21 अगस्त 2026
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सीबीआई ने 23 साल से फरार उद्घोषित अपराधी रूप सिंह को गिरफ्तार किया, ₹9 लाख के माल गबन का मामला

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सीबीआई ने 23 साल से फरार उद्घोषित अपराधी रूप सिंह को गिरफ्तार किया, ₹9 लाख के माल गबन का मामला

सारांश

23 साल की फरारी का अंत — सीबीआई ने उद्घोषित अपराधी रूप सिंह को गिरफ्तार किया, जिस पर 1998 में ₹9 लाख के माल के गबन का आरोप है। इसी मामले में सह-आरोपी अर्जुन सिंह को नवंबर 2025 में पकड़ा जा चुका है।

मुख्य बातें

सीबीआई ने 21 अगस्त 2026 को उद्घोषित अपराधी रूप सिंह को लगभग 23 वर्षों की फरारी के बाद गिरफ्तार किया।
मामला महाराष्ट्र के अमलनेर में 4 अक्टूबर, 1998 को दर्ज हुआ था — दो ट्रकों में लदे ₹9 लाख के घी और मूंग के गबन का आरोप।
सह-आरोपी अर्जुन सिंह को 7 नवंबर, 2025 को 22 वर्षों की फरारी के बाद गिरफ्तार किया गया था।
सक्षम न्यायालय ने 11 नवंबर, 2010 को रूप सिंह और अर्जुन सिंह को आधिकारिक रूप से भगोड़ा घोषित किया था।
बाबू खान और असलम खान — दोनों मुख्य ट्रक चालक आरोपी — अभी भी फरार हैं।

केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने शुक्रवार, 21 अगस्त 2026 को एक उद्घोषित अपराधी (पीओ) रूप सिंह को गिरफ्तार किया, जो लगभग 23 वर्षों से कानून की पकड़ से बाहर था। उस पर ₹9 लाख के माल की चोरी और आपराधिक गबन का आरोप है, जो ट्रकों के ज़रिए ग्राहकों तक पहुँचाया जाना था। यह गिरफ्तारी सीबीआई के उस अभियान का हिस्सा है जिसके तहत दशकों पुराने भगोड़े आरोपियों को न्याय के कटघरे में लाया जा रहा है।

मामले की पृष्ठभूमि

इस मामले की जड़ें महाराष्ट्र के अमलनेर पुलिस स्टेशन में 4 अक्टूबर, 1998 को दर्ज एफआईआर में हैं। आरोप है कि 27 सितंबर, 1998 को दो ट्रक चालकों — बाबू खान और असलम खान — ने दो ट्रकों में लदे घी और मूंग सहित अन्य सामान का अवैध रूप से गबन किया। रूप सिंह और अर्जुन सिंह पर आरोप है कि उन्होंने इन ट्रक चालकों के साथ मिलकर आपराधिक साजिश रची और माल को तीसरे पक्ष तक पहुँचाने की बजाय हड़प लिया।

सीबीआई को सौंपी गई जांच

औरंगाबाद स्थित बॉम्बे उच्च न्यायालय ने 25 फरवरी, 2002 के अपने आदेश (आपराधिक रिट याचिका संख्या 547/2000, दिनांक 27 नवंबर, 2000) के ज़रिए इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपने का निर्देश दिया। इसके अनुपालन में सीबीआई ने 5 अप्रैल, 2002 को मामले को आरसी-4(एस)/2002-सीबीआई, एससीबी, मुंबई के रूप में पुनः पंजीकृत किया।

आरोपपत्र और फरारी

जांच पूरी होने के बाद सीबीआई ने 19 दिसंबर, 2003 को अमलनेर स्थित जेएमएफसी की अदालत में रूप सिंह, अर्जुन सिंह, बाबू खान और असलम खान के विरुद्ध आपराधिक गबन, साजिश और उकसाने से संबंधित अपराधों के लिए आरोपपत्र दाखिल किया। मुकदमे की सुनवाई के दौरान रूप सिंह और अर्जुन सिंह को जमानत पर रिहा किया गया, किंतु वे बाद में फरार हो गए। सक्षम न्यायालय ने 11 नवंबर, 2010 को उन्हें आधिकारिक रूप से भगोड़ा घोषित कर दिया। बाबू खान और असलम खान मामले की शुरुआत से ही फरार बताए जाते हैं।

