29 जून 2026
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जगन्नाथ स्नान यात्रा 2026: हिमंता बिस्वा सरमा ने देशभर के भक्तों को दीं शुभकामनाएं, शांति-समृद्धि की प्रार्थना

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जगन्नाथ स्नान यात्रा 2026: हिमंता बिस्वा सरमा ने देशभर के भक्तों को दीं शुभकामनाएं, शांति-समृद्धि की प्रार्थना

सारांश

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने जगन्नाथ स्नान यात्रा पर देशभर के भक्तों को शुभकामनाएं दीं। पुरी के जगन्नाथ मंदिर में 108 घड़ों के पवित्र जल से देवताओं का स्नान हुआ। इसके बाद 'अनसारा' काल शुरू होगा और फिर भव्य रथ यात्रा के साथ देवता पुनः भक्तों को दर्शन देंगे।

मुख्य बातें

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने 29 जून 2026 को जगन्नाथ स्नान यात्रा पर देशभर के श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं दीं।
स्नान यात्रा को देबा स्नान पूर्णिमा भी कहते हैं; यह ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा को मनाई जाती है।
पुरी के जगन्नाथ मंदिर में 108 घड़ों के पवित्र जल से भगवान जगन्नाथ , भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा का स्नान कराया जाता है।
स्नान के बाद 'अनसारा' नामक पखवाड़े भर की अवधि में देवता सार्वजनिक दर्शन से दूर रहते हैं।
अनसारा के बाद वार्षिक रथ यात्रा में देवता पुनः भक्तों को दर्शन देते हैं।
असम सहित देश के कई राज्यों में इस अवसर पर विशेष प्रार्थना, भक्ति कार्यक्रम और सामुदायिक भोज आयोजित हुए।

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने 29 जून 2026 को भगवान जगन्नाथ की पवित्र स्नान यात्रा के अवसर पर देशभर के श्रद्धालुओं को हार्दिक शुभकामनाएं दीं और प्रत्येक घर में सुख, शांति, उत्तम स्वास्थ्य एवं समृद्धि की कामना की। यह पर्व हिंदू पंचांग के ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है और भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र तथा देवी सुभद्रा से जुड़े सर्वाधिक पवित्र अनुष्ठानों में गिना जाता है।

मुख्यमंत्री का संदेश

सरमा ने अपनी पोस्ट में भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा के चरण कमलों में विनम्र नमन अर्पित करते हुए लिखा, 'स्नान यात्रा के पवित्र अवसर पर भगवान श्री जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा के चरण कमलों में लाखों लोग विनम्र नमन करते हैं।' उन्होंने यह भी लिखा, 'परमेश्वर की असीम कृपा हर जीवन को सुख, शांति, उत्तम स्वास्थ्य और समृद्धि से भर दे। जय जगन्नाथ।' मुख्यमंत्री ने इस वार्षिक अनुष्ठान को हिंदू पंचांग का अत्यंत पवित्र अवसर बताया।

स्नान यात्रा का महत्व और अनुष्ठान

स्नान यात्रा, जिसे देबा स्नान पूर्णिमा भी कहते हैं, मुख्य रूप से ओडिशा के पुरी स्थित जगन्नाथ मंदिर से जुड़ी है। इस समारोह में मंदिर परिसर के विशेष कुएं से निकाले गए 108 घड़ों के पवित्र जल से तीनों देवताओं की प्रतिमाओं का विधि-विधान के साथ स्नान कराया जाता है। हर साल हजारों भक्त इस दिव्य अनुष्ठान के साक्षी बनने के लिए पुरी एकत्रित होते हैं।

