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लीजा रे की जयपुर यात्रा: बेटियों संग राजस्थानी थाली, टुक-टुक और सिटी पैलेस का अनुभव

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लीजा रे की जयपुर यात्रा: बेटियों संग राजस्थानी थाली, टुक-टुक और सिटी पैलेस का अनुभव

सारांश

अभिनेत्री लीजा रे ने जयपुर को महज एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि एक जीती-जागती सांस्कृतिक विरासत बताया। बेटियों के साथ राजस्थानी थाली, टुक-टुक की सवारी और जयपुर सेंटर फॉर आर्ट की यात्रा ने इस ट्रिप को यादगार बनाया।

मुख्य बातें

लीजा रे अपनी दोनों बेटियों के साथ जयपुर की सांस्कृतिक यात्रा पर हैं।
उन्होंने पारंपरिक राजस्थानी थाली का स्वाद लिया और संकरी गलियों में टुक-टुक की सवारी का आनंद उठाया।
बेटियों के आग्रह पर सिटी पैलेस का दौरा किया।
जयपुर सेंटर फॉर आर्ट में कला क्यूरेटर नोएल कदार से मुलाकात हुई और कलाकारों को काम करते देखा।
लीजा ने जयपुर को 'जीती-जागती परंपरा' वाला शहर बताया जहाँ इतिहास रोज़मर्रा की ज़िंदगी में घुला-मिला है।

अभिनेत्री लीजा रे इन दिनों अपनी दोनों बेटियों के साथ जयपुर के गुलाबी शहर की विरासत को करीब से जी रही हैं। 4 सितंबर को उन्होंने अपनी इस यात्रा की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किए, जिनमें पुरानी हवेलियाँ, रंग-बिरंगी गलियाँ, पारंपरिक राजस्थानी भोजन और स्थानीय कला का जीवंत संसार दिखाई देता है।

गुलाबी शहर की पहली झलक

लीजा ने अपनी पोस्ट में जयपुर को अपने नज़रिए से परिभाषित किया। उन्होंने लिखा, 'पहली नजर में यह शहर रंगों, बनावट और तरह-तरह के नजारों का एक खूबसूरत मेल लगता है, लेकिन असल में इसके पीछे एक लंबी कलात्मक परंपरा और सोच है।' उनके अनुसार जयपुर अपनी पुरानी विरासत को सँभालते हुए उसे नए तरीके से प्रस्तुत करने का हुनर जानता है — जहाँ पुराना और नया साथ-साथ चलते हैं।

राजस्थानी थाली और आँगनों की सजावट

यात्रा में खान-पान का अनुभव भी यादगार रहा। लीजा ने लिखा, 'मैंने अपनी बेटियों के साथ पारंपरिक राजस्थानी थाली का स्वाद लिया। वहाँ के आँगनों की सजावट मुझे बेहद खास लगी — खासतौर पर हरे और गुलाबी रंग का मेल शायद किसी दूसरी जगह उतना खूबसूरत न लगे, जितना जयपुर में लगता है।' संकरी गलियों में टुक-टुक की सवारी करते हुए रेस्तराँ जाना उनकी बेटियों को विशेष रूप से पसंद आया।

सिटी पैलेस और जयपुर सेंटर फॉर आर्ट

लीजा अपनी बेटियों के आग्रह पर सिटी पैलेस भी गईं। उन्होंने बताया कि बेटियों ने दोबारा वहाँ जाने की जिद की और वे मना नहीं कर पाईं। इस यात्रा का एक विशेष पड़ाव जयपुर सेंटर फॉर आर्ट रहा, जहाँ उनकी मुलाकात कला क्यूरेटर नोएल कदार से हुई। एक कार्यक्रम के दौरान उन्हें कलाकारों को काम करते हुए करीब से देखने का अवसर मिला, जिसे उनकी बेटियों ने भी बड़े चाव से देखा।

शॉपिंग और मेहमाननवाज़ी

लीजा ने स्वीकार किया कि इस बार जरूरत से ज्यादा खरीदारी न करने का उनका इरादा ज्यादा देर टिक नहीं पाया — बेटियों के लिए खरीदारी शुरू होते ही उनका संकल्प टूट गया। उन्होंने अपनी उस दोस्त का भी आभार जताया जिसने उनके लिए समय निकाला और जयपुर की मेहमाननवाज़ी से उनका परिचय कराया।

लीजा की नज़र में जयपुर

अपनी पोस्ट के अंत में लीजा ने लिखा, 'मेरे लिए जयपुर सिर्फ पुरानी इमारतों और इतिहास वाला शहर नहीं है। यहाँ परंपरा आज भी लोगों की ज़िंदगी में दिखाई देती है और हर पीढ़ी उसे अपने तरीके से आगे बढ़ाती है। यहाँ इतिहास धूल से ढका हुआ नहीं लगता, परंपराएँ किसी बोझ की तरह महसूस नहीं होतीं और खूबसूरती किसी शीशे के पीछे बंद नहीं है — इसे पहना जाता है, खाया जाता है, चित्रों में उतारा जाता है और रोज़मर्रा की ज़िंदगी में जिया जाता है।' यह यात्रा लीजा और उनकी बेटियों के लिए एक जीवंत सांस्कृतिक अनुभव बनकर उभरी।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि समकालीन कला के केंद्र के रूप में भी पहचान बना रहा है। मुख्यधारा की कवरेज जो अक्सर चूक जाती है वह यह है कि ऐसी यात्राएँ राजस्थान के सांस्कृतिक पर्यटन को एक नई, युवा-उन्मुख भाषा में प्रस्तुत करती हैं।
RashtraPress
4 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

लीजा रे जयपुर में क्या-क्या कर रही हैं?
लीजा रे अपनी बेटियों के साथ जयपुर की पुरानी हवेलियाँ, सिटी पैलेस और जयपुर सेंटर फॉर आर्ट देख रही हैं। उन्होंने राजस्थानी थाली का स्वाद लिया, टुक-टुक की सवारी की और कला क्यूरेटर नोएल कदार से भी मुलाकात की।
लीजा रे ने जयपुर के बारे में क्या कहा?
लीजा रे ने जयपुर को 'जीती-जागती परंपरा' वाला शहर बताया। उनके अनुसार यहाँ इतिहास धूल से ढका नहीं, बल्कि रोज़मर्रा की ज़िंदगी में घुला-मिला है — पहना जाता है, खाया जाता है और चित्रों में उतारा जाता है।
लीजा रे की बेटियाँ जयपुर में कहाँ गईं?
लीजा रे की बेटियाँ सिटी पैलेस और जयपुर सेंटर फॉर आर्ट गईं। सिटी पैलेस जाना खुद बेटियों की इच्छा थी और उन्होंने वहाँ दोबारा जाने की जिद भी की।
जयपुर सेंटर फॉर आर्ट में लीजा रे की किससे मुलाकात हुई?
जयपुर सेंटर फॉर आर्ट में लीजा रे की मुलाकात कला क्यूरेटर नोएल कदार से हुई। वहाँ एक कार्यक्रम के दौरान उन्हें और उनकी बेटियों को कलाकारों को काम करते हुए करीब से देखने का मौका मिला।
क्या लीजा रे ने जयपुर में शॉपिंग भी की?
हाँ, लीजा रे ने खुद स्वीकार किया कि जरूरत से ज्यादा न खरीदने का उनका संकल्प टूट गया और उन्होंने अपनी बेटियों के लिए खूब खरीदारी की।
राष्ट्र प्रेस
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