15 जुलाई 2026
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सीबीआई ने बैंक ऑफ बड़ौदा के शाखा प्रबंधक व क्रेडिट अधिकारी को ₹35,000 की रिश्वत लेते रंगे हाथों दबोचा

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सीबीआई ने बैंक ऑफ बड़ौदा के शाखा प्रबंधक व क्रेडिट अधिकारी को ₹35,000 की रिश्वत लेते रंगे हाथों दबोचा

सारांश

सरकारी योजना के तहत लोन पाने वाले एक आवेदक से ओवरड्राफ्ट जारी करने के बदले ₹45,000 की रिश्वत मांगी गई। सीबीआई ने जाल बिछाकर क्रेडिट अधिकारी को ₹35,000 लेते रंगे हाथों पकड़ा और शाखा प्रबंधक को भी गिरफ्तार किया — यह कार्रवाई सरकारी बैंकों में आम लोगों के शोषण के खिलाफ एक सख्त संदेश है।

मुख्य बातें

सीबीआई ने 15 जुलाई 2025 को बैंक ऑफ बड़ौदा, कोइरीपुर शाखा, सुल्तानपुर के शाखा प्रबंधक और क्रेडिट अधिकारी को गिरफ्तार किया।
आरोपियों ने मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना के तहत ₹5 लाख के स्वीकृत लोन की ओवरड्राफ्ट सुविधा के लिए ₹45,000 की रिश्वत मांगी।
क्रेडिट अधिकारी को ₹35,000 की रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा गया; शाखा प्रबंधक की मिलीभगत भी उजागर हुई।
मामला 13 जुलाई 2025 को दर्ज किया गया था; दोनों को लखनऊ की सक्षम अदालत में पेश किया जाएगा।
सीबीआई ने इससे पहले एनएचएआई शिलांग के प्रोजेक्ट डायरेक्टर को ₹13.38 करोड़ के बिल पर ₹12 लाख की रिश्वत मांगने के मामले में भी गिरफ्तार किया था।

केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने 15 जुलाई 2025 को बैंक ऑफ बड़ौदा की कोइरीपुर शाखा, जिला सुल्तानपुर (उत्तर प्रदेश) के शाखा प्रबंधक और क्रेडिट अधिकारी को रिश्वतखोरी के मामले में गिरफ्तार किया। आरोप है कि दोनों अधिकारियों ने मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना के तहत स्वीकृत लोन की ओवरड्राफ्ट सुविधा जारी करने के एवज में शिकायतकर्ता से ₹45,000 की रिश्वत मांगी थी।

मुख्य घटनाक्रम

शिकायतकर्ता को बैंक ऑफ बड़ौदा की कोइरीपुर शाखा से मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना के अंतर्गत ₹5 लाख का लोन स्वीकृत हुआ था। इसमें सावधि लोन (टीएल) की राशि तो खाते में स्थानांतरित कर दी गई, परंतु ओवरड्राफ्ट (ओडी) सुविधा रोक ली गई। शिकायत के अनुसार, शाखा प्रबंधक और क्रेडिट अधिकारी ने ओडी राशि जारी करने के लिए ₹45,000 की रिश्वत की मांग की।

जाल बिछाकर की गई कार्रवाई

सीबीआई ने 13 जुलाई 2025 को शिकायत के आधार पर मामला दर्ज किया। इसके बाद 15 जुलाई को जाल बिछाया गया, जिसमें आरोपी क्रेडिट अधिकारी को शिकायतकर्ता से ₹35,000 की रिश्वत स्वीकार करते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया। जांच में यह भी सामने आया कि यह रिश्वत शाखा प्रबंधक की मिलीभगत से ली जा रही थी। दोनों आरोपियों को तत्काल गिरफ्तार कर लिया गया।

अदालत में पेशी

गिरफ्तार दोनों आरोपियों को लखनऊ स्थित सक्षम न्यायालय में पेश किया जाएगा। सीबीआई आगे की जांच जारी रखेगी।

