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स्नान पूर्णिमा 2025: पुरी में महाप्रभु जगन्नाथ स्नान वेदी पर विराजे, 80 कंपनी बल तैनात

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स्नान पूर्णिमा 2025: पुरी में महाप्रभु जगन्नाथ स्नान वेदी पर विराजे, 80 कंपनी बल तैनात

सारांश

स्नान पूर्णिमा पर पुरी के श्री जगन्नाथ मंदिर में महाप्रभु स्नान वेदी पर विराजे — यह वह क्षण है जब माना जाता है कि स्वर्ग के सभी देवता भी अदृश्य रूप में दर्शन करते हैं। अब 15 दिनों का 'अनसर' काल शुरू होगा। प्रशासन ने 80 कंपनी बल और सीसीटीवी से सुरक्षा का मज़बूत घेरा बनाया है।

मुख्य बातें

29 जून को स्नान पूर्णिमा के अवसर पर महाप्रभु जगन्नाथ पुरी के श्री जगन्नाथ मंदिर की स्नान वेदी पर विराजमान हुए।
मंदिर के मुख्य प्रशासक ने सिंहद्वार पर साष्टांग प्रणाम कर अनुष्ठान का शुभारंभ किया।
मान्यता के अनुसार स्नान के बाद महाप्रभु 15 दिनों के लिए 'अनसर' काल में चले जाते हैं।
पुलिस अधीक्षक प्रतीक सिंह के अनुसार लगभग 80 कंपनियों के बल तैनात किए गए हैं।
मंदिर परिसर में सीसीटीवी और ट्रैफिक कंट्रोल रूम के जरिए निगरानी सुनिश्चित की गई है।

पुरी के विश्वविख्यात श्री जगन्नाथ मंदिर में 29 जून को स्नान पूर्णिमा के पावन अवसर पर महाप्रभु जगन्नाथ अपनी स्नान वेदी पर विराजमान हुए और विधिवत स्नान अनुष्ठान संपन्न हुआ। लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने 80 कंपनियों के सुरक्षा बल तैनात किए और सीसीटीवी एवं ट्रैफिक कंट्रोल रूम की व्यवस्था की गई।

मुख्य अनुष्ठान और आगमन

दिन के अनुष्ठान प्रारंभ होने से पूर्व श्री जगन्नाथ मंदिर के मुख्य प्रशासक ने सिंहद्वार पर साष्टांग प्रणाम कर मंदिर में प्रवेश किया। इसके उपरांत देवगणों को स्नान वेदी पर विराजमान कर स्नान कराया गया। मंदिर के सिंहद्वार के सामने श्रद्धालु ओडिसी नृत्य करते दिखे, जो इस पर्व की सांस्कृतिक विशेषता है।

धार्मिक मान्यता और आध्यात्मिक महत्व

मान्यता के अनुसार, स्नान के उपरांत महाप्रभु जगन्नाथ 15 दिनों के लिए अस्वस्थ हो जाते हैं, जिसे 'अनसर' काल कहा जाता है। इस अवधि में उनके दर्शन सामान्य भक्तों के लिए बंद रहते हैं। उत्तर पार्श्व मठ के अनंत नारायण रामानुज दास ने बताया कि 'महाप्रभु का आगमन अनोखा और दिव्य है — वे धीरे-धीरे आगे बढ़ते हैं, कभी बाईं ओर, कभी दाईं ओर और कभी आकाश की ओर देखते हैं।' उन्होंने कहा कि माना जाता है कि सभी देवता स्वर्ग से अदृश्य रूप में उन्हें निहार रहे हैं।

सुरक्षा के कड़े इंतजाम

पुरी के पुलिस अधीक्षक प्रतीक सिंह ने बताया कि स्नान यात्रा के दौरान सभी निर्धारित स्थानों पर पुलिस की तैनाती पूरी कर ली गई है और पूजा-विधि के प्रत्येक चरण के अनुसार सुरक्षा व्यवस्था की गई है। उन्होंने कहा, 'हमारे सभी काम योजना के अनुसार किए जा रहे हैं।' लगभग 80 कंपनियों के बलों की तैनाती की गई है, जो मंदिर परिसर के भीतर, बाहर, भीड़ नियंत्रण और यातायात प्रबंधन में सक्रिय हैं।

