10 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

SBI धनबाद ₹1.25 करोड़ घोटाला: CBI ने 20 साल बाद दो फरार आरोपियों को महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ से दबोचा

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
SBI धनबाद ₹1.25 करोड़ घोटाला: CBI ने 20 साल बाद दो फरार आरोपियों को महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ से दबोचा

सारांश

20 साल की लंबी फरारी का अंत — CBI ने SBI धनबाद के ₹1.25 करोड़ घोटाले के दो आरोपियों को महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ से दबोचा। नेपाल में छिपने और पहचान बदलने के बावजूद तकनीकी निगरानी ने उन्हें कानून के सामने ला खड़ा किया।

मुख्य बातें

CBI ने SBI बैंक मोड़ शाखा, धनबाद के ₹1.25 करोड़ घोटाले में 20 वर्षों से फरार दो आरोपियों को गिरफ्तार किया।
बृजभूषण प्रसाद को महाराष्ट्र के कोपरगांव और करतार सिंह को छत्तीसगढ़ के रायपुर से पकड़ा गया।
धोखाधड़ी की अवधि नवंबर 2002 से जून 2005 ; CBI ने 31 अगस्त 2005 को FIR दर्ज की थी।
दोनों आरोपी पहले नेपाल भागे, फिर भारत लौटकर पहचान बदलकर अलग-अलग राज्यों में छिपे रहे।
अदालत द्वारा घोषित अपराधी करार दिए गए थे; रेड कॉर्नर नोटिस और नकद इनाम भी जारी था।
एक आरोपी को धनबाद अदालत ने न्यायिक हिरासत में भेजा; दूसरे को भी धनबाद लाया जा रहा है।

केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने झारखंड के धनबाद स्थित भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की बैंक मोड़ मुख्य शाखा में नवंबर 2002 से जून 2005 के बीच हुए ₹1.25 करोड़ के धोखाधड़ी और गबन मामले में करीब 20 वर्षों से फरार दो आरोपियों को अलग-अलग राज्यों से गिरफ्तार किया है। यह गिरफ्तारी उस मामले में एक बड़ी सफलता है जिसमें दोनों आरोपी अदालत द्वारा पहले ही घोषित अपराधी करार दिए जा चुके थे।

गिरफ्तारी का विवरण

CBI अधिकारियों के अनुसार, बृजभूषण प्रसाद को महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले के कोपरगांव से तथा करतार सिंह को छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से पकड़ा गया। दोनों वर्ष 2005 से जांच एजेंसियों की पकड़ से बाहर थे।

CBI का दावा है कि जांच की कार्रवाई तेज होने पर दोनों आरोपी नेपाल भाग गए और वहाँ कई वर्षों तक छिपे रहे। इसके बाद भारत लौटकर उन्होंने अपनी पहचान बदल ली और अलग-अलग राज्यों में रहकर गिरफ्तारी से बचते रहे।

मामले की पृष्ठभूमि

SBI की बैंक मोड़ शाखा में नवंबर 2002 से जून 2005 के बीच कथित तौर पर ₹1.25 करोड़ की धोखाधड़ी और गबन का मामला सामने आया था। इस संबंध में 31 अगस्त 2005 को CBI ने प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की थी। मामले में आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया था।

गौरतलब है कि जांच के दौरान दोनों आरोपी फरार हो गए थे और अदालत ने उन्हें घोषित अपराधी करार दिया था। उनकी तलाश में रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया गया था और नकद इनाम की भी घोषणा की गई थी।

तकनीकी निगरानी से मिली सफलता

CBI सूत्रों के अनुसार, पिछले कुछ महीनों से CBI ACB धनबाद की टीम मानव स्रोतों और तकनीकी निगरानी के ज़रिए दोनों आरोपियों की गतिविधियों पर नज़र रख रही थी। इसी के आधार पर समन्वित अभियान चलाकर उन्हें गिरफ्तार किया गया।

न्यायिक कार्रवाई

गिरफ्तार आरोपियों में से एक को धनबाद की अदालत में पेश किया गया, जहाँ से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। दूसरे आरोपी को भी धनबाद लाया जा रहा है और अदालत में पेशी के बाद उसे भी न्यायिक हिरासत में भेजे जाने की संभावना है।

आगे की जांच

CBI अब मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई और शेष पहलुओं की जांच में जुटी है। यह मामला इस बात का उदाहरण है कि दो दशक बाद भी जांच एजेंसियाँ आर्थिक अपराधियों को कानून के कटघरे में लाने में सक्षम हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह सवाल भी उठता है कि रेड कॉर्नर नोटिस और नकद इनाम के बावजूद दो दशक क्यों लगे। CBI की तकनीकी निगरानी की सफलता सराहनीय है, लेकिन बैंकिंग धोखाधड़ी के मामलों में इतनी लंबी फरारी प्रणालीगत खामियों की ओर भी इशारा करती है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

SBI धनबाद ₹1.25 करोड़ घोटाला क्या है?
यह धनबाद, झारखंड स्थित SBI की बैंक मोड़ मुख्य शाखा में नवंबर 2002 से जून 2005 के बीच हुई कथित ₹1.25 करोड़ की धोखाधड़ी और गबन का मामला है। CBI ने 31 अगस्त 2005 को FIR दर्ज की थी और आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं के तहत जांच शुरू की थी।
CBI ने किन दो आरोपियों को गिरफ्तार किया और कहाँ से?
CBI ने बृजभूषण प्रसाद को महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले के कोपरगांव से और करतार सिंह को छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से गिरफ्तार किया। दोनों वर्ष 2005 से फरार थे।
आरोपी 20 साल तक पकड़ से कैसे बचते रहे?
CBI के अनुसार, जांच तेज होने पर दोनों आरोपी नेपाल भाग गए और वहाँ कई वर्षों तक छिपे रहे। इसके बाद भारत लौटकर उन्होंने अपनी पहचान बदल ली और अलग-अलग राज्यों में रहकर गिरफ्तारी से बचते रहे।
गिरफ्तारी के बाद आरोपियों को कहाँ भेजा गया?
एक आरोपी को धनबाद की अदालत में पेश किया गया जहाँ से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। दूसरे आरोपी को भी धनबाद लाया जा रहा है और अदालत में पेशी के बाद उसे भी न्यायिक हिरासत में भेजे जाने की संभावना है।
CBI ने आरोपियों का पता कैसे लगाया?
CBI ACB धनबाद की टीम पिछले कुछ महीनों से मानव स्रोतों और तकनीकी निगरानी के ज़रिए दोनों आरोपियों की गतिविधियों पर नज़र रख रही थी। इसी आधार पर समन्वित अभियान चलाकर उन्हें दो अलग-अलग राज्यों से गिरफ्तार किया गया।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 2 महीने पहले
  5. 2 महीने पहले
  6. 3 महीने पहले
  7. 5 महीने पहले
  8. 1 साल पहले