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गोंदिया में डीआरआई का बड़ा एक्शन: तेंदुए की खाल तस्करी गिरोह का भंडाफोड़, 2 गिरफ्तार

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गोंदिया में डीआरआई का बड़ा एक्शन: तेंदुए की खाल तस्करी गिरोह का भंडाफोड़, 2 गिरफ्तार

सारांश

महाराष्ट्र के गोंदिया में डीआरआई की खुफिया-आधारित कार्रवाई ने तेंदुए की खाल के अवैध कारोबार का पर्दाफाश किया। यह अभियान उज्जैन, सेओनी, जगदलपुर और मैसूरु में हुई हालिया कार्रवाइयों की कड़ी है — जो मध्य और दक्षिण भारत में फैले वन्यजीव तस्करी नेटवर्क के खिलाफ डीआरआई की बड़ी मुहिम का हिस्सा है।

मुख्य बातें

डीआरआई नारू ने 29 सितंबर 2026 को महाराष्ट्र के गोंदिया जिले के पुरादा गाँव के निकट छापा मारकर तेंदुए की खाल तस्करी गिरोह का भंडाफोड़ किया।
अभियान में 2 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया और एक तेंदुए की खाल जब्त की गई।
तेंदुआ (पैंथेरा पार्डस) वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची प्रथम में सूचीबद्ध है और इसका व्यापार पूर्णतः प्रतिबंधित है।
दोनों आरोपियों को जब्त खाल समेत उत्तरी देवरिया रेंज, गोंदिया के वन रेंज अधिकारी को सौंपा गया।
डीआरआई नारू ने हाल ही में उज्जैन, सेओनी, पिलरू, जगदलपुर और मैसूरु में भी वन्यजीव तस्करी नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है।
बेंगलुरु के एक अलग अभियान में 180 जीवित भारतीय तारा कछुए बरामद किए गए और एक आरोपी गिरफ्तार किया गया।

राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) की नागपुर क्षेत्रीय इकाई (नारू) ने 29 सितंबर 2026 को महाराष्ट्र के गोंदिया जिले के पुरादा गाँव के निकट एक विशेष अभियान चलाकर तेंदुए की खाल की अवैध खरीद-फरोख्त में लिप्त एक गिरोह का पर्दाफाश किया। इस कार्रवाई में दो आरोपियों को हिरासत में लिया गया और एक तेंदुए की खाल जब्त की गई।

मुख्य घटनाक्रम

डीआरआई मुंबई क्षेत्रीय इकाई के अंतर्गत कार्यरत नारू ने खुफिया सूचना के आधार पर यह अभियान चलाया। अधिकारियों के अनुसार, पुरादा गाँव के पास संदिग्धों को रोककर उनकी जाँच की गई, जिसमें तेंदुए की खाल की अवैध खरीद-फरोख्त से जुड़े साक्ष्य मिले।

गौरतलब है कि तेंदुआ (पैंथेरा पार्डस) वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची प्रथम के अंतर्गत सूचीबद्ध है, जो इस प्रजाति और इससे प्राप्त किसी भी उत्पाद के व्यापार पर पूर्ण प्रतिबंध लगाता है। इस प्रावधान के तहत बरामद खाल को विधिवत जब्त कर लिया गया।

आगे की कानूनी कार्रवाई

जब्ती की औपचारिकताएँ पूरी होने के पश्चात दोनों आरोपियों को जब्त खाल सहित उत्तरी देवरिया रेंज, गोंदिया के वन रेंज अधिकारी को वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के प्रासंगिक प्रावधानों के तहत आगे की कार्रवाई हेतु सौंप दिया गया।

यह ऐसे समय में आया है जब डीआरआई नारू ने हाल के महीनों में देशभर में कई बड़े वन्यजीव तस्करी नेटवर्क को ध्वस्त किया है।

डीआरआई की हालिया सफलताएँ

अधिकारियों के अनुसार, डीआरआई नारू ने हाल ही में कई राज्यों में अभियान चलाकर उज्जैन में तेंदुए की खाल, सेओनी में बाघ की हड्डियाँ, पिलरू और जगदलपुर में पैंगोलिन के शल्क तथा मैसूरु में हाथी दाँत की तस्करी से जुड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है।

