपकाल ने सरकारी बैठक के बारे में क्या कहा?
सपकाल ने आरोप लगाया कि सूखे पर बुलाई गई एक बैठक में प्रशासनिक अधिकारी मोबाइल पर वीडियो देखते पाए गए और सत्ताधारी दल के सांसद सूखे मेवे खाते नजर आए। उन्होंने इसकी तुलना विधानसभा में मंत्रियों के मोबाइल गेम खेलने की पूर्व घटनाओं से की।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर कांग्रेस का क्या रुख है?
कांग्रेस नेता सपकाल ने फडणवीस के हालिया बयान को राहुल गांधी की 'छात्रों की गूंज' पहल की बढ़ती लोकप्रियता से उत्पन्न बेचैनी का परिणाम बताया। उन्होंने व्यंग्यात्मक टिप्पणी करते हुए कहा कि फडणवीस को 'जल्द स्वस्थ हो जाना चाहिए।'
BJP पर 'बांटो और राज करो' का आरोप क्यों लगाया गया?
सपकाल ने आरोप लगाया कि BJP सरकार मराठा, ओबीसी, आदिवासी और वीजेएनटी समुदायों के बीच आरक्षण के मुद्दे पर जानबूझकर सामाजिक विभाजन बढ़ा रही है। उन्होंने इसे ब्रिटिश काल की 'बांटो और राज करो' नीति की तर्ज पर बताया।
महायुति सरकार ने इन आरोपों पर क्या जवाब दिया है?
अभी तक महायुति सरकार ने कांग्रेस नेतृत्व द्वारा लगाए गए इन विशिष्ट आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। सत्ताधारी प्रशासन की यह चुप्पी राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बनी हुई है।
राष्ट्र प्रेस
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