जन्माष्टमी 2025: देशभर के इस्कॉन मंदिरों में उमड़ी भक्तों की भीड़, धर्मेंद्र प्रधान ने पुरी में किए जगन्नाथ के दर्शन
सारांश
मुख्य बातें
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन पर्व पर 4 सितंबर को देशभर में भक्ति और उल्लास का अभूतपूर्व माहौल रहा। वाराणसी, पटना, मुंबई और कपूरथला सहित अनेक शहरों के मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लग गईं। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता और सांसद धर्मेंद्र प्रधान ने पुरी स्थित जगन्नाथ मंदिर में महाप्रभु जगन्नाथ के दर्शन कर देश और ओडिशा की समृद्धि के लिए प्रार्थना की।
धर्मेंद्र प्रधान का संदेश
धर्मेंद्र प्रधान ने पत्रकारों से कहा, 'आज जन्माष्टमी के पावन अवसर पर मुझे महाप्रभु श्री जगन्नाथ के दर्शन करने का सौभाग्य मिला। इस पवित्र दिन पर मैंने महाप्रभु और भगवान कृष्ण से दुनिया, देशवासियों और हमारे राज्य ओडिशा के कल्याण के लिए प्रार्थना किया। सनातन के जीवंत प्रभाव से ही इस देश का विकास होगा। आध्यात्मिकता से जुड़ने के कारण लोगों में आत्म विकास होगा।'
वाराणसी और पटना के इस्कॉन मंदिरों में उत्सव
उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित इस्कॉन मंदिर में सुबह से कीर्तन और भजनों की गूँज सुनाई दी। वहाँ पहुँचीं श्रद्धालु मुस्कान यादव ने कहा, 'हम सनातनियों के लिए यह बड़ा पर्व है। कृष्ण जन्माष्टमी के लिए हम लोग महीनों पहले से ही उत्साहित रहते हैं। मंदिर में सुबह से तांता लगा हुआ है और पूरा बनारस भगवान की सेवा के लिए उत्सुक दिख रहा है।' एक अन्य श्रद्धालु दिलीप दुबे ने भी पर्व को लेकर लोगों में व्यापक उत्साह की पुष्टि की।
बिहार की राजधानी पटना के इस्कॉन मंदिर में भी शुक्रवार की सुबह से भक्तों की भारी उपस्थिति रही। एक श्रद्धालु ने बताया, 'व्यवस्थाएं बहुत अच्छी हैं — इस वर्ष पिछले वर्षों की तुलना में भी बेहतर हैं। दर्शन में लगभग आधे घंटे की देरी हो सकती है।'
कपूरथला में शोभायात्रा, मुंबई में इस्कॉन का हीरक जयंती उत्सव
पंजाब के कपूरथला स्थित श्री सत्यनारायण मंदिर से जन्माष्टमी पर भव्य शोभायात्रा निकाली गई। मंदिर के पुजारी ने कहा, 'आज बांके बिहारी के जन्मोत्सव का दिन है और ठाकुर जी का यह उत्सव पूरी दुनिया में बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है।'
महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई के इस्कॉन मंदिर में इस वर्ष जन्माष्टमी विशेष रूप से महत्वपूर्ण रही, क्योंकि इस्कॉन अपनी स्थापना के 60 वर्ष पूरे कर रहा है। मंदिर के पुजारी ने बताया, 'यह जन्माष्टमी इस्कॉन के लिए बहुत खास है — आज इस्कॉन को 60 साल पूरे हो गए हैं और इस मौके पर बहुत अच्छी तैयारियां की गई हैं।'
आम जनता पर असर और सामाजिक महत्व
यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में सनातन परंपराओं के प्रति युवा पीढ़ी की रुचि बढ़ रही है। इस्कॉन के 60 वर्ष पूरे होना इस दृष्टि से भी उल्लेखनीय है कि संगठन ने भारत के साथ-साथ वैश्विक स्तर पर कृष्ण भक्ति को एक नई पहचान दी है। गौरतलब है कि जन्माष्टमी भारत के सबसे व्यापक रूप से मनाए जाने वाले धार्मिक पर्वों में से एक है, जो उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम — हर क्षेत्र में समान श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। आने वाले दिनों में मंदिरों में विशेष अनुष्ठान और सांस्कृतिक कार्यक्रम जारी रहने की संभावना है।