अनसारा और रथ यात्रा की परंपरा

परंपरा के अनुसार, विस्तृत स्नान अनुष्ठान के पश्चात ऐसा माना जाता है कि देवता अस्वस्थ हो जाते हैं और उन्हें 'अनसारा' नामक पखवाड़े भर की अवधि के लिए सार्वजनिक दर्शन से दूर रखा जाता है। इस दौरान मंदिर के पुजारी विशेष अनुष्ठान संपन्न करते हैं, जिसके बाद वार्षिक रथ यात्रा के अवसर पर देवता पुनः भक्तों को दर्शन देते हैं। यह क्रम सदियों से अटूट रूप से चला आ रहा है।

असम में उत्सव का माहौल

स्नान यात्रा केवल ओडिशा तक सीमित नहीं है — असम सहित देश के अनेक राज्यों में यह पर्व धार्मिक उत्साह के साथ मनाया जाता है। असम के जगन्नाथ मंदिरों में इस अवसर पर विशेष प्रार्थना, भक्ति कार्यक्रम और सामुदायिक भोज का आयोजन किया गया। मुख्यमंत्री सरमा की शुभकामनाएं राज्य में इस पर्व के सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व को और रेखांकित करती हैं।

आगे क्या

स्नान यात्रा के साथ ही अनसारा काल आरंभ हो जाता है, जिसके बाद पुरी सहित देशभर में रथ यात्रा का भव्य आयोजन होगा — जो भगवान जगन्नाथ की सबसे बड़ी और सर्वाधिक प्रतीक्षित यात्रा है। श्रद्धालु अब रथ यात्रा की तैयारियों में जुट गए हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

वे राज्य और केंद्र दोनों स्तरों पर धार्मिक-सांस्कृतिक कूटनीति की बढ़ती भूमिका को दर्शाते हैं।
RashtraPress
29 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जगन्नाथ स्नान यात्रा क्या है?
जगन्नाथ स्नान यात्रा, जिसे देबा स्नान पूर्णिमा भी कहते हैं, हिंदू महीने ज्येष्ठ की पूर्णिमा को मनाया जाने वाला पवित्र अनुष्ठान है। इसमें पुरी के जगन्नाथ मंदिर में 108 घड़ों के पवित्र जल से भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा का विधि-विधान से स्नान कराया जाता है।
हिमंता बिस्वा सरमा ने स्नान यात्रा पर क्या कहा?
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने 29 जून 2026 को देशभर के श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं देते हुए प्रार्थना की कि परमेश्वर की कृपा हर जीवन को सुख, शांति, उत्तम स्वास्थ्य और समृद्धि से भर दे। उन्होंने 'जय जगन्नाथ' के साथ अपना संदेश समाप्त किया।
स्नान यात्रा के बाद 'अनसारा' क्या होता है?
परंपरा के अनुसार स्नान अनुष्ठान के बाद देवताओं को अस्वस्थ माना जाता है और उन्हें 'अनसारा' नामक पखवाड़े भर की अवधि के लिए सार्वजनिक दर्शन से दूर रखा जाता है। इस दौरान मंदिर के पुजारी विशेष अनुष्ठान करते हैं, जिसके बाद वार्षिक रथ यात्रा में देवता पुनः भक्तों को दर्शन देते हैं।
स्नान यात्रा मुख्य रूप से कहाँ मनाई जाती है?
यह अनुष्ठान मुख्य रूप से ओडिशा के पुरी स्थित जगन्नाथ मंदिर से जुड़ा है, जहाँ हर साल हजारों भक्त एकत्रित होते हैं। इसके साथ ही असम सहित देश के कई राज्यों में जगन्नाथ मंदिरों में विशेष प्रार्थना, भक्ति कार्यक्रम और सामुदायिक भोज का आयोजन किया जाता है।
स्नान यात्रा और रथ यात्रा में क्या संबंध है?
स्नान यात्रा, रथ यात्रा से पहले आने वाला प्रमुख अनुष्ठान है। स्नान के बाद अनसारा काल शुरू होता है, और इस अवधि की समाप्ति पर वार्षिक रथ यात्रा का भव्य आयोजन होता है जिसमें देवता भक्तों को पुनः दर्शन देते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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