एनएचएआई मामले में भी सीबीआई की कार्रवाई

इससे पहले सीबीआई ने नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई), शिलांग के प्रोजेक्ट डायरेक्टर और दो निजी व्यक्तियों को भी रिश्वतखोरी के एक अलग मामले में गिरफ्तार किया था। 1 जुलाई 2025 को दर्ज उस मामले में आरोप था कि एनएचएआई के आरोपी अधिकारी ने शिकायतकर्ता के ₹13.38 करोड़ के बकाया बिल को प्रोसेस करने के लिए ₹12 लाख की रिश्वत मांगी और अग्रिम के रूप में ₹4 लाख की मांग की गई थी।

क्या होगा आगे

सीबीआई की यह कार्रवाई सरकारी बैंकों और सार्वजनिक संस्थाओं में भ्रष्टाचार के विरुद्ध जारी अभियान का हिस्सा है। गौरतलब है कि सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों से रिश्वत वसूली के ऐसे मामले छोटे उद्यमियों के लिए गंभीर बाधा बनते हैं। आने वाले दिनों में न्यायालय के समक्ष आरोप-पत्र दाखिल होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यानी छोटे उद्यमी, अपने ही बैंक अधिकारियों की रिश्वतखोरी के शिकार बनते हैं। मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना जैसी पहलें तब तक कागज़ी बनी रहेंगी जब तक बैंकिंग तंत्र में जवाबदेही की निगरानी नहीं होती। सीबीआई की ट्रैप कार्रवाई सराहनीय है, लेकिन असली सवाल यह है कि ऐसे मामले शिकायत तक पहुँचने से पहले आंतरिक ऑडिट में क्यों नहीं पकड़े जाते।
RashtraPress
15 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीबीआई ने बैंक ऑफ बड़ौदा के किन अधिकारियों को गिरफ्तार किया?
सीबीआई ने बैंक ऑफ बड़ौदा की कोइरीपुर शाखा, जिला सुल्तानपुर (उत्तर प्रदेश) के शाखा प्रबंधक और क्रेडिट अधिकारी को 15 जुलाई 2025 को गिरफ्तार किया। दोनों पर मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना के तहत स्वीकृत लोन की ओवरड्राफ्ट सुविधा जारी करने के बदले रिश्वत लेने का आरोप है।
रिश्वत की मांग किस कारण की गई थी?
शिकायतकर्ता को मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना के तहत ₹5 लाख का लोन स्वीकृत हुआ था, जिसमें सावधि लोन तो खाते में आ गया, लेकिन ओवरड्राफ्ट सुविधा रोक दी गई। आरोपियों ने इस ओडी सुविधा को जारी करने के एवज में ₹45,000 की रिश्वत मांगी।
सीबीआई ने आरोपियों को कैसे पकड़ा?
13 जुलाई 2025 को शिकायत दर्ज होने के बाद सीबीआई ने जाल बिछाया और 15 जुलाई को क्रेडिट अधिकारी को शिकायतकर्ता से ₹35,000 की रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा। जांच में शाखा प्रबंधक की मिलीभगत भी सामने आई, जिसके बाद दोनों को गिरफ्तार किया गया।
गिरफ्तार आरोपियों को अब कहाँ पेश किया जाएगा?
दोनों आरोपियों को लखनऊ स्थित सक्षम न्यायालय में पेश किया जाएगा, जहाँ आगे की कानूनी कार्यवाही होगी।
क्या सीबीआई ने हाल ही में इसी तरह के अन्य मामलों में भी कार्रवाई की है?
हाँ, सीबीआई ने एनएचएआई, शिलांग के प्रोजेक्ट डायरेक्टर और दो निजी व्यक्तियों को भी रिश्वतखोरी के मामले में गिरफ्तार किया था। उस मामले में ₹13.38 करोड़ के बकाया बिल को प्रोसेस करने के लिए ₹12 लाख की रिश्वत मांगी गई थी और ₹4 लाख अग्रिम में देने को कहा गया था।
राष्ट्र प्रेस
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