इसके अतिरिक्त, कर्नाटक में एक अभियान के दौरान बेंगलुरु के गांधीनगर के निकट एक व्यक्ति के सामान की तलाशी में 6 कपड़े के कवर में छिपाए गए 180 जीवित भारतीय तारा कछुए बरामद किए गए। एक आधिकारिक बयान के अनुसार, इन कछुओं के खोल पर तारे जैसी आकर्षक आकृति इन्हें विदेशी पालतू जानवरों और वन्यजीव संग्राहकों के बाज़ार में विशेष रूप से माँगनीय बनाती है, जिससे अवैध शिकार और अंतरराष्ट्रीय तस्करी को बढ़ावा मिलता है।

समन्वित प्रवर्तन रणनीति

डीआरआई ने आधिकारिक बयान में कहा कि ये निरंतर प्रवर्तन कार्रवाइयाँ वन्यजीव संरक्षण के प्रति उसकी अटूट प्रतिबद्धता और संगठित पर्यावरणीय अपराध से निपटने के दृढ़ संकल्प को रेखांकित करती हैं। विभिन्न राज्यों के वन विभागों और अन्य प्रवर्तन एजेंसियों के साथ घनिष्ठ समन्वय से खुफिया-आधारित अभियानों के ज़रिये राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय तस्करी नेटवर्क को नष्ट किया जा रहा है।

वन्यजीव अपराध विशेषज्ञों के अनुसार, भारत वैश्विक वन्यजीव तस्करी के प्रमुख स्रोत देशों में से एक बना हुआ है और इस तरह की समन्वित कार्रवाइयाँ इन नेटवर्क की आपूर्ति श्रृंखला को तोड़ने में सहायक हैं। गोंदिया का यह मामला इस बात की पुष्टि करता है कि मध्य भारत के जंगल अभी भी बड़े पैमाने पर तस्करी गिरोहों के निशाने पर हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो बताती है कि वन्यजीव तस्करी नेटवर्क अब भी सक्रिय और संगठित हैं। असली सवाल यह है कि गिरफ्तारी के बाद सज़ा की दर कितनी है — भारत में वन्यजीव अपराध मामलों में दोषसिद्धि अब भी बेहद कम है, जो इन गिरोहों के लिए जोखिम को सीमित रखती है। डीआरआई की सक्रियता सराहनीय है, लेकिन जब तक न्यायिक प्रक्रिया तेज़ नहीं होती और आपूर्ति श्रृंखला की जड़ें नहीं काटी जातीं, तब तक ये अभियान पूर्ण प्रभाव नहीं दे पाएँगे।
RashtraPress
1 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

डीआरआई ने गोंदिया में क्या कार्रवाई की?
डीआरआई की नागपुर क्षेत्रीय इकाई (नारू) ने 29 सितंबर 2026 को गोंदिया जिले के पुरादा गाँव के पास छापा मारकर तेंदुए की खाल की अवैध खरीद-फरोख्त में लिप्त 2 आरोपियों को गिरफ्तार किया। एक तेंदुए की खाल जब्त कर वन विभाग को सौंपी गई।
तेंदुए की खाल का व्यापार क्यों प्रतिबंधित है?
तेंदुआ वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची प्रथम में सूचीबद्ध है, जो इस श्रेणी के जानवरों और उनसे प्राप्त किसी भी उत्पाद के शिकार, व्यापार और कब्ज़े पर पूर्ण प्रतिबंध लगाता है। इस कानून के उल्लंघन पर कठोर दंड का प्रावधान है।
गिरफ्तार आरोपियों को किसे सौंपा गया?
दोनों आरोपियों को जब्त खाल सहित उत्तरी देवरिया रेंज, गोंदिया के वन रेंज अधिकारी को वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के प्रावधानों के तहत आगे की कानूनी कार्रवाई हेतु सौंपा गया।
डीआरआई नारू ने हाल ही में और कहाँ-कहाँ वन्यजीव तस्करी का भंडाफोड़ किया है?
हाल के महीनों में डीआरआई नारू ने उज्जैन में तेंदुए की खाल, सेओनी में बाघ की हड्डियाँ, पिलरू और जगदलपुर में पैंगोलिन के शल्क, मैसूरु में हाथी दाँत और बेंगलुरु में 180 जीवित भारतीय तारा कछुओं की तस्करी से जुड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है।
भारतीय तारा कछुआ तस्करी के लिए इतना माँगनीय क्यों है?
भारतीय तारा कछुए के खोल पर तारे जैसी अनूठी आकृति इसे विदेशी पालतू जानवरों और वन्यजीव संग्राहकों के अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में अत्यधिक माँगनीय बनाती है। यही कारण है कि यह प्रजाति अवैध शिकार और अंतरराष्ट्रीय तस्करी का प्रमुख निशाना बनी हुई है।
राष्ट्र प्रेस
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