29 जून 2026
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देव स्नान पूर्णिमा पर पुरी पहुंचे धर्मेंद्र प्रधान, बोले- 'महाप्रभु जगन्नाथ के दर्शन का मिला सौभाग्य'

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देव स्नान पूर्णिमा पर पुरी पहुंचे धर्मेंद्र प्रधान, बोले- 'महाप्रभु जगन्नाथ के दर्शन का मिला सौभाग्य'

सारांश

देव स्नान पूर्णिमा पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पहली बार पुरी पहुंचे और भगवान जगन्नाथ के दर्शन किए। रथ यात्रा से पूर्व होने वाला यह पवित्र स्नान अनुष्ठान सनातन आस्था का अभिन्न अंग है। देशभर से श्रद्धालु उमड़े, महाप्रभु को स्नान के बाद गजानन बेशा में सजाया जाएगा।

मुख्य बातें

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान 29 जून 2025 को देव स्नान पूर्णिमा पर पुरी पहुंचे और भगवान जगन्नाथ के दर्शन किए।
प्रधान ने कहा कि यह उनकी स्नान पूर्णिमा पर पुरी की पहली यात्रा है और उन्होंने इसे अपना सौभाग्य बताया।
स्नान के बाद महाप्रभु जगन्नाथ को गजानन बेशा (हाथी के वेश) में सजाया जाएगा।
देशभर से — उत्तराखंड सहित — बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पुरी पहुंचे।
स्नान यात्रा के बाद भगवान जगन्नाथ एकांतवास में जाएंगे, इसके पश्चात विश्व प्रसिद्ध रथ यात्रा का आयोजन होगा।

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान 29 जून 2025 को देव स्नान पूर्णिमा के पावन अवसर पर पुरी पहुंचे और भगवान जगन्नाथ की स्नान यात्रा में भाग लिया। उन्होंने कहा कि यह उनके जीवन का सौभाग्यशाली क्षण है। इस अवसर पर देशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पुरी पहुंचे और महाप्रभु के दर्शन किए।

मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की भावुक प्रतिक्रिया

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा, 'यह मेरा सौभाग्य है कि आज मुझे महाप्रभु के दर्शन का अवसर मिला। पूर्णिमा के इस पावन अवसर पर, जो भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा से जुड़ा एक अत्यंत महत्वपूर्ण पर्व है, स्नान पूर्णिमा के अवसर पर पहली बार मैं यहां पहुंचा हूं।' उन्होंने आगे कहा कि महाप्रभु से उनकी प्रार्थना है कि समग्र मानव सभ्यता, भारत और ओडिशा को आगे ले जाएं।

स्नान यात्रा का आध्यात्मिक महत्व

प्रधान ने यह भी रेखांकित किया कि जगन्नाथ परंपरा और सनातन आस्था में रथ यात्रा से जुड़ी रस्मों का गहरा आध्यात्मिक महत्व है। उन्होंने कहा कि आज की स्नान यात्रा इन्हीं अहम अनुष्ठानों में से एक है। रथ यात्रा से पूर्व, भगवान जगन्नाथ रस्मी पवित्र स्नान के लिए बाहर आते हैं — यह परंपरा सदियों से अटूट रूप से निभाई जाती रही है। स्नान के पश्चात महाप्रभु को गजानन बेशा (हाथी के वेश) में सजाया जाता है, जो श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र होता है।

श्रद्धालुओं का उत्साह

उत्तराखंड से पुरी पहुंची एक श्रद्धालु ने कहा कि पुरी आने का मौका पाकर वे खुद को बहुत भाग्यशाली महसूस कर रही हैं। उन्होंने कहा, 'यह मेरी पहली यात्रा है। पुरी सिर्फ घूमने की जगह नहीं है, बल्कि एक पवित्र धार्मिक स्थल भी है। लोगों को यहां भगवान जगन्नाथ का आशीर्वाद लेने और साफ-सफाई बनाए रखने के लिए आना चाहिए।' एक अन्य श्रद्धालु ने भावुक होकर कहा, 'भगवान का बुलावा आया और हम आ गए। भगवान के दर्शन करने के बाद का एहसास शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता — यहां आने पर अलग ही ऊर्जा की अनुभूति होती है।'

