देव स्नान पूर्णिमा पर पुरी पहुंचे धर्मेंद्र प्रधान, बोले- 'महाप्रभु जगन्नाथ के दर्शन का मिला सौभाग्य'
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान 29 जून 2025 को देव स्नान पूर्णिमा के पावन अवसर पर पुरी पहुंचे और भगवान जगन्नाथ की स्नान यात्रा में भाग लिया। उन्होंने कहा कि यह उनके जीवन का सौभाग्यशाली क्षण है। इस अवसर पर देशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पुरी पहुंचे और महाप्रभु के दर्शन किए।
मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की भावुक प्रतिक्रिया
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा, 'यह मेरा सौभाग्य है कि आज मुझे महाप्रभु के दर्शन का अवसर मिला। पूर्णिमा के इस पावन अवसर पर, जो भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा से जुड़ा एक अत्यंत महत्वपूर्ण पर्व है, स्नान पूर्णिमा के अवसर पर पहली बार मैं यहां पहुंचा हूं।' उन्होंने आगे कहा कि महाप्रभु से उनकी प्रार्थना है कि समग्र मानव सभ्यता, भारत और ओडिशा को आगे ले जाएं।
स्नान यात्रा का आध्यात्मिक महत्व
प्रधान ने यह भी रेखांकित किया कि जगन्नाथ परंपरा और सनातन आस्था में रथ यात्रा से जुड़ी रस्मों का गहरा आध्यात्मिक महत्व है। उन्होंने कहा कि आज की स्नान यात्रा इन्हीं अहम अनुष्ठानों में से एक है। रथ यात्रा से पूर्व, भगवान जगन्नाथ रस्मी पवित्र स्नान के लिए बाहर आते हैं — यह परंपरा सदियों से अटूट रूप से निभाई जाती रही है। स्नान के पश्चात महाप्रभु को गजानन बेशा (हाथी के वेश) में सजाया जाता है, जो श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र होता है।
श्रद्धालुओं का उत्साह
उत्तराखंड से पुरी पहुंची एक श्रद्धालु ने कहा कि पुरी आने का मौका पाकर वे खुद को बहुत भाग्यशाली महसूस कर रही हैं। उन्होंने कहा, 'यह मेरी पहली यात्रा है। पुरी सिर्फ घूमने की जगह नहीं है, बल्कि एक पवित्र धार्मिक स्थल भी है। लोगों को यहां भगवान जगन्नाथ का आशीर्वाद लेने और साफ-सफाई बनाए रखने के लिए आना चाहिए।' एक अन्य श्रद्धालु ने भावुक होकर कहा, 'भगवान का बुलावा आया और हम आ गए। भगवान के दर्शन करने के बाद का एहसास शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता — यहां आने पर अलग ही ऊर्जा की अनुभूति होती है।'
सुरक्षा और तैयारियां
स्नान यात्रा के लिए पुरी में भव्य तैयारी की गई और सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए। प्रशासन ने श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए विशेष व्यवस्था सुनिश्चित की। गौरतलब है कि देव स्नान पूर्णिमा रथ यात्रा से पहले का सबसे महत्वपूर्ण अनुष्ठान माना जाता है, और हर वर्ष इस अवसर पर लाखों श्रद्धालु पुरी का रुख करते हैं।
आगे क्या
देव स्नान पूर्णिमा के बाद भगवान जगन्नाथ अनसर (एकांतवास) में चले जाते हैं और कुछ दिनों बाद विश्व प्रसिद्ध रथ यात्रा का आयोजन होगा, जिसकी तैयारियां पहले से ही जोरों पर हैं। इस वर्ष रथ यात्रा में भी बड़ी संख्या में देश-विदेश के श्रद्धालुओं के पुरी पहुंचने की उम्मीद है।