2 सितंबर 2026
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जन्माष्टमी 2026: जयपुर के गोविंद देवजी से कुरुक्षेत्र और दिल्ली तक, 4 सितंबर को इन मंदिरों में उमड़ेगी भक्तों की भीड़

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जन्माष्टमी 2026: जयपुर के गोविंद देवजी से कुरुक्षेत्र और दिल्ली तक, 4 सितंबर को इन मंदिरों में उमड़ेगी भक्तों की भीड़

सारांश

मथुरा-वृंदावन से परे, उत्तर भारत के चार प्रमुख शहरों में 4 सितंबर को जन्माष्टमी का रंग अलग ही नज़र आएगा — जयपुर का गोविंद देवजी मंदिर, नाथद्वारा का श्रीनाथजी धाम, कुरुक्षेत्र की भगवद्गीता-भूमि और दिल्ली के इस्कॉन व बिरला मंदिर — हर जगह कान्हा के जन्म की अनूठी परंपराएँ और भक्तों का सैलाब।

मुख्य बातें

जन्माष्टमी 4 सितंबर 2026 को मनाई जाएगी; उत्तर भारत के प्रमुख कृष्ण मंदिरों में विशेष आयोजन होंगे।
जयपुर के गोविंद देवजी मंदिर में मंगला झांकी में भगवान को पीले वस्त्रों में सजाया जाएगा।
नाथद्वारा के श्रीनाथजी मंदिर में आधी रात अभिषेक, पंजीरी-पंचामृत भोग और बधाई गीतों से जन्मोत्सव मनाया जाएगा।
कुरुक्षेत्र में बिरला मंदिर और इस्कॉन मंदिर दोनों में भव्य कीर्तन महोत्सव और प्रसाद सेवा का आयोजन होगा।
नई दिल्ली के इस्कॉन और बिरला मंदिर में राधा-कृष्ण की झांकियाँ, अभिषेक और विशेष दर्शन उपलब्ध रहेंगे।

इस वर्ष जन्माष्टमी 4 सितंबर को मनाई जाएगी और मथुरा-वृंदावन के अलावा उत्तर भारत के कई ऐतिहासिक कृष्ण मंदिरों में भी भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव की धूम रहेगी। जयपुर, नाथद्वारा, कुरुक्षेत्र और नई दिल्ली के प्रसिद्ध मंदिर विशेष पूजा, श्रृंगार, अभिषेक और मध्यरात्रि के जन्मोत्सव से सजने के लिए तैयार हैं। इन स्थलों पर श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या में उपस्थिति अपेक्षित है।

जयपुर: गोविंद देवजी मंदिर में मंगला झांकी और विशेष आरती

राजस्थान की राजधानी जयपुर में गोविंद देवजी मंदिर जन्माष्टमी उत्सव का प्रमुख केंद्र है। इस ऐतिहासिक मंदिर में 4 सितंबर की सुबह विशेष मंगला झांकी का आयोजन होगा, जिसमें भगवान गोविंद देवजी को पीले वस्त्रों में सजाया जाएगा। मंगला आरती और ग्वाल आरती के दौरान मंदिर परिसर में भक्तों की भारी भीड़ जुटती है।

जयपुर के अन्य कृष्ण मंदिरों में भी सजावट, झांकियाँ और धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। बच्चे राधा-कृष्ण के रूप में सज-धज कर आते हैं और बाज़ारों में भी त्योहार की विशेष रौनक देखने को मिलती है।

नाथद्वारा: श्रीनाथजी मंदिर में बाल गोपाल का अभिषेक और भोग

राजस्थान के नाथद्वारा स्थित श्रीनाथजी मंदिर कृष्ण भक्तों के लिए विशेष महत्व रखता है। यहाँ भगवान श्रीनाथजी के बाल स्वरूप की उपासना की परंपरा है। मंदिर की आधिकारिक जानकारी के अनुसार, जन्माष्टमी के दिन बाल गोपाल का श्रृंगार, अभिषेक, पंजीरी, पंचामृत और फलों का भोग अर्पित किया जाता है। आधी रात जन्म के समय भगवान को स्नान कराया जाता है और इसके बाद आरती व बधाई गीतों के साथ जन्मोत्सव की खुशी मनाई जाती है।

कुरुक्षेत्र: भगवद्गीता की भूमि पर बिरला और इस्कॉन मंदिर में उत्सव

हरियाणा का कुरुक्षेत्र भगवान कृष्ण और भगवद्गीता से अपने ऐतिहासिक संबंध के कारण जन्माष्टमी पर विशेष महत्व रखता है। यहाँ का बिरला मंदिर सफेद संगमरमर से निर्मित है और भगवान कृष्ण को समर्पित है। भारत सरकार के पर्यटन पोर्टल के अनुसार, इस मंदिर में जन्माष्टमी पर भव्य आयोजन होता है।

