SBI धनबाद ₹1.25 करोड़ घोटाला: CBI ने 20 साल बाद दो फरार आरोपियों को महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ से दबोचा
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने झारखंड के धनबाद स्थित भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की बैंक मोड़ मुख्य शाखा में नवंबर 2002 से जून 2005 के बीच हुए ₹1.25 करोड़ के धोखाधड़ी और गबन मामले में करीब 20 वर्षों से फरार दो आरोपियों को अलग-अलग राज्यों से गिरफ्तार किया है। यह गिरफ्तारी उस मामले में एक बड़ी सफलता है जिसमें दोनों आरोपी अदालत द्वारा पहले ही घोषित अपराधी करार दिए जा चुके थे।
गिरफ्तारी का विवरण
CBI अधिकारियों के अनुसार, बृजभूषण प्रसाद को महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले के कोपरगांव से तथा करतार सिंह को छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से पकड़ा गया। दोनों वर्ष 2005 से जांच एजेंसियों की पकड़ से बाहर थे।
CBI का दावा है कि जांच की कार्रवाई तेज होने पर दोनों आरोपी नेपाल भाग गए और वहाँ कई वर्षों तक छिपे रहे। इसके बाद भारत लौटकर उन्होंने अपनी पहचान बदल ली और अलग-अलग राज्यों में रहकर गिरफ्तारी से बचते रहे।
मामले की पृष्ठभूमि
SBI की बैंक मोड़ शाखा में नवंबर 2002 से जून 2005 के बीच कथित तौर पर ₹1.25 करोड़ की धोखाधड़ी और गबन का मामला सामने आया था। इस संबंध में 31 अगस्त 2005 को CBI ने प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की थी। मामले में आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया था।
गौरतलब है कि जांच के दौरान दोनों आरोपी फरार हो गए थे और अदालत ने उन्हें घोषित अपराधी करार दिया था। उनकी तलाश में रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया गया था और नकद इनाम की भी घोषणा की गई थी।
तकनीकी निगरानी से मिली सफलता
CBI सूत्रों के अनुसार, पिछले कुछ महीनों से CBI ACB धनबाद की टीम मानव स्रोतों और तकनीकी निगरानी के ज़रिए दोनों आरोपियों की गतिविधियों पर नज़र रख रही थी। इसी के आधार पर समन्वित अभियान चलाकर उन्हें गिरफ्तार किया गया।
न्यायिक कार्रवाई
गिरफ्तार आरोपियों में से एक को धनबाद की अदालत में पेश किया गया, जहाँ से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। दूसरे आरोपी को भी धनबाद लाया जा रहा है और अदालत में पेशी के बाद उसे भी न्यायिक हिरासत में भेजे जाने की संभावना है।
आगे की जांच
CBI अब मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई और शेष पहलुओं की जांच में जुटी है। यह मामला इस बात का उदाहरण है कि दो दशक बाद भी जांच एजेंसियाँ आर्थिक अपराधियों को कानून के कटघरे में लाने में सक्षम हैं।