सीबीआई ने बैंक धोखाधड़ी मामले में 18 साल से फरार 'घोषित अपराधी' राजा बिहारी को बिहार से दबोचा
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने 5 नवंबर 2026 को बैंक धोखाधड़ी के एक पुराने मामले में बड़ी सफलता हासिल करते हुए 18 वर्षों से फरार और 'घोषित अपराधी' घोषित आरोपी राजा बिहारी को बिहार के पुनपुन से गिरफ्तार किया। सीबीआई की एक विशेष टीम ने खुफिया जानकारी और निरंतर प्रयासों के बल पर वर्षों से चली आ रही इस तलाश को अंततः अंजाम तक पहुँचाया।
मामले का पृष्ठभूमि और आरोप
सीबीआई ने भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धाराओं के तहत राजा बिहारी सहित कुल 21 आरोपियों के विरुद्ध यह बैंक धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया था। जाँच में सामने आया कि आरोपी ने बैंक अधिकारियों और बिचौलियों से साँठगाँठ करके इलाहाबाद बैंक की पाटलिपुत्र कॉलोनी शाखा, पटना से जाली टाइटल डीड, फर्जी संपत्ति दस्तावेज़ों और नकली गारंटर के क्रेडेंशियल्स के आधार पर सीसी लोन (Cash Credit Loan) हासिल किया था।
सीबीआई ने 30 अक्टूबर 2009 को सभी 21 आरोपियों के विरुद्ध चार्जशीट दाखिल की, जिसका संज्ञान सक्षम अदालत ने 12 नवंबर 2009 को लिया। परंतु राजा बिहारी शुरुआत से ही जाँच प्रक्रिया में शामिल नहीं हुआ और मुकदमे की कार्यवाही से लगातार बचता रहा।
फरार रहने के वर्ष और 'घोषित अपराधी' का दर्जा
न्यायालय में उपस्थित न होने और बार-बार बुलाने पर भी फरार रहने के कारण सक्षम अदालत ने आरोपी को औपचारिक रूप से 'घोषित अपराधी' करार दिया। गौरतलब है कि यह दर्जा उन आरोपियों को दिया जाता है जो जानबूझकर न्यायिक प्रक्रिया से बचते हैं और जिनकी सभी ज्ञात संपत्ति कुर्क की जा सकती है। इसके बाद सीबीआई की एक समर्पित टीम लगातार सुराग जुटाती रही और अंततः गुरुवार को पुनपुन, बिहार से उसे दबोचने में सफल रही।
दूसरा मामला: यूएई से भगोड़े को भारत लाया गया
एक अलग मामले में, सीबीआई ने विदेश मंत्रालय (MEA), गृह मंत्रालय (MHA) और दिल्ली पुलिस के साथ समन्वय स्थापित करते हुए यौन उत्पीड़न के एक मामले में वांछित भगोड़े सजीर पल्ली मूप्पम को संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से भारत वापस लाने में सफलता प्राप्त की।
जाँच के अनुसार, आरोपी ने अपने एक साथी के साथ मिलकर एक 20 वर्षीय युवती को जबरन नशीला पदार्थ देकर बेसुध किया, फिर उसे एक होटल ले गया। पकड़े जाने से बचने के लिए उसने किसी अन्य व्यक्ति के पहचान दस्तावेज़ों का उपयोग करके होटल में चेक-इन किया और पीड़िता की सहमति के बिना यौन उत्पीड़न किया। इसकी पुष्टि बाद में मेडिकल और फोरेंसिक रिपोर्ट से हुई।
सीबीआई की रणनीतिक सफलता का महत्त्व
यह ऐसे समय में आया है जब जाँच एजेंसियों पर दीर्घकालिक फरारियों को न्यायिक प्रक्रिया में लाने का दबाव बढ़ रहा है। दोनों गिरफ्तारियाँ — एक दशकों पुराने घरेलू मामले में और एक अंतरराष्ट्रीय प्रत्यर्पण-समन्वय के ज़रिए — यह संकेत देती हैं कि एजेंसी दीर्घकालिक प्रकरणों को भी बंद करने की दिशा में सक्रिय है। आगे दोनों आरोपियों को संबंधित अदालतों में पेश किया जाएगा, जहाँ उनकी न्यायिक हिरासत और मुकदमे की अगली कार्यवाही तय होगी।