नागपुर अदालत ने तेंदुए की खाल तस्करी में तीनों दोषियों को 3-3 साल कैद की सजा सुनाई, सीबीआई को मिली सफलता
सारांश
मुख्य बातें
नागपुर की एक अदालत ने 5 नवंबर 2026 को केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा जांचे गए तेंदुए की खाल की अवैध बिक्री के करीब 15 साल पुराने मामले में तीनों दोषियों को तीन-तीन साल के कारावास की सजा सुनाई। यह सजा वन्यजीव तस्करी के खिलाफ सीबीआई की दीर्घकालिक कानूनी लड़ाई में एक अहम पड़ाव मानी जा रही है।
मुख्य घटनाक्रम
नागपुर के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने गुलाम मुस्तफा, अजय और गोपाल को दोषी करार देते हुए प्रत्येक को तीन साल के कारावास और ₹5,000 जुर्माने की सजा सुनाई। तीनों पर आरोप था कि उन्होंने तेंदुए की खाल को अवैध रूप से कुछ अज्ञात लोगों को बेचा था।
सीबीआई ने जांच पूरी होने के बाद 21 दिसंबर 2001 को इस मामले में आरोपपत्र दाखिल किया था। आरोपियों पर आपराधिक साजिश और वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की धारा 49-बी और 51 के तहत मुकदमा चला, जो वन्यजीवों के अवशेषों एवं पशु उत्पादों के अवैध कारोबार को प्रतिबंधित करती हैं।
सीबीआई की एक और बड़ी कार्रवाई
इसी दिन सीबीआई को एक अन्य मामले में भी उल्लेखनीय सफलता मिली। एजेंसी ने बिहार के पुनपुन इलाके से करीब दो दशक पुराने बैंक धोखाधड़ी मामले में घोषित अपराधी राजा बिहारी को गिरफ्तार किया।
सीबीआई के अनुसार, राजा बिहारी ने बैंक अधिकारियों और बिचौलियों के साथ कथित साजिश कर इलाहाबाद बैंक की पटना स्थित पाटलिपुत्र कॉलोनी शाखा से फर्जी जमीन के कागजात, जाली संपत्ति दस्तावेज और फर्जी गारंटरों के आधार पर ऋण हासिल किया था।
बैंक धोखाधड़ी मामले की पृष्ठभूमि
एजेंसी ने इस मामले में राजा बिहारी समेत 21 आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत मामला दर्ज किया था। सीबीआई ने 30 अक्टूबर 2009 को आरोपपत्र दाखिल किया, और विशेष सीबीआई अदालत ने 12 नवंबर 2009 को उस पर संज्ञान लिया था।
गौरतलब है कि राजा बिहारी शुरू से ही जांच में शामिल नहीं हुआ और लगातार फरार रहा, जिसके कारण अदालती कार्यवाही प्रभावित होती रही। बाद में विशेष अदालत ने उसे घोषित अपराधी (प्रोक्लेम्ड ऑफेंडर) घोषित कर दिया था।
गिरफ्तारी कैसे हुई
सीबीआई ने बताया कि खुफिया सूचनाओं और लगातार प्रयासों के आधार पर एजेंसी की एक विशेष टीम ने 5 नवंबर 2026 को बिहार के पुनपुन से राजा बिहारी को गिरफ्तार किया। यह गिरफ्तारी इस बात का प्रमाण है कि सीबीआई लंबित मामलों में फरार आरोपियों को पकड़ने के प्रयास जारी रखती है।
आगे क्या होगा
तेंदुए की खाल मामले में सजायाफ्ता तीनों दोषी अब उच्च न्यायालय में अपील का विकल्प तलाश सकते हैं। वहीं, राजा बिहारी को अदालत में पेश किया जाएगा और बैंक धोखाधड़ी मामले में आगे की सुनवाई जारी रहेगी। यह दोनों मामले वन्यजीव संरक्षण और वित्तीय अपराधों के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया की दीर्घकालिक प्रकृति को उजागर करते हैं।