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सीबीआई का कानपुर देहात में बड़ा एक्शन: बैंक ऑफ बड़ौदा मैनेजर ₹15,000 रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार

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सीबीआई का कानपुर देहात में बड़ा एक्शन: बैंक ऑफ बड़ौदा मैनेजर ₹15,000 रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार

सारांश

सीबीआई ने कानपुर देहात में बैंक ऑफ बड़ौदा के ब्रांच मैनेजर गौरव वर्मा और दलाल राघवेंद्र को रंगे हाथ पकड़ा। आरोप है कि दोनों ने पीएमईजीपी लोनधारक से सरकारी सब्सिडी दस्तावेज के बदले ₹25,000 की रिश्वत माँगी और ₹15,000 लेते पकड़े गए।

मुख्य बातें

सीबीआई ने 4 जून 2025 को कानपुर देहात में ट्रैप ऑपरेशन चलाकर दो आरोपियों को गिरफ्तार किया।
गिरफ्तार आरोपी: गौरव वर्मा (ब्रांच मैनेजर) और राघवेंद्र (दलाल/बैंक मित्र), बैंक ऑफ बड़ौदा, नोनारी बुजुर्ग शाखा।
आरोपियों ने 'पंडित दीनदयाल ग्रामोद्योग रोजगार योजना' के तहत सब्सिडी दस्तावेज के बदले ₹25,000 की रिश्वत माँगी थी।
दलाल को शिकायतकर्ता से ₹15,000 की रिश्वत स्वीकार करते रंगे हाथ पकड़ा गया।
शिकायतकर्ता ने दिसंबर 2023 में पीएमईजीपी के तहत सोलर आटा मिल के लिए ₹10 लाख का ऋण लिया था।
दोनों आरोपियों को लखनऊ की सक्षम अदालत में पेश किया जाएगा; जाँच जारी है।

केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने 4 जून 2025 को कानपुर देहात, उत्तर प्रदेश में बैंक ऑफ बड़ौदा की नोनारी बुजुर्ग शाखा के ब्रांच मैनेजर और उसके दलाल को रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया। आरोपियों ने एक सरकारी योजना के तहत ब्याज सब्सिडी के दस्तावेज जारी करने के बदले शिकायतकर्ता से ₹25,000 की अनुचित माँग की थी, जिसमें से ₹15,000 की रिश्वत लेते समय पकड़े गए।

मामले की पृष्ठभूमि

शिकायतकर्ता ने दिसंबर 2023 में प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) के तहत सोलर आटा मिल स्थापित करने के लिए बैंक ऑफ बड़ौदा की नोनारी बुजुर्ग शाखा से ₹10 लाख का ऋण लिया था। दो वर्ष पूर्ण होने के बाद उसने 'पंडित दीनदयाल ग्रामोद्योग रोजगार योजना' के अंतर्गत ब्याज सब्सिडी का दावा करने के लिए आवश्यक दस्तावेज प्राप्त किए और खाते में सब्सिडी की पहली किश्त भी मिली।

रिश्वत की माँग और धमकी

जब शिकायतकर्ता ने सब्सिडी के अगले दौर के लिए दोबारा आवश्यक दस्तावेजों की माँग की, तो आरोपी ब्रांच मैनेजर ने दस्तावेज जारी करने के बदले दलाल/बैंक मित्र के माध्यम से ₹25,000 की रिश्वत की माँग की। साथ ही धमकी दी कि रिश्वत न देने पर जरूरी दस्तावेज जारी नहीं किए जाएँगे। यह ऐसे समय में आया है जब सरकारी योजनाओं में बिचौलियों द्वारा उत्पीड़न की शिकायतें लगातार बढ़ रही हैं।

सीबीआई का जाल और गिरफ्तारी

सीबीआई ने इस शिकायत के आधार पर 3 जून को मामला दर्ज किया और 4 जून को ट्रैप ऑपरेशन चलाया। दलाल को शिकायतकर्ता से ब्रांच मैनेजर की ओर से ₹15,000 की रिश्वत स्वीकार करते हुए रंगे हाथ पकड़ा गया। इसके तुरंत बाद दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया।

