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क्या बीजापुर डाक विभाग में रिश्वतखोरी का भंडाफोड़ हुआ?

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क्या बीजापुर डाक विभाग में रिश्वतखोरी का भंडाफोड़ हुआ?

सारांश

बीजापुर डाक विभाग में रिश्वतखोरी का मामला सामने आया है, जिससे पूरे जिले में हड़कंप मच गया है। सीबीआई ने चार अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है, जो ट्रांसफर और रिलीविंग ऑर्डर के बदले रिश्वत मांग रहे थे। क्या यह कार्रवाई भ्रष्टाचार के खिलाफ एक मजबूत कदम है?

मुख्य बातें

सीबीआई ने बीजापुर डाक विभाग में रिश्वतखोरी के मामले में चार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की है।
रिश्वत मांगने के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई है।
इस कार्रवाई को भ्रष्टाचार के खिलाफ एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
पूरे जिले में इस घटना के बाद भय का माहौल है।
सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

बीजापुर, 27 दिसंबर (राष्ट्र प्रेस)। छत्तीसगढ़ के बीजापुर डाक विभाग में हुए रिश्वतखोरी के मामले ने जिले में हड़कंप मचा दिया है। सीबीआई ने ट्रांसफर और रिलीविंग ऑर्डर जारी करने के बदले रिश्वत मांगने के आरोप में चार अधिकारियों/कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।

इस कार्रवाई को जिले में भ्रष्टाचार के खिलाफ अब तक की सबसे सख्त पहल के रूप में देखा जा रहा है।

जानकारी के अनुसार, 23 दिसंबर की शाम रायपुर स्थित सीबीआई कार्यालय को विश्वसनीय सूचना मिली थी कि बीजापुर पोस्ट ऑफिस में कुछ अधिकारी और कर्मचारी अपने पद का दुरुपयोग करते हुए अवैध वसूली कर रहे हैं। शिकायतकर्ता, जिसका स्थानांतरण छत्तीसगढ़ से बाहर हो गया था, स्वयं रायपुर नहीं पहुँच सका। इस पर सीबीआई ने एक विशेष टीम का गठन किया और 24 दिसंबर को बीजापुर रवाना किया।

सीबीआई को 24 दिसंबर को लिखित शिकायत मिली जिसमें उप मंडलीय निरीक्षक (पोस्ट) शास्त्री कुमार पैंकरा, एबीपीएम संतोष आंद्रिक, मेल ओवरसीयर मलोथ शोभन और जीडीएस बीपीओ आंद्रिक पर रिलीविंग ऑर्डर जारी करने के एवज में रिश्वत मांगने का गंभीर आरोप लगाया गया। शिकायत में 8 हजार रुपए की मांग की गई थी।

सीबीआई इंस्पेक्टर रवि रंजन द्वारा स्वतंत्र गवाहों के सामने की गई प्राथमिक जांच में 4 हजार रुपए की रिश्वत मांगने की पुष्टि हुई। आरोपों को सही पाए जाने के बाद भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 61(2) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (संशोधित 2018) की धारा 7 के तहत मामला दर्ज किया गया। एफआईआर के बाद सीबीआई की टीम ने चारों आरोपियों से करीब 20 घंटे तक पूछताछ की।

पूछताछ के दौरान ट्रांसफर, मेडिकल अवकाश और छुट्टी से संबंधित अन्य मामलों में भी रिश्वतखोरी की आशंका सामने आई है। जांच एजेंसी सभी पहलुओं से संबंधित दस्तावेजी साक्ष्य जुटाने के साथ-साथ पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है। पूछताछ के बाद सीबीआई ने चारों आरोपियों को रायपुर ले जाकर आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू की।

इस कार्रवाई के बाद बीजापुर डाक विभाग में अफरा-तफरी का माहौल बन गया है। विभागीय कर्मचारियों में भय और बेचैनी देखी जा रही है, जबकि आम नागरिकों में इस घटना को लेकर गहरी नाराजगी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि ट्रांसफर और रिलीविंग जैसे वैधानिक कार्यों के बदले रिश्वत मांगना गंभीर अपराध है। सीबीआई की इस सख्त कार्रवाई से यह साफ संदेश गया है कि सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार को अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

और सीबीआई की कार्रवाई इस दिशा में सकारात्मक संकेत देती है।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या बीजापुर डाक विभाग में रिश्वतखोरी का मामला गंभीर है?
हाँ, यह एक गंभीर मुद्दा है जो सरकारी विभागों में पारदर्शिता की कमी को दर्शाता है।
सीबीआई ने कितने अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की?
सीबीआई ने चार अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।
क्या इस मामले में आगे की कार्रवाई की जाएगी?
हाँ, सीबीआई ने आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है।
राष्ट्र प्रेस
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