दुर्गापुर नाबालिग रक्तदान कांड: मुख्य आरोपी किंगशुक मुखर्जी ओडिशा से गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर में नाबालिग छात्रों को पैसे का लालच देकर जबरन रक्तदान कराने के चर्चित मामले में पुलिस ने मुख्य आरोपी किंगशुक मुखर्जी को ओडिशा से गिरफ्तार कर लिया है। 13 अगस्त को पुलिस ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि किंगशुक घटना के बाद से फरार था और ओडिशा में छिपा हुआ था।
मामले का पूरा घटनाक्रम
इस महीने की शुरुआत में पश्चिम बर्धमान जिले के दुर्गापुर स्थित बिधाननगर के एक निजी अस्पताल में इस्पात नगरी के एक निजी स्कूल के नाबालिग छात्रों को लाया गया और उनका रक्त लिया गया। मामला उजागर होने पर दुर्गापुर पुलिस स्टेशन में लिखित शिकायत दर्ज कराई गई, जिसके आधार पर जाँच शुरू की गई।
जाँच में सामने आई कड़ियाँ
जाँचकर्ताओं के अनुसार, सबसे पहले स्कूल के पूर्व छात्र देबप्रिया चक्रवर्ती का नाम सामने आया। आरोप है कि देबप्रिया ने नाबालिगों को पैसे का लालच देकर अस्पताल पहुँचाया था। पूछताछ में उसने दावा किया कि उसे किसी अन्य व्यक्ति के कहने पर इस काम के लिए रखा गया था।
इसके बाद जाँच में तृणमूल छात्र परिषद (TMCP) के सदस्य अमित प्रसाद यादव और मालदा निवासी मोहम्मद हबीबुल्लाह — जो बिधाननगर के एक होटल में कार्यरत था — का नाम भी सामने आया। जाँच ने तब निर्णायक मोड़ लिया जब पुलिस सूत्रों ने किंगशुक मुखर्जी की इस पूरी साजिश में केंद्रीय भूमिका होने का दावा किया।
6 अगस्त की छापेमारी और पहली गिरफ्तारियाँ
6 अगस्त को दुर्गापुर पुलिस ने एक रेड में देबप्रिया चक्रवर्ती, मोहम्मद हबीबुल्लाह और अमित प्रसाद यादव को गिरफ्तार किया। इन तीनों की पूछताछ के दौरान किंगशुक मुखर्जी की भूमिका स्पष्ट हुई। किंगशुक का घर दुर्गापुर के बिधाननगर में है, लेकिन घटना के बाद वह ओडिशा भाग गया था।
राजनीतिक प्रतिक्रिया
दुर्गापुर पूर्व से भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायक चंद्र शेखर बनर्जी ने कहा कि पुलिस बिना किसी भेदभाव के जाँच कर रही है और इस गंभीर अपराध में शामिल सभी लोगों को दंडित किया जाएगा।
आगे क्या होगा
पुलिस अब यह जाँच कर रही है कि नाबालिगों को रक्तदान के लिए किस तरह से तैयार किया गया, उन्हें अस्पताल कौन ले गया और क्या इस पूरे मामले में कोई बड़ा संगठित गिरोह सक्रिय था। किंगशुक की गिरफ्तारी के बाद जाँच के नए सिरे खुलने की संभावना जताई जा रही है।