10 अगस्त 2026
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धनबाद SBI बैंक घोटाला: CBI ने 20 साल बाद दो भगोड़े आरोपियों को महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ से दबोचा

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धनबाद SBI बैंक घोटाला: CBI ने 20 साल बाद दो भगोड़े आरोपियों को महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ से दबोचा

सारांश

करीब दो दशक की लंबी जाँच के बाद CBI ने धनबाद SBI घोटाले के दो भगोड़े आरोपियों को एक साथ महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ से गिरफ्तार किया। नकली पहचान और नेपाल पलायन के बावजूद कानून का शिकंजा कसा — यह CBI की बड़ी सफलता है।

मुख्य बातें

CBI की ACB ने 21 जून 2026 को धनबाद SBI बैंक घोटाले के दो घोषित अपराधियों को गिरफ्तार किया।
आरोपी बृजभूषण प्रसाद को महाराष्ट्र के कोपरगाँव और करतार सिंह को रायपुर, छत्तीसगढ़ से पकड़ा गया।
मामला नवंबर 2002 से जून 2005 के बीच ₹1,25,47,950 की धोखाधड़ी और गबन से संबंधित है।
CBI ने इस मामले में 31 अगस्त 2005 को प्राथमिकी दर्ज की थी; दोनों आरोपी जाँच के दौरान नेपाल भाग गए थे।
गिरफ्तारी के लिए रेड कॉर्नर नोटिस जारी था और सूचना देने वालों के लिए ₹25,000-₹25,000 का इनाम घोषित था।
दोनों आरोपी नकली पहचान के सहारे वर्षों से अलग-अलग स्थानों पर छिपे थे।

केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (ACB) ने 21 जून 2026 को झारखंड के बहुचर्चित धनबाद SBI मुख्य शाखा बैंक घोटाला मामले में दो दशक से अधिक समय से फरार चल रहे दो घोषित अपराधियों को गिरफ्तार कर लिया। बृजभूषण प्रसाद और करतार सिंह नामक इन दोनों आरोपियों को एक साथ दो अलग-अलग राज्यों में चलाए गए समन्वित अभियान में पकड़ा गया। यह मामला नवंबर 2002 से जून 2005 के बीच ₹1,25,47,950 की धोखाधड़ी और गबन से जुड़ा है।

मामले की पृष्ठभूमि

यह घोटाला भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की धनबाद स्थित मुख्य शाखा में नवंबर 2002 से जून 2005 के बीच अंजाम दिया गया था। CBI ने इस मामले में 31 अगस्त 2005 को प्राथमिकी दर्ज की थी। जाँच के दौरान दोनों आरोपी देश छोड़कर नेपाल भाग गए, जिसके बाद सक्षम न्यायालय ने उन्हें घोषित अपराधी करार दिया। उनकी गिरफ्तारी सुनिश्चित करने के लिए रेड कॉर्नर नोटिस भी जारी किया गया था और सूचना देने वालों के लिए ₹25,000-₹25,000 के नकद इनाम की घोषणा की गई थी।

गिरफ्तारी का विवरण

CBI की विशेष टीमों ने 21 जून 2026 को एक साथ दो राज्यों में अभियान चलाया। बृजभूषण प्रसाद को महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले के कोपरगाँव से गिरफ्तार किया गया, जबकि करतार सिंह को छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से पकड़ा गया। गौरतलब है कि गिरफ्तारी से बचने के लिए दोनों आरोपी वर्षों से नकली पहचान के सहारे अलग-अलग स्थानों पर रह रहे थे।

CBI की जाँच रणनीति

अधिकारियों के अनुसार, लगातार प्रयासों, तकनीकी सूचनाओं, गुप्त निगरानी और विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय के आधार पर दोनों आरोपियों का पता लगाया गया। यह ऐसे समय में आया है जब CBI की दीर्घकालिक मामलों में सफलता दर पर अक्सर सवाल उठाए जाते रहे हैं। इस गिरफ्तारी को एजेंसी की उल्लेखनीय उपलब्धि माना जा रहा है।

आगे की कानूनी कार्रवाई

CBI अधिकारियों ने बताया कि दोनों आरोपियों को आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए सक्षम न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जा रहा है। लगभग 20 वर्षों से लंबित इस चर्चित बैंक घोटाला मामले की सुनवाई और जाँच प्रक्रिया को अब नई गति मिलने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह सवाल भी उठाती है कि इतने लंबे समय तक ये आरोपी रेड कॉर्नर नोटिस और इनाम की घोषणा के बावजूद क्यों नहीं पकड़े जा सके। नकली पहचान से दशकों तक बचे रहना यह दर्शाता है कि फरार अपराधियों की निगरानी प्रणाली में गंभीर खामियाँ रही हैं। अब जब आरोपी न्यायालय के सामने हैं, असली परीक्षा यह होगी कि दो दशक पुराने इस मामले में साक्ष्य और गवाह कितने प्रभावी साबित होते हैं।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

धनबाद SBI बैंक घोटाला मामला क्या है?
यह मामला झारखंड के धनबाद स्थित SBI मुख्य शाखा में नवंबर 2002 से जून 2005 के बीच ₹1,25,47,950 की धोखाधड़ी और गबन से जुड़ा है। CBI ने 31 अगस्त 2005 को इस मामले में प्राथमिकी दर्ज की थी।
CBI ने किन आरोपियों को गिरफ्तार किया और कहाँ से?
CBI ने बृजभूषण प्रसाद को महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले के कोपरगाँव से और करतार सिंह को छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से 21 जून 2026 को गिरफ्तार किया। दोनों को एक साथ समन्वित अभियान में पकड़ा गया।
ये आरोपी 20 साल तक कैसे बचते रहे?
अधिकारियों के अनुसार, दोनों आरोपी जाँच के दौरान नेपाल भाग गए थे और बाद में नकली पहचान के सहारे अलग-अलग स्थानों पर रह रहे थे। रेड कॉर्नर नोटिस और ₹25,000-₹25,000 के इनाम के बावजूद वे कानून की गिरफ्त से बचते रहे।
इस गिरफ्तारी के बाद मामले में आगे क्या होगा?
CBI अधिकारियों के अनुसार, दोनों आरोपियों को आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए सक्षम न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जा रहा है। इससे लंबे समय से लंबित इस मामले की सुनवाई प्रक्रिया को नई गति मिलने की उम्मीद है।
CBI ने इन भगोड़ों का पता कैसे लगाया?
CBI के अनुसार, लगातार प्रयासों, तकनीकी सूचनाओं, गुप्त निगरानी और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय के आधार पर दोनों आरोपियों का पता लगाया गया। इसके बाद 21 जून को दो अलग-अलग राज्यों में एक साथ अभियान चलाकर उन्हें गिरफ्तार किया गया।
राष्ट्र प्रेस
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