जन्माष्टमी 2026: द्वारका, अहमदाबाद और राजकोट में उमड़ा आस्था का सैलाब, राजकोट में 22 किमी लंबी शोभायात्रा
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात के प्रमुख धार्मिक नगरों द्वारका, अहमदाबाद और राजकोट में 4 सितंबर 2026 को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। राज्यभर के मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना, शोभायात्राएँ और धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए गए। उत्सव का मुख्य समापन परंपरागत रूप से आधी रात को भगवान कृष्ण के जन्मोत्सव के साथ होना निर्धारित है।
द्वारका में जगत मंदिर पर श्रद्धालुओं का जनसैलाब
द्वारका के ऐतिहासिक जगत मंदिर (द्वारकाधीश मंदिर) में हज़ारों श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। मंदिर प्रशासन और पुलिस ने बैरिकेडिंग सहित विशेष भीड़ प्रबंधन के इंतज़ाम किए, ताकि दर्शन सुचारु रूप से हो सकें। द्वारका और बेट द्वारका में सुरक्षा व्यवस्था को विशेष रूप से मज़बूत किया गया। मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया गया।
अहमदाबाद और वडोदरा में इस्कॉन मंदिरों में उत्सव
अहमदाबाद के भाडज स्थित इस्कॉन मंदिर में सुबह से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु जन्माष्टमी समारोह में शामिल होने पहुँचे। वडोदरा के गोत्री स्थित इस्कॉन मंदिर को रंग-बिरंगी रोशनी और फूलों से सजाया गया, जहाँ धार्मिक कार्यक्रम और प्रार्थना सभाएँ आयोजित की गईं। सूरत में तापी कुबेश्वर महादेव धाम में 2,000 किलोग्राम सब्जियों से निर्मित शिवलिंग उत्सव का प्रमुख आकर्षण रहा।
राजकोट में 41वीं भव्य शोभायात्रा, ड्रोन से निगरानी
राजकोट में विश्व हिंदू परिषद द्वारा आयोजित 41वीं जन्माष्टमी शोभायात्रा निकाली गई, जो 22 किलोमीटर की दूरी तय करते हुए शहर के प्रमुख मार्गों से गुज़री। इस शोभायात्रा में कई आकर्षक झाँकियाँ शामिल थीं, जिनमें 11 एक्टिवा वाहनों पर तैयार की गई अमरनाथ शिवलिंग की विशेष झाँकी उल्लेखनीय रही। प्रशासन ने ड्रोन और रियल-टाइम AI आधारित भीड़ प्रबंधन प्रणाली का उपयोग कर सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की।
मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री की शुभकामनाएँ
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने जन्माष्टमी की शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि भगवान कृष्ण प्रेम, स्नेह, ज्ञान, शक्ति, भक्ति और कर्म के प्रतीक हैं। उन्होंने भगवान कृष्ण को यशोदा के प्रिय बालक और अर्जुन के मार्गदर्शक व सारथी के रूप में स्मरण किया। मुख्यमंत्री ने कहा, 'भगवान कृष्ण ने जीवन को बंधनों में नहीं, बल्कि जागरूकता और उत्साह के साथ जीने का संदेश दिया है।'
उपमुख्यमंत्री हर्ष सांघवी ने भी जन्माष्टमी की शुभकामनाएँ दीं और भगवान कृष्ण की बांसुरी तथा मोरपंख से जुड़ा एक श्लोक साझा करते हुए प्रदेशवासियों को बधाई दी।
आस्था और प्रशासन का संगम
गुजरात में जन्माष्टमी का यह उत्सव धार्मिक आस्था और आधुनिक प्रशासनिक तैयारी का अनूठा संगम रहा। श्रद्धालु व्रत रखते हुए भजन-कीर्तन और धार्मिक कार्यक्रमों में भाग ले रहे हैं। उत्सव का मुख्य आयोजन आधी रात को भगवान कृष्ण के जन्म के प्रतीकात्मक क्षण पर संपन्न होगा, जिसके लिए राज्यभर में श्रद्धालु उत्सुकता से प्रतीक्षारत हैं।