तकनीकी निगरानी और भक्तों की सुविधा

प्रशासन ने सीसीटीवी कैमरों और एक केंद्रीकृत ट्रैफिक कंट्रोल रूम के जरिए पूरे क्षेत्र की निगरानी सुनिश्चित की है। पुलिस अधीक्षक ने स्पष्ट किया कि सभी भक्तों को सुरक्षित और सुव्यवस्थित तरीके से महाप्रभु के दर्शन कराना प्रशासन की प्राथमिकता है। यह ऐसे समय में आया है जब जगन्नाथ रथ यात्रा भी निकट है, जिससे पुरी में श्रद्धालुओं की संख्या में भारी वृद्धि हो रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि पुरी प्रशासन के लिए एक बड़ी लॉजिस्टिक परीक्षा भी है — खासकर तब जब रथ यात्रा कुछ ही दिन दूर है और श्रद्धालुओं की संख्या चरम पर होती है। 80 कंपनी बल और सीसीटीवी की तैनाती प्रभावशाली लगती है, लेकिन असली प्रश्न यह है कि भीड़ प्रबंधन की योजना कितनी व्यावहारिक है, जब लाखों भक्त एक साथ दर्शन की प्रतीक्षा में होते हैं। पिछले वर्षों में भगदड़ की घटनाएँ यह याद दिलाती हैं कि संख्याबल से अधिक समन्वय और वास्तविक समय की प्रतिक्रिया ज़रूरी है।
RashtraPress
29 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

स्नान पूर्णिमा क्या है और इसका महत्व क्यों है?
स्नान पूर्णिमा वह पावन पर्व है जब महाप्रभु जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा को मंदिर की स्नान वेदी पर विराजमान कर विधिवत स्नान कराया जाता है। यह ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है और रथ यात्रा से पूर्व का सबसे महत्वपूर्ण अनुष्ठान माना जाता है।
स्नान के बाद महाप्रभु जगन्नाथ 15 दिनों के लिए क्यों अदृश्य हो जाते हैं?
मान्यता के अनुसार स्नान के बाद महाप्रभु जगन्नाथ अस्वस्थ हो जाते हैं, जिसे 'अनसर' काल कहा जाता है। इस 15-दिवसीय अवधि में सामान्य भक्तों के लिए उनके दर्शन बंद रहते हैं और विशेष पथ्य भोग अर्पित किया जाता है।
पुरी में स्नान पूर्णिमा के दौरान सुरक्षा की क्या व्यवस्था की गई है?
पुलिस अधीक्षक प्रतीक सिंह के अनुसार लगभग 80 कंपनियों के बल तैनात किए गए हैं। मंदिर के अंदर, बाहर, भीड़ नियंत्रण और यातायात प्रबंधन के लिए अलग-अलग टीमें हैं, साथ ही सीसीटीवी और ट्रैफिक कंट्रोल रूम भी सक्रिय हैं।
स्नान पूर्णिमा के अनुष्ठान की शुरुआत कैसे होती है?
अनुष्ठान की शुरुआत मंदिर के मुख्य प्रशासक द्वारा सिंहद्वार पर साष्टांग प्रणाम कर मंदिर में प्रवेश से होती है। इसके बाद देवगणों को स्नान वेदी पर विराजमान कर स्नान कराया जाता है और सिंहद्वार के सामने ओडिसी नृत्य जैसे सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं।
स्नान पूर्णिमा के बाद रथ यात्रा कब होगी?
स्नान पूर्णिमा के बाद 15 दिनों के 'अनसर' काल के समापन पर महाप्रभु जगन्नाथ की रथ यात्रा निकाली जाती है। यह पुरी का सबसे बड़ा वार्षिक उत्सव है, जिसमें देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु शामिल होते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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