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सीबीआई ने उन्नाव के बिघापुर पोस्ट ऑफिस अधिकारी को ₹25,000 की रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा

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सीबीआई ने उन्नाव के बिघापुर पोस्ट ऑफिस अधिकारी को ₹25,000 की रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा

सारांश

सीबीआई ने उन्नाव के बिघापुर पोस्ट ऑफिस में एक ऑफिस असिस्टेंट को पीएमईजीपी सब्सिडी के वेरिफिकेशन के बदले ₹25,000 की रिश्वत लेते रंगे हाथों दबोचा। शिकायतकर्ता ने बेकरी के लिए ₹10 लाख का ऋण लिया था, जिस पर ₹3,49,500 की सब्सिडी मिली थी।

मुख्य बातें

सीबीआई ने 8 अगस्त को उन्नाव, उत्तर प्रदेश के बिघापुर पोस्ट ऑफिस के ऑफिस असिस्टेंट को गिरफ्तार किया।
आरोपी ने पीएमईजीपी सब्सिडी के यूनिट वेरिफिकेशन के बदले ₹35,000 की रिश्वत माँगी थी।
सीबीआई के ट्रैप ऑपरेशन में आरोपी को ₹25,000 की रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा गया।
शिकायतकर्ता ने उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक, भगवंत नगर से ₹10,00,000 का ऋण लिया था और ₹3,49,500 की सब्सिडी बैंक में जमा हुई थी।
आरोपी को लखनऊ की विशेष अदालत में पेश किया जाएगा।

केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने 8 अगस्त को उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले के बिघापुर पोस्ट ऑफिस में तैनात एक ऑफिस असिस्टेंट को ₹25,000 की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया। आरोपी पर एक लोन लाभार्थी से ₹35,000 की रिश्वत मांगने का आरोप है, जो प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) के तहत मिली सब्सिडी के सत्यापन के बदले माँगी गई थी।

मामले की पृष्ठभूमि

शिकायतकर्ता ने बेकरी व्यवसाय शुरू करने के लिए उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक, भगवंत नगर से पीएमईजीपी योजना के अंतर्गत ₹10,00,000 का ऋण लिया था। इस ऋण के सापेक्ष बैंक में ₹3,49,500 की सरकारी सब्सिडी जमा हो गई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि बिघापुर पोस्ट ऑफिस के आरोपी ऑफिस असिस्टेंट ने सब्सिडी से जुड़े यूनिट वेरिफिकेशन के एवज में ₹35,000 की अवैध माँग की।

सीबीआई का जाल और गिरफ्तारी

शिकायत के आधार पर सीबीआई ने 7 अगस्त को यह मुकदमा दर्ज किया। इसके बाद एजेंसी ने 8 अगस्त को ट्रैप ऑपरेशन चलाया और आरोपी को शिकायतकर्ता से ₹25,000 की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों दबोच लिया। यह कार्रवाई एजेंसी की पूर्व-नियोजित निगरानी के तहत की गई।

आगे की कानूनी प्रक्रिया

गिरफ्तार आरोपी को लखनऊ की संबंधित विशेष अदालत में पेश किया जाएगा। सीबीआई आगे की जाँच जारी रखे हुए है। यह मामला इस बात को उजागर करता है कि किस प्रकार सरकारी योजनाओं के लाभार्थी भ्रष्टाचार के शिकार हो सकते हैं।

पीएमईजीपी योजना और भ्रष्टाचार का खतरा

प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) केंद्र सरकार की एक प्रमुख योजना है, जो छोटे उद्यमियों को स्वरोजगार के लिए ऋण और सब्सिडी प्रदान करती है। यह ऐसे समय में आया है जब सरकारी योजनाओं में बिचौलियों द्वारा अनधिकृत वसूली की शिकायतें बढ़ती जा रही हैं। सीबीआई की यह कार्रवाई ऐसे मामलों में एक कड़ा संदेश देती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन जब तक वेरिफिकेशन प्रक्रिया को डिजिटल और पारदर्शी नहीं बनाया जाता, छोटे उद्यमी इसी तरह भ्रष्टाचार की चपेट में आते रहेंगे।
RashtraPress
8 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीबीआई ने उन्नाव में किसे और क्यों गिरफ्तार किया?
सीबीआई ने उन्नाव के बिघापुर पोस्ट ऑफिस के एक ऑफिस असिस्टेंट को 8 अगस्त को गिरफ्तार किया। आरोपी ने पीएमईजीपी योजना के तहत मिली सब्सिडी के वेरिफिकेशन के बदले शिकायतकर्ता से ₹35,000 की रिश्वत माँगी थी और ₹25,000 लेते हुए पकड़ा गया।
पीएमईजीपी योजना क्या है और इससे इस मामले का क्या संबंध है?
प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) केंद्र सरकार की एक योजना है जो छोटे उद्यमियों को स्वरोजगार के लिए ऋण और सब्सिडी देती है। इस मामले में शिकायतकर्ता ने बेकरी के लिए ₹10 लाख का ऋण लिया था और ₹3,49,500 की सब्सिडी बैंक में जमा हुई थी, जिसके वेरिफिकेशन के लिए रिश्वत माँगी गई।
सीबीआई ने इस मामले में कार्रवाई कैसे की?
सीबीआई ने शिकायत के आधार पर 7 अगस्त को मुकदमा दर्ज किया और 8 अगस्त को ट्रैप ऑपरेशन चलाया। आरोपी को शिकायतकर्ता से ₹25,000 की रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ लिया गया।
गिरफ्तार आरोपी के खिलाफ आगे क्या होगा?
गिरफ्तार आरोपी ऑफिस असिस्टेंट को लखनऊ की संबंधित विशेष अदालत में पेश किया जाएगा। सीबीआई मामले की आगे जाँच जारी रखे हुए है।
क्या माँगी गई पूरी रिश्वत वसूल की गई थी?
नहीं। आरोपी ने मूल रूप से ₹35,000 की रिश्वत माँगी थी, लेकिन सीबीआई के ट्रैप ऑपरेशन में उसे ₹25,000 की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया।
राष्ट्र प्रेस
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