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SBI के पूर्व ब्रांच मैनेजर को CBI कोर्ट ने रिश्वत में 4 साल की सजा, ₹90,000 जुर्माना

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SBI के पूर्व ब्रांच मैनेजर को CBI कोर्ट ने रिश्वत में 4 साल की सजा, ₹90,000 जुर्माना

सारांश

लखनऊ की CBI अदालत ने SBI की चंदौली शाखा के पूर्व मैनेजर अजय कुमार गौर को ₹10 लाख के पर्सनल लोन पर ₹50,000 रिश्वत माँगने के मामले में 4 साल कैद और ₹90,000 जुर्माने की सजा सुनाई। 2018 में रंगे हाथों गिरफ्तारी के बाद आया यह फैसला बैंकिंग भ्रष्टाचार के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई का संदेश देता है।

मुख्य बातें

CBI की लखनऊ विशेष अदालत ने 24 अगस्त 2026 को SBI के पूर्व ब्रांच मैनेजर अजय कुमार गौर को दोषी ठहराया।
गौर को 4 वर्ष के कारावास और ₹90,000 जुर्माने की सजा सुनाई गई।
आरोप था कि गौर ने ₹10 लाख पर्सनल लोन स्वीकृति के बदले ₹50,000 रिश्वत माँगी — लोन राशि का 5% ।
CBI ने 26 फरवरी 2018 को केस दर्ज कर गौर को ₹40,000 की रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा था।
इसी दौरान CBI ने 21 अगस्त को एक अन्य मामले में 23 साल से फरार भगोड़े रूप सिंह को भी गिरफ्तार किया।

केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की लखनऊ स्थित विशेष अदालत ने 24 अगस्त 2026 को भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की शाहूपुरी शाखा, चंदौली, उत्तर प्रदेश के तत्कालीन ब्रांच मैनेजर अजय कुमार गौर को रिश्वत मामले में दोषी ठहराते हुए 4 वर्ष के कारावास और ₹90,000 के जुर्माने की सजा सुनाई। यह फैसला उस मामले में आया है जिसमें गौर पर ₹10 लाख के पर्सनल लोन को स्वीकृत करने के बदले रिश्वत मांगने का आरोप था।

मामले का पूरा घटनाक्रम

CBI ने इस प्रकरण में 26 फरवरी 2018 को अजय कुमार गौर के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि गौर ने शिकायतकर्ता को ₹10 लाख का पर्सनल लोन स्वीकृत एवं वितरित करने के एवज में ₹50,000 की रिश्वत की माँग की — जो कि लोन राशि का 5 प्रतिशत थी।

शिकायत की जाँच के दौरान CBI ने गौर को शिकायतकर्ता से ₹40,000 की रिश्वत स्वीकार करते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया। इसके बाद 27 अप्रैल 2018 को चार्जशीट दाखिल की गई और 9 जनवरी 2019 को आरोप औपचारिक रूप से तय किए गए। लंबी न्यायिक प्रक्रिया के बाद अदालत ने अब दोष सिद्ध होने पर सजा सुनाई है।

फैसले का महत्व

यह मामला इस बात का उदाहरण है कि बैंकिंग सेवाओं जैसी सामान्य प्रक्रियाओं में भी भ्रष्टाचार के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई संभव है। गौरतलब है कि सरकारी बैंकों में लोन स्वीकृति जैसी नियमित प्रक्रियाओं में रिश्वतखोरी आम नागरिकों को सीधे प्रभावित करती है, और इस तरह के फैसले भविष्य में निवारक प्रभाव डाल सकते हैं।

CBI की अन्य कार्रवाइयाँ

इसी क्रम में 21 अगस्त को CBI ने एक अन्य मामले में भगोड़े अभियुक्त रूप सिंह को गिरफ्तार किया, जो लगभग 23 वर्षों से फरार था। उस पर ग्राहकों तक सामान ले जा रहे ट्रकों से ₹9 लाख का माल गलत तरीके से हड़पने का आरोप है।

यह प्रकरण 4 अक्टूबर 1998 को महाराष्ट्र के अमलनेर पुलिस स्टेशन में दर्ज केस संख्या 178/1998 से संबंधित है, जिसमें दो ट्रकों में लदे घी और मूंग जैसे सामान की कथित चोरी और हेराफेरी शामिल है। इससे पहले, इसी मामले में सह-आरोपी अर्जुन सिंह को लगभग 22 वर्ष की फरारी के बाद 7 नवंबर 2025 को गिरफ्तार किया गया था।

आगे की स्थिति

अजय कुमार गौर को सुनाई गई सजा अब कानूनी रूप से प्रभावी है। दोषी के पास उच्च न्यायालय में अपील का विकल्प उपलब्ध है। CBI की यह कार्रवाई सरकारी बैंकिंग तंत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो न्यायिक प्रक्रिया की गति पर प्रश्नचिह्न लगाता है। CBI की कार्रवाइयाँ सराहनीय हैं, परंतु असली निवारण तभी संभव है जब ऐसे मामलों में त्वरित न्याय सुनिश्चित हो और बैंकिंग निगरानी तंत्र को और सुदृढ़ किया जाए।
RashtraPress
25 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

SBI के पूर्व ब्रांच मैनेजर अजय कुमार गौर को किस मामले में सजा मिली?
अजय कुमार गौर को ₹10 लाख के पर्सनल लोन को स्वीकृत करने के बदले ₹50,000 रिश्वत माँगने और ₹40,000 स्वीकार करने के मामले में CBI की लखनऊ अदालत ने 4 साल की सजा और ₹90,000 जुर्माना सुनाया है।
CBI ने इस मामले में कब कार्रवाई शुरू की थी?
CBI ने 26 फरवरी 2018 को केस दर्ज किया था और शिकायत के आधार पर गौर को रंगे हाथों गिरफ्तार किया। चार्जशीट 27 अप्रैल 2018 को दाखिल हुई और 9 जनवरी 2019 को आरोप तय हुए।
यह रिश्वत कितनी थी और किस उद्देश्य के लिए माँगी गई थी?
आरोप के अनुसार, गौर ने शिकायतकर्ता को ₹10 लाख का पर्सनल लोन दिलाने के बदले ₹50,000 की रिश्वत माँगी थी — जो लोन राशि का 5 प्रतिशत बनती है। CBI ने उन्हें ₹40,000 लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा।
CBI ने हाल ही में किस भगोड़े अपराधी को गिरफ्तार किया?
21 अगस्त को CBI ने रूप सिंह को गिरफ्तार किया, जो लगभग 23 वर्षों से फरार था। उस पर 1998 में महाराष्ट्र के अमलनेर में ट्रकों से ₹9 लाख का माल हड़पने का आरोप है।
क्या दोषी अजय कुमार गौर इस फैसले के खिलाफ अपील कर सकते हैं?
हाँ, दोषी के पास उच्च न्यायालय में अपील का कानूनी अधिकार उपलब्ध है। अभी तक किसी अपील की जानकारी सार्वजनिक नहीं हुई है।
राष्ट्र प्रेस
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