सीबीआई ने 23 साल से फरार उद्घोषित अपराधी रूप सिंह को गिरफ्तार किया, ₹9 लाख के माल गबन का मामला
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने शुक्रवार, 21 अगस्त 2026 को एक उद्घोषित अपराधी (पीओ) रूप सिंह को गिरफ्तार किया, जो लगभग 23 वर्षों से कानून की पकड़ से बाहर था। उस पर ₹9 लाख के माल की चोरी और आपराधिक गबन का आरोप है, जो ट्रकों के ज़रिए ग्राहकों तक पहुँचाया जाना था। यह गिरफ्तारी सीबीआई के उस अभियान का हिस्सा है जिसके तहत दशकों पुराने भगोड़े आरोपियों को न्याय के कटघरे में लाया जा रहा है।
मामले की पृष्ठभूमि
इस मामले की जड़ें महाराष्ट्र के अमलनेर पुलिस स्टेशन में 4 अक्टूबर, 1998 को दर्ज एफआईआर में हैं। आरोप है कि 27 सितंबर, 1998 को दो ट्रक चालकों — बाबू खान और असलम खान — ने दो ट्रकों में लदे घी और मूंग सहित अन्य सामान का अवैध रूप से गबन किया। रूप सिंह और अर्जुन सिंह पर आरोप है कि उन्होंने इन ट्रक चालकों के साथ मिलकर आपराधिक साजिश रची और माल को तीसरे पक्ष तक पहुँचाने की बजाय हड़प लिया।
सीबीआई को सौंपी गई जांच
औरंगाबाद स्थित बॉम्बे उच्च न्यायालय ने 25 फरवरी, 2002 के अपने आदेश (आपराधिक रिट याचिका संख्या 547/2000, दिनांक 27 नवंबर, 2000) के ज़रिए इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपने का निर्देश दिया। इसके अनुपालन में सीबीआई ने 5 अप्रैल, 2002 को मामले को आरसी-4(एस)/2002-सीबीआई, एससीबी, मुंबई के रूप में पुनः पंजीकृत किया।
आरोपपत्र और फरारी
जांच पूरी होने के बाद सीबीआई ने 19 दिसंबर, 2003 को अमलनेर स्थित जेएमएफसी की अदालत में रूप सिंह, अर्जुन सिंह, बाबू खान और असलम खान के विरुद्ध आपराधिक गबन, साजिश और उकसाने से संबंधित अपराधों के लिए आरोपपत्र दाखिल किया। मुकदमे की सुनवाई के दौरान रूप सिंह और अर्जुन सिंह को जमानत पर रिहा किया गया, किंतु वे बाद में फरार हो गए। सक्षम न्यायालय ने 11 नवंबर, 2010 को उन्हें आधिकारिक रूप से भगोड़ा घोषित कर दिया। बाबू खान और असलम खान मामले की शुरुआत से ही फरार बताए जाते हैं।
सह-आरोपी की पूर्व गिरफ्तारी
गौरतलब है कि इसी मामले में सह-आरोपी अर्जुन सिंह को लगभग 22 वर्षों की फरारी के बाद 7 नवंबर, 2025 को गिरफ्तार किया जा चुका है। अब रूप सिंह की गिरफ्तारी के साथ सीबीआई ने इस दशकों पुराने मामले में एक और अहम कड़ी को पकड़ा है।
आगे की कार्रवाई
सीबीआई के अनुसार, रूप सिंह को गिरफ्तारी के बाद सक्षम न्यायालय के समक्ष पेश किया जाएगा। बाबू खान और असलम खान अभी भी फरार हैं और उनकी तलाश जारी है। यह मामला इस बात का उदाहरण है कि सीबीआई दीर्घकालिक भगोड़े मामलों में भी अपनी जांच जारी रखती है।