आरोपियों की पहचान

गिरफ्तार आरोपियों में गौरव वर्मा, शाखा प्रबंधक, बैंक ऑफ बड़ौदा, नोनारी बुजुर्ग शाखा, जिला-कानपुर देहात और राघवेंद्र, दलाल/बैंक मित्र, उसी शाखा के शामिल हैं। दोनों को लखनऊ की सक्षम अदालत के समक्ष पेश किया जाएगा।

आगे की कार्रवाई

सीबीआई की ओर से इस मामले में आगे की जाँच जारी है। गौरतलब है कि यह मामला उन छोटे उद्यमियों की कठिनाइयों को उजागर करता है जो सरकारी योजनाओं का लाभ लेने की कोशिश में भ्रष्ट अधिकारियों के शिकार बनते हैं। आने वाले दिनों में अदालती कार्यवाही और संभावित चार्जशीट से मामले की दिशा स्पष्ट होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन जब उन्हीं योजनाओं के दस्तावेज रिश्वत की 'कीमत' पर मिलें, तो नीति और क्रियान्वयन के बीच की खाई साफ दिखती है। सीबीआई की यह कार्रवाई स्वागतयोग्य है, परंतु असली सवाल यह है कि ऐसे मामले शिकायत के बाद ही सामने क्यों आते हैं — और कितने पीड़ित चुपचाप रिश्वत देकर आगे बढ़ जाते हैं।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीबीआई ने कानपुर देहात में किसे और क्यों गिरफ्तार किया?
सीबीआई ने बैंक ऑफ बड़ौदा की नोनारी बुजुर्ग शाखा के ब्रांच मैनेजर गौरव वर्मा और दलाल राघवेंद्र को 4 जून 2025 को गिरफ्तार किया। दोनों पर आरोप है कि उन्होंने 'पंडित दीनदयाल ग्रामोद्योग रोजगार योजना' के तहत सब्सिडी दस्तावेज जारी करने के बदले शिकायतकर्ता से ₹25,000 की रिश्वत माँगी।
इस रिश्वत मामले की शुरुआत कैसे हुई?
शिकायतकर्ता ने दिसंबर 2023 में पीएमईजीपी के तहत सोलर आटा मिल के लिए ₹10 लाख का ऋण लिया था। दो साल बाद जब उसने ब्याज सब्सिडी के अगले दौर के दस्तावेज माँगे, तो ब्रांच मैनेजर ने दलाल के जरिए रिश्वत की माँग की और धमकी दी कि बिना रिश्वत के दस्तावेज नहीं मिलेंगे।
सीबीआई ने आरोपियों को कैसे पकड़ा?
सीबीआई ने 3 जून को मामला दर्ज करने के बाद 4 जून को ट्रैप ऑपरेशन चलाया। दलाल राघवेंद्र को शिकायतकर्ता से ₹15,000 की रिश्वत स्वीकार करते रंगे हाथ पकड़ा गया, जिसके बाद ब्रांच मैनेजर गौरव वर्मा को भी गिरफ्तार कर लिया गया।
गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ आगे क्या होगा?
दोनों आरोपियों — गौरव वर्मा और राघवेंद्र — को लखनऊ की सक्षम अदालत के समक्ष पेश किया जाएगा। सीबीआई की ओर से आगे की जाँच जारी है और मामले में चार्जशीट दाखिल होने की संभावना है।
पीएमईजीपी और पंडित दीनदयाल ग्रामोद्योग रोजगार योजना क्या हैं?
प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) केंद्र सरकार की एक योजना है जो ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में लघु उद्योग स्थापित करने के लिए ऋण सुविधा देती है। 'पंडित दीनदयाल ग्रामोद्योग रोजगार योजना' के तहत ऐसे लोनधारकों को ब्याज सब्सिडी प्रदान की जाती है, जो इस मामले में भ्रष्टाचार का शिकार बनी।
राष्ट्र प्रेस
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