सीबीआई की ₹231 करोड़ बैंक धोखाधड़ी पर बड़ी कार्रवाई, महाराष्ट्र-गुजरात में एक साथ छापेमारी
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने 5 जुलाई 2025 को महाराष्ट्र और गुजरात में एक साथ कई ठिकानों पर समन्वित तलाशी अभियान चलाया। यह कार्रवाई बेंगलुरु में दर्ज दो अलग-अलग बैंक धोखाधड़ी मामलों के संदर्भ में की गई, जिनमें कुल मिलाकर ₹231.81 करोड़ की वित्तीय हेराफेरी का आरोप है। दोनों मामलों में आरोपी कंपनियों के निदेशकों और अज्ञात लोक सेवकों के विरुद्ध आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी एवं जालसाजी के आरोप दर्ज हैं।
पहला मामला: आर एल ज्वेल्स लिमिटेड और SBI को ₹103.58 करोड़ का नुकसान
पहला मामला भारतीय स्टेट बैंक (SBI), मुंबई की शिकायत पर आर एल ज्वेल्स लिमिटेड और उसके निदेशकों के खिलाफ दर्ज किया गया था। एफआईआर के अनुसार, आरोपियों ने धन का दुरुपयोग किया, अन्य बैंकों के चालू खातों के माध्यम से धनराशि की हेराफेरी की और वित्तीय पुस्तकों तथा इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड में बदलाव किया। इस कथित धोखाधड़ी से SBI को ₹103.58 करोड़ का नुकसान हुआ बताया गया है।
दूसरा मामला: आशापुरा गारमेंट्स लिमिटेड और केनरा बैंक को ₹128.23 करोड़ की चपत
दूसरा मामला केनरा बैंक की शिकायत पर आशापुरा गारमेंट्स लिमिटेड और उसके निदेशकों के खिलाफ दर्ज है। आरोप है कि आशापुरा गारमेंट्स और उसके निदेशक केनरा बैंक के नेतृत्व वाले बैंकों के एक संघ को धोखा देने की आपराधिक साजिश में शामिल थे। इस कारण बैंक संघ को ₹128.23 करोड़ का भारी वित्तीय नुकसान हुआ।
आरोपों के अनुसार, कंपनी ने अपने कपड़ा व्यापार परिचालन के लिए स्वीकृत बैंक क्रेडिट सुविधाओं को गैर-उद्योग लेनदेन में बदल दिया और स्टील, एल्यूमीनियम तथा कोयले में कारोबार करने वाली संस्थाओं के साथ उच्च मूल्य के व्यापार में धन लगाया।
छापेमारी में क्या मिला
तलाशी के दौरान सीबीआई की टीमों ने आर एल ज्वेल्स लिमिटेड और आशापुरा गारमेंट्स लिमिटेड के कार्यालय परिसरों के साथ-साथ दोनों कंपनियों के निदेशकों से जुड़ी आवासीय संपत्तियों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की जांच की। इस दौरान धन के हेरफेर से संबंधित आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य बरामद किए गए।
जांच की दिशा
सीबीआई इस समय दोनों मामलों में साजिश की पूरी सीमा, धन के प्रवाह के मार्ग और इसमें शामिल सभी व्यक्तियों की भूमिका की पहचान करने के लिए विस्तृत जांच कर रही है। गौरतलब है कि बैंक धोखाधड़ी के ऐसे मामलों में एकाधिक राज्यों में एक साथ छापेमारी सीबीआई की नई रणनीतिक कार्यशैली को दर्शाती है, जो साक्ष्य नष्ट होने की संभावना को न्यूनतम करती है। आगे गिरफ्तारियाँ और संपत्ति कुर्की की कार्रवाई भी संभावित है।