सुरक्षा और तैयारियां

स्नान यात्रा के लिए पुरी में भव्य तैयारी की गई और सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए। प्रशासन ने श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए विशेष व्यवस्था सुनिश्चित की। गौरतलब है कि देव स्नान पूर्णिमा रथ यात्रा से पहले का सबसे महत्वपूर्ण अनुष्ठान माना जाता है, और हर वर्ष इस अवसर पर लाखों श्रद्धालु पुरी का रुख करते हैं।

आगे क्या

देव स्नान पूर्णिमा के बाद भगवान जगन्नाथ अनसर (एकांतवास) में चले जाते हैं और कुछ दिनों बाद विश्व प्रसिद्ध रथ यात्रा का आयोजन होगा, जिसकी तैयारियां पहले से ही जोरों पर हैं। इस वर्ष रथ यात्रा में भी बड़ी संख्या में देश-विदेश के श्रद्धालुओं के पुरी पहुंचने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन धर्मेंद्र प्रधान की पुरी यात्रा उस व्यापक राजनीतिक प्रवृत्ति का हिस्सा है जिसमें सत्तारूढ़ दल के नेता सनातन आस्था के प्रतीकात्मक केंद्रों से खुद को जोड़ते हैं — विशेषकर ओडिशा जैसे राज्य में जहाँ BJP की हालिया चुनावी सफलता महत्वपूर्ण रही है। यह यात्रा ऐसे समय में हुई जब रथ यात्रा की तैयारियां जोरों पर हैं और पुरी राष्ट्रीय ध्यान का केंद्र है। आलोचक पूछ सकते हैं कि क्या ऐसी उपस्थिति आस्था की अभिव्यक्ति है या राजनीतिक दृश्यता का अवसर — परंतु श्रद्धालुओं की भावनाओं और मंत्री के वक्तव्य, दोनों में निष्ठा स्पष्ट दिखती है।
RashtraPress
29 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

देव स्नान पूर्णिमा क्या है और इसका क्या महत्व है?
देव स्नान पूर्णिमा भगवान जगन्नाथ का वार्षिक पवित्र स्नान अनुष्ठान है, जो रथ यात्रा से पहले ज्येष्ठ पूर्णिमा को आयोजित होता है। इस दिन महाप्रभु को 108 घड़ों के पवित्र जल से स्नान कराया जाता है और बाद में उन्हें गजानन बेशा में सजाया जाता है।
धर्मेंद्र प्रधान 29 जून को पुरी क्यों पहुंचे?
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान देव स्नान पूर्णिमा के अवसर पर भगवान जगन्नाथ की स्नान यात्रा में भाग लेने और दर्शन करने के लिए 29 जून 2025 को पुरी पहुंचे। उन्होंने बताया कि यह स्नान पूर्णिमा पर उनकी पहली पुरी यात्रा थी।
गजानन बेशा क्या होता है?
गजानन बेशा भगवान जगन्नाथ का एक विशेष श्रृंगार है जिसमें उन्हें हाथी के वेश में सजाया जाता है। यह श्रृंगार देव स्नान पूर्णिमा के दिन स्नान के बाद किया जाता है और श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र होता है।
स्नान यात्रा के बाद रथ यात्रा कब होगी?
देव स्नान पूर्णिमा के बाद भगवान जगन्नाथ कुछ दिनों के एकांतवास (अनसर) में चले जाते हैं, जिसके पश्चात विश्व प्रसिद्ध रथ यात्रा का आयोजन होता है। इस वर्ष रथ यात्रा की तैयारियां पहले से ही जोरों पर बताई जा रही हैं।
पुरी स्नान यात्रा में श्रद्धालुओं के लिए क्या व्यवस्था की गई?
इस वर्ष स्नान यात्रा के लिए पुरी में भव्य तैयारी की गई और सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए। प्रशासन ने देशभर से उमड़ी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए विशेष प्रबंध सुनिश्चित किए।
राष्ट्र प्रेस
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