सवाई माधोपुर के पूर्व मुख्य कार्यालय अधीक्षक जालंधर योगी को रिश्वत मामले में 5 साल की सजा

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सवाई माधोपुर के पूर्व मुख्य कार्यालय अधीक्षक जालंधर योगी को रिश्वत मामले में 5 साल की सजा

सारांश

सवाई माधोपुर के पूर्व मुख्य कार्यालय अधीक्षक जालंधर योगी को सीबीआई अदालत ने रिश्वत मामले में पांच साल की सजा और 25,000 रुपये का जुर्माना सुनाया। यह फैसला भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई का प्रतीक है। पढ़ें पूरी जानकारी।

Key Takeaways

  • जालंधर योगी को 5 साल की सजा और 25,000 रुपये का जुर्माना।
  • सीबीआई ने 16 जून 2020 को मामला दर्ज किया।
  • भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई का संदेश।
  • सार्वजनिक पदों पर कार्यरत लोगों की जिम्मेदारी।
  • भविष्य में भ्रष्टाचार रोकने की उम्मीद।

जयपुर, 4 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की अदालत ने पश्चिम मध्य रेलवे, सवाई माधोपुर (राजस्थान) के पूर्व मुख्य कार्यालय अधीक्षक जालंधर योगी को रिश्वत मामले में दोषी ठहराते हुए पांच साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई और 25,000 रुपये का जुर्माना लगाया।

जांच में पता चला कि मामला 16 जून 2020 को दर्ज किया गया था। आरोप था कि जालंधर योगी ने किए गए काम के लंबित अंतिम बिल को पास करने के लिए 11,500 रुपये की रिश्वत मांगी। इस दौरान सीबीआई ने जाल बिछाकर आरोपी को शिकायतकर्ता से 10,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा। रिश्वत की राशि आरोपी के पास से बरामद कर ली गई।

जांच पूरी होने के बाद, सीबीआई ने 8 जनवरी 2021 को आरोपी के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। अदालत ने सुनवाई के दौरान सभी सबूतों और गवाहों की गवाही के आधार पर जालंधर योगी को दोषी ठहराया। न्यायालय ने कहा कि आरोपी ने अपने पद का दुरुपयोग किया और भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया, जो सार्वजनिक विश्वास को हानि पहुंचाने वाला अपराध है।

सुनवाई के बाद अदालत ने आरोपी को पांच साल की सजा सुनाई और 25,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि जुर्माने की राशि अदा नहीं की जाती है, तो आरोपी को अतिरिक्त सजा भुगतनी पड़ेगी।

इस फैसले के बाद सीबीआई ने कहा कि यह कदम सतर्कता और भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई का संदेश है। अधिकारी ने बताया कि भ्रष्टाचार की किसी भी घटना को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और सार्वजनिक पदों पर काम करने वाले लोग जिम्मेदारी और ईमानदारी से कार्य करें।

पूर्व मुख्य कार्यालय अधीक्षक जालंधर योगी के खिलाफ इस फैसले से उम्मीद जताई जा रही है कि भविष्य में रेलवे और अन्य विभागों में भ्रष्टाचार को रोकने में मदद मिलेगी और जनता का विश्वास बढ़ेगा।

Point of View

जो सार्वजनिक पदों पर कार्यरत लोगों के लिए चेतावनी है। यह फैसला न केवल न्याय का प्रतीक है, बल्कि यह भविष्य में भ्रष्टाचार को रोकने में भी मदद करेगा।
NationPress
11/04/2026

Frequently Asked Questions

जालंधर योगी को कितनी सजा सुनाई गई?
जालंधर योगी को पांच साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई गई है।
क्या जुर्माना भी लगाया गया है?
हां, जालंधर योगी पर 25,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।
भ्रष्टाचार के खिलाफ यह फैसला क्यों महत्वपूर्ण है?
यह फैसला भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई का प्रतीक है और भविष्य में सार्वजनिक विश्वास को बढ़ाने में मदद करेगा।
सीबीआई ने कब आरोप पत्र दाखिल किया?
सीबीआई ने 8 जनवरी 2021 को आरोपी के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी।
जुर्माने की राशि न देने पर क्या होगा?
यदि जुर्माने की राशि अदा नहीं की जाती है, तो आरोपी को अतिरिक्त सजा भुगतनी पड़ेगी।
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