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सीबीआई की ₹1,109 करोड़ बैंक धोखाधड़ी में बड़ी कार्रवाई: चार राज्यों के छह ठिकानों पर एकसाथ छापे

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सीबीआई की ₹1,109 करोड़ बैंक धोखाधड़ी में बड़ी कार्रवाई: चार राज्यों के छह ठिकानों पर एकसाथ छापे

सारांश

सीबीआई ने एक ही दिन में दो बड़े मोर्चों पर कार्रवाई की — ₹1,109 करोड़ की केनरा बैंक धोखाधड़ी में चार राज्यों में छापे और केएपीएल एमडी को नोएडा में ₹5 लाख की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया। दोनों मामले सार्वजनिक संस्थाओं के भीतर वित्तीय अनियमितताओं की गहरी जड़ों की ओर इशारा करते हैं।

मुख्य बातें

सीबीआई ने 18 जुलाई 2025 को पश्चिम बंगाल, ओडिशा, तमिलनाडु और उत्तराखंड में छह स्थानों पर एकसाथ छापेमारी की।
कार्रवाई एम/एस गुप्ता पावर इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड पर केनरा बैंक के साथ ₹1,109 करोड़ की कथित धोखाधड़ी के मामले में हुई।
कंपनी पर स्टॉक मूल्य फुलाने, वित्तीय विवरणों में हेरफेर और ऋण राशि के दुरुपयोग का आरोप है।
छापेमारी भुवनेश्वर की विशेष सीबीआई अदालत द्वारा जारी सर्च वारंट के आधार पर हुई; आपत्तिजनक दस्तावेज़ जब्त।
केएपीएल के एमडी अनुराग दानायक को 15 जुलाई को नोएडा में ₹5 लाख की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया; कुल माँग ₹15 लाख थी।
दोनों मामलों की जाँच अभी जारी है।

केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने 18 जुलाई 2025 को ₹1,109 करोड़ की बैंक धोखाधड़ी के मामले में पश्चिम बंगाल, ओडिशा, तमिलनाडु और उत्तराखंड में एकसाथ छह स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया। यह कार्रवाई भुवनेश्वर (ओडिशा) स्थित एम/एस गुप्ता पावर इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के विरुद्ध दर्ज मामले में की गई, जिस पर केनरा बैंक के साथ कथित तौर पर बड़े पैमाने पर वित्तीय हेराफेरी का आरोप है।

मुख्य घटनाक्रम

जाँच एजेंसी के अनुसार, गुप्ता पावर इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड ने केनरा बैंक से फंड-आधारित और गैर-फंड-आधारित वित्तीय सुविधाएँ प्राप्त करने के दौरान कथित तौर पर स्टॉक का मूल्य बढ़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत किया और व्यापारिक देय राशि को कृत्रिम रूप से फुलाया। इसके अलावा कंपनी के वित्तीय विवरणों में हेरफेर कर अधिक ऋण सुविधा हासिल की गई।

सीबीआई का आरोप है कि कंपनी ने ऋण राशि का दुरुपयोग एवं डायवर्जन किया और खातों को 'एवरग्रीन' करने का प्रयास भी किया — यानी पुराने बकाया को नए कर्ज से ढकने की कोशिश — जिसके चलते केनरा बैंक को भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ा।

तलाशी अभियान का विस्तार

यह पूरा तलाशी अभियान भुवनेश्वर स्थित विशेष सीबीआई अदालत द्वारा जारी सर्च वारंट के आधार पर चलाया गया। छापेमारी में निम्नलिखित स्थान शामिल रहे:

ओडिशा के भुवनेश्वर में कंपनी के चार निदेशकों के आवास; पश्चिम बंगाल के कोलकाता में कंपनी का पंजीकृत कार्यालय; उत्तराखंड के ऊधम सिंह नगर जिले के काशीपुर, तमिलनाडु के तिरुवल्लूर और ओडिशा के भुवनेश्वर स्थित कंपनी की तीन विनिर्माण इकाइयाँ। छापेमारी के दौरान सीबीआई ने कई आपत्तिजनक दस्तावेज़ और महत्वपूर्ण वित्तीय रिकॉर्ड जब्त किए हैं।

केएपीएल प्रकरण: रिश्वत में रंगे हाथ गिरफ्तारी

इसी बीच एक अलग मामले में सीबीआई ने 15 जुलाई 2025 को नोएडा में कर्नाटक एंटीबायोटिक्स एंड फार्मास्युटिकल्स लिमिटेड (केएपीएल) के प्रबंध निदेशक अनुराग दानायक को ₹5 लाख की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया।