सह-आरोपी की पूर्व गिरफ्तारी

गौरतलब है कि इसी मामले में सह-आरोपी अर्जुन सिंह को लगभग 22 वर्षों की फरारी के बाद 7 नवंबर, 2025 को गिरफ्तार किया जा चुका है। अब रूप सिंह की गिरफ्तारी के साथ सीबीआई ने इस दशकों पुराने मामले में एक और अहम कड़ी को पकड़ा है।

आगे की कार्रवाई

सीबीआई के अनुसार, रूप सिंह को गिरफ्तारी के बाद सक्षम न्यायालय के समक्ष पेश किया जाएगा। बाबू खान और असलम खान अभी भी फरार हैं और उनकी तलाश जारी है। यह मामला इस बात का उदाहरण है कि सीबीआई दीर्घकालिक भगोड़े मामलों में भी अपनी जांच जारी रखती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह मामला भारतीय आपराधिक न्याय प्रणाली की एक गहरी विडंबना को भी उजागर करता है — जमानत पर रिहा आरोपी दशकों तक फरार रहते हैं और न्यायालय उन्हें 'भगोड़ा' घोषित करने में वर्षों लगा देते हैं। 1998 का मामला, 2002 में सीबीआई को सौंपा गया, 2003 में आरोपपत्र, 2010 में भगोड़ा घोषणा — और 2026 में गिरफ्तारी: यह 28 वर्षों की यात्रा है। जब तक ₹9 लाख के मामले में न्याय मिलता है, पीड़ित पक्ष के लिए यह जीत खोखली लग सकती है। असली सवाल यह है कि जमानत-और-फरारी के इस चक्र को तोड़ने के लिए प्रणालीगत सुधार कब होंगे।
RashtraPress
21 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीबीआई ने रूप सिंह को किस मामले में गिरफ्तार किया?
सीबीआई ने रूप सिंह को 1998 के उस मामले में गिरफ्तार किया जिसमें महाराष्ट्र के अमलनेर में दो ट्रकों में लदे ₹9 लाख के घी और मूंग के गबन का आरोप है। यह मामला मूल रूप से अमलनेर पुलिस स्टेशन में 4 अक्टूबर, 1998 को दर्ज हुआ था।
रूप सिंह कितने समय से फरार था और उसे भगोड़ा कब घोषित किया गया?
रूप सिंह लगभग 23 वर्षों से फरार था। सक्षम न्यायालय ने 11 नवंबर, 2010 को उसे आधिकारिक रूप से उद्घोषित अपराधी (भगोड़ा) घोषित किया था, जिसके बाद सीबीआई उसकी तलाश कर रही थी।
इस मामले में अन्य आरोपियों का क्या हुआ?
सह-आरोपी अर्जुन सिंह को 7 नवंबर, 2025 को लगभग 22 वर्षों की फरारी के बाद गिरफ्तार किया जा चुका है। मुख्य ट्रक चालक आरोपी बाबू खान और असलम खान अभी भी फरार बताए जाते हैं और उनकी तलाश जारी है।
यह मामला सीबीआई को कैसे सौंपा गया?
औरंगाबाद स्थित बॉम्बे उच्च न्यायालय ने 25 फरवरी, 2002 के अपने आदेश के ज़रिए इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपी। इसके बाद सीबीआई ने 5 अप्रैल, 2002 को मामले को पुनः पंजीकृत किया और 19 दिसंबर, 2003 को आरोपपत्र दाखिल किया।
इस मामले में आरोपियों पर क्या अपराध दर्ज हैं?
सीबीआई ने रूप सिंह, अर्जुन सिंह, बाबू खान और असलम खान के विरुद्ध आपराधिक गबन, आपराधिक साजिश और उकसाने से संबंधित अपराधों के लिए आरोपपत्र दाखिल किया है। आरोप है कि इन्होंने मिलकर तीसरे पक्ष को पहुँचाए जाने वाले माल का अवैध रूप से गबन किया।
राष्ट्र प्रेस
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