इसके अतिरिक्त कुरुक्षेत्र का इस्कॉन मंदिर भी जन्माष्टमी पर विशेष कार्यक्रमों के लिए जाना जाता है। मंदिर की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, यहाँ अभिषेक, भोग, मंदिर की विशेष सजावट और दीर्घकालिक कीर्तन महोत्सव का आयोजन होता है। प्रसाद सेवा के साथ-साथ सामूहिक भक्ति का विशेष वातावरण यहाँ देखने को मिलता है।

दिल्ली: इस्कॉन और बिरला मंदिर में झांकियाँ और भजन-कीर्तन

राजधानी नई दिल्ली में भी जन्माष्टमी का उत्सव कई प्रमुख मंदिरों में धूमधाम से मनाया जाता है। दिल्ली के इस्कॉन मंदिर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर भजन, कीर्तन, पूजा, अभिषेक और भगवान के विशेष दर्शन का माहौल रहता है। दिल्ली के बिरला मंदिर और विभिन्न राधा-कृष्ण मंदिरों में भी इस दिन विशेष सजावट और पूजा-अर्चना आयोजित की जाती है।

मंदिरों के आसपास राधा-कृष्ण की झांकियाँ और भक्ति कार्यक्रम समूचे वातावरण को उत्सवमय बना देते हैं। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए मंदिर प्रशासन विशेष व्यवस्थाएँ करता है।

आगे क्या: उत्तर भारत में जन्माष्टमी का व्यापक उत्साह

यह ऐसे समय में आया है जब मथुरा-वृंदावन की भीड़ से बचने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु इन वैकल्पिक तीर्थ स्थलों की ओर रुख कर रहे हैं। 4 सितंबर को जन्माष्टमी के दिन जयपुर, नाथद्वारा, कुरुक्षेत्र और दिल्ली के इन मंदिरों में दर्शन के लिए पहले से व्यवस्था करना उचित रहेगा। इन स्थलों पर आने वाले भक्तों के लिए स्थानीय प्रशासन और मंदिर समितियाँ विशेष प्रबंध करती हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जबकि जयपुर का गोविंद देवजी मंदिर, नाथद्वारा का श्रीनाथजी धाम और कुरुक्षेत्र की भगवद्गीता-भूमि — ये सभी अपनी स्वतंत्र परंपराओं और लाखों की श्रद्धा के साथ उतने ही महत्वपूर्ण तीर्थ हैं। यह विविधता भारत की सांस्कृतिक गहराई को दर्शाती है, जहाँ एक ही देवता की उपासना के रंग हर क्षेत्र में अलग हैं। मुख्यधारा की मीडिया जो अक्सर चूकती है वह यह है कि इन स्थानीय केंद्रों पर बढ़ती भीड़ एक व्यापक प्रवृत्ति का संकेत है — श्रद्धालु अब भीड़भाड़ से बचने के लिए वैकल्पिक तीर्थों की ओर रुख कर रहे हैं, जो इन मंदिरों की बुनियादी सुविधाओं और प्रबंधन पर नई ज़िम्मेदारी डालता है।
RashtraPress
2 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जन्माष्टमी 2026 कब है और कहाँ-कहाँ मनाई जाएगी?
इस वर्ष जन्माष्टमी 4 सितंबर 2026 को मनाई जाएगी। मथुरा-वृंदावन के अलावा जयपुर, नाथद्वारा, कुरुक्षेत्र और नई दिल्ली के प्रमुख कृष्ण मंदिरों में भी विशेष आयोजन होंगे।
जयपुर के गोविंद देवजी मंदिर में जन्माष्टमी पर क्या होता है?
गोविंद देवजी मंदिर में जन्माष्टमी की सुबह विशेष मंगला झांकी होती है, जिसमें भगवान को पीले वस्त्रों में सजाया जाता है। मंगला आरती और ग्वाल आरती के दौरान भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है।
नाथद्वारा के श्रीनाथजी मंदिर में जन्माष्टमी की क्या परंपरा है?
मंदिर की आधिकारिक जानकारी के अनुसार, जन्माष्टमी पर बाल गोपाल का श्रृंगार, अभिषेक और पंजीरी-पंचामृत-फल का भोग अर्पित किया जाता है। आधी रात जन्म के समय भगवान को स्नान कराया जाता है और बधाई गीतों के साथ जन्मोत्सव मनाया जाता है।
कुरुक्षेत्र में जन्माष्टमी का महत्व क्यों खास है?
कुरुक्षेत्र का भगवान कृष्ण और भगवद्गीता से ऐतिहासिक संबंध है, जो इसे जन्माष्टमी के लिए विशेष बनाता है। यहाँ बिरला मंदिर और इस्कॉन मंदिर दोनों में अभिषेक, कीर्तन महोत्सव और प्रसाद सेवा का आयोजन होता है।
दिल्ली में जन्माष्टमी पर कौन-से मंदिर विशेष रूप से सजते हैं?
नई दिल्ली में इस्कॉन मंदिर और बिरला मंदिर जन्माष्टमी पर विशेष रूप से सजते हैं। यहाँ भजन-कीर्तन, अभिषेक, राधा-कृष्ण की झांकियाँ और विशेष दर्शन का आयोजन किया जाता है।
राष्ट्र प्रेस
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