देव स्नान पूर्णिमा पर पुरी में श्रद्धा का सैलाब, संबित पात्रा बोले — जगन्नाथ की मानवीय लीला आस्था का केंद्र
सारांश
मुख्य बातें
पुरी में 29 जून को देव स्नान पूर्णिमा के पावन अवसर पर श्रीजगन्नाथ मंदिर परिसर और पूरे शहर में भक्ति और उल्लास का असाधारण वातावरण रहा। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद संबित पात्रा ने इस अवसर पर महाप्रभु जगन्नाथ की सदियों पुरानी दिव्य परंपराओं, ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी के मंदिर दर्शन और उनके विशेष जनसंपर्क अभियान पर अपने विचार साझा किए।
महाप्रभु की मानवीय लीला — सदियों पुरानी परंपरा
पात्रा ने बताया कि देव स्नान पूर्णिमा पर महाप्रभु जगन्नाथ सिंहासन से बाहर आकर भक्तों को दर्शन देते हैं और उनका विधिवत स्नान संपन्न होता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, स्नान के पश्चात महाप्रभु अस्वस्थ हो जाते हैं और उन्हें ज्वर आता है, जिसके बाद उनका उपचार किया जाता है। इसी के साथ रथ यात्रा की तैयारियाँ प्रारंभ होती हैं। पात्रा के अनुसार, भगवान की यह मानवीय लीला सनातन श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है और सदियों से इसी परंपरा का निर्बाध पालन होता आया है।
मुख्यमंत्री माझी का मंदिर दर्शन और जनसंपर्क अभियान
इस वर्ष स्नान पूर्णिमा पर मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी सहित राज्य सरकार के कई मंत्री श्रीजगन्नाथ मंदिर पहुँचे और महाप्रभु के दर्शन कर पूजा-अर्चना की। मुख्यमंत्री ने भगवान जगन्नाथ से प्रार्थना की कि ओडिशा निरंतर विकास की राह पर अग्रसर रहे, भारत समृद्ध बने और समस्त विश्व का कल्याण हो। पुरी के लगभग सभी निवासी भी इस अवसर पर मंदिर पहुँचकर पूजा-अर्चना में सम्मिलित हुए।
गजपति महाराजा और पद्मश्री सुदर्शन पटनायक से मुलाकात
पात्रा ने बताया कि मुख्यमंत्री माझी ने विशेष संपर्क अभियान के तहत गजपति महाराजा से उनके निवास पर भेंट की। इसके अतिरिक्त, उन्होंने विश्वप्रसिद्ध रेत कलाकार और पद्मश्री सम्मानित सुदर्शन पटनायक के घर जाकर उनसे संवाद किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने अपनी सरकार के कार्यों का रिपोर्ट कार्ड सौंपा और सुझाव प्राप्त किए।
लोकतांत्रिक संवाद की सराहना
संबित पात्रा ने मुख्यमंत्री की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि लोकतंत्र में जनता और समाज के प्रतिष्ठित व्यक्तियों के बीच संवाद अत्यंत आवश्यक है। उनके अनुसार, जब कोई मुख्यमंत्री स्वयं अपने कार्यों का रिपोर्ट कार्ड लेकर लोगों के बीच जाता है और सुझाव माँगता है, तो यह एक स्वस्थ लोकतांत्रिक परंपरा का प्रतीक है। स्थानीय नागरिक इस कदम को सराहनीय मान रहे हैं।
पुरी में उत्सव का माहौल
देव स्नान पूर्णिमा के पावन अवसर पर पुरी शहर में उत्सव जैसा वातावरण रहा। पात्रा ने कहा कि यह पर्व पुरी और पूरे सनातन समाज के लिए अत्यंत पवित्र और विशेष महत्व का दिन है। आगामी रथ यात्रा की तैयारियाँ भी इसी के साथ आरंभ हो जाती हैं, जो इस उत्सवी वातावरण को और गहरा बनाती हैं।