जाँच एजेंसी के अनुसार, दानायक ने भोपाल स्थित एक फर्म — जो केएपीएल की अधिकृत सर्विस एजेंट है और मध्य प्रदेश के सरकारी संस्थानों को दवाइयाँ आपूर्ति करती है — से कुल ₹15 लाख की रिश्वत की माँग की थी। यह रिश्वत फर्म के सर्विस एजेंट एग्रीमेंट को मंजूरी देने, चालू वित्त वर्ष के लिए लंबित नवीनीकरण पूरा करने, अतिरिक्त सरकारी संस्थान आवंटित करने और दवाइयों की बिक्री पर मिलने वाले कमीशन में हिस्सेदारी के बदले माँगी गई थी।

आम जनता पर असर

बैंक धोखाधड़ी के इस मामले में केनरा बैंक — एक सार्वजनिक क्षेत्र का बैंक — को ₹1,109 करोड़ का कथित नुकसान हुआ है, जिसका अप्रत्यक्ष बोझ अंततः आम जमाकर्ताओं और करदाताओं पर पड़ता है। वहीं केएपीएल मामले में सरकारी दवा आपूर्ति श्रृंखला में भ्रष्टाचार की आशंका ने स्वास्थ्य सेवाओं की पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए हैं।

क्या होगा आगे

सीबीआई ने स्पष्ट किया है कि गुप्ता पावर इंफ्रास्ट्रक्चर मामले की जाँच अभी जारी है और जब्त दस्तावेज़ों के विश्लेषण के बाद अगले कदम तय किए जाएँगे। अनुराग दानायक की गिरफ्तारी के बाद केएपीएल मामले में भी आगे की कार्रवाई अपेक्षित है।

संपादकीय दृष्टिकोण

109 करोड़ के फर्जी स्टॉक वैल्यूएशन को इतने समय तक कैसे नज़रअंदाज़ किया। केएपीएल प्रकरण अलग लेकिन उतना ही चिंताजनक है — सरकारी दवा आपूर्ति श्रृंखला में शीर्ष स्तर पर रिश्वत की यह घटना बताती है कि जवाबदेही तंत्र अभी भी कमज़ोर है। सीबीआई की एकसाथ कई मोर्चों पर कार्रवाई सकारात्मक है, लेकिन असली कसौटी अभियोजन की गति और दोषसिद्धि दर होगी।
RashtraPress
20 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गुप्ता पावर इंफ्रास्ट्रक्चर पर सीबीआई की छापेमारी क्यों हुई?
सीबीआई के अनुसार, गुप्ता पावर इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड ने केनरा बैंक से ऋण सुविधाएँ लेने के लिए स्टॉक मूल्य फुलाने, वित्तीय विवरणों में हेरफेर करने और ऋण राशि का दुरुपयोग करने का कथित प्रयास किया, जिससे बैंक को ₹1,109 करोड़ का नुकसान हुआ। भुवनेश्वर की विशेष सीबीआई अदालत के सर्च वारंट के आधार पर 18 जुलाई 2025 को यह छापेमारी की गई।
सीबीआई ने किन-किन राज्यों में और कहाँ-कहाँ छापे मारे?
सीबीआई ने पश्चिम बंगाल (कोलकाता — पंजीकृत कार्यालय), ओडिशा (भुवनेश्वर — चार निदेशकों के आवास व विनिर्माण इकाई), उत्तराखंड (काशीपुर, ऊधम सिंह नगर) और तमिलनाडु (तिरुवल्लूर — विनिर्माण इकाई) में कुल छह स्थानों पर एकसाथ तलाशी ली।
'एवरग्रीनिंग' क्या है और इस मामले में इसका क्या आरोप है?
'एवरग्रीनिंग' वह प्रक्रिया है जिसमें कोई कंपनी पुराने बकाया कर्ज को नए ऋण से चुकाकर खाते को 'सक्रिय' दिखाती है, जिससे असली NPA छुप जाता है। सीबीआई का आरोप है कि गुप्ता पावर इंफ्रास्ट्रक्चर ने केनरा बैंक के साथ यही किया, जिससे बैंक को भारी वित्तीय नुकसान हुआ।
केएपीएल के एमडी अनुराग दानायक को किस आरोप में गिरफ्तार किया गया?
सीबीआई ने 15 जुलाई 2025 को नोएडा में अनुराग दानायक को ₹5 लाख की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया। उन पर भोपाल की एक फर्म से कुल ₹15 लाख की रिश्वत माँगने का आरोप है — सर्विस एजेंट एग्रीमेंट नवीनीकरण, अतिरिक्त सरकारी संस्थान आवंटन और दवा बिक्री कमीशन में हिस्सेदारी के बदले।
इन मामलों में आगे क्या कार्रवाई होगी?
सीबीआई ने स्पष्ट किया है कि गुप्ता पावर इंफ्रास्ट्रक्चर मामले की जाँच जारी है और जब्त दस्तावेज़ों के विश्लेषण के बाद अगले कदम तय होंगे। अनुराग दानायक की गिरफ्तारी के बाद केएपीएल मामले में भी न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ने की उम्मीद है।
राष्ट्र प्रेस
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