13 अगस्त 2026
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दुर्गापुर नाबालिग रक्तदान कांड: मुख्य आरोपी किंगशुक मुखर्जी ओडिशा से गिरफ्तार

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दुर्गापुर नाबालिग रक्तदान कांड: मुख्य आरोपी किंगशुक मुखर्जी ओडिशा से गिरफ्तार

सारांश

दुर्गापुर में नाबालिग छात्रों को पैसे का लालच देकर रक्तदान कराने के मामले में पुलिस ने मुख्य आरोपी किंगशुक मुखर्जी को ओडिशा से दबोचा। 6 अगस्त को तीन आरोपी पहले ही गिरफ्तार हो चुके हैं। अब जाँच का दायरा किसी बड़े गिरोह तक पहुँचने की ओर बढ़ रहा है।

मुख्य बातें

पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर में नाबालिग छात्रों को पैसे का लालच देकर बिधाननगर के एक निजी अस्पताल में रक्तदान कराया गया।
मुख्य आरोपी किंगशुक मुखर्जी को 13 अगस्त को ओडिशा से गिरफ्तार किया गया।
6 अगस्त को पुलिस ने पहली रेड में देबप्रिया चक्रवर्ती , मोहम्मद हबीबुल्लाह और अमित प्रसाद यादव को गिरफ्तार किया था।
TMCP सदस्य अमित प्रसाद यादव का नाम भी आरोपियों में शामिल है।
पुलिस अब किसी बड़े संगठित गिरोह की संलिप्तता की जाँच कर रही है।

पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर में नाबालिग छात्रों को पैसे का लालच देकर जबरन रक्तदान कराने के चर्चित मामले में पुलिस ने मुख्य आरोपी किंगशुक मुखर्जी को ओडिशा से गिरफ्तार कर लिया है। 13 अगस्त को पुलिस ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि किंगशुक घटना के बाद से फरार था और ओडिशा में छिपा हुआ था।

मामले का पूरा घटनाक्रम

इस महीने की शुरुआत में पश्चिम बर्धमान जिले के दुर्गापुर स्थित बिधाननगर के एक निजी अस्पताल में इस्पात नगरी के एक निजी स्कूल के नाबालिग छात्रों को लाया गया और उनका रक्त लिया गया। मामला उजागर होने पर दुर्गापुर पुलिस स्टेशन में लिखित शिकायत दर्ज कराई गई, जिसके आधार पर जाँच शुरू की गई।

जाँच में सामने आई कड़ियाँ

जाँचकर्ताओं के अनुसार, सबसे पहले स्कूल के पूर्व छात्र देबप्रिया चक्रवर्ती का नाम सामने आया। आरोप है कि देबप्रिया ने नाबालिगों को पैसे का लालच देकर अस्पताल पहुँचाया था। पूछताछ में उसने दावा किया कि उसे किसी अन्य व्यक्ति के कहने पर इस काम के लिए रखा गया था।

इसके बाद जाँच में तृणमूल छात्र परिषद (TMCP) के सदस्य अमित प्रसाद यादव और मालदा निवासी मोहम्मद हबीबुल्लाह — जो बिधाननगर के एक होटल में कार्यरत था — का नाम भी सामने आया। जाँच ने तब निर्णायक मोड़ लिया जब पुलिस सूत्रों ने किंगशुक मुखर्जी की इस पूरी साजिश में केंद्रीय भूमिका होने का दावा किया।

6 अगस्त की छापेमारी और पहली गिरफ्तारियाँ

6 अगस्त को दुर्गापुर पुलिस ने एक रेड में देबप्रिया चक्रवर्ती, मोहम्मद हबीबुल्लाह और अमित प्रसाद यादव को गिरफ्तार किया। इन तीनों की पूछताछ के दौरान किंगशुक मुखर्जी की भूमिका स्पष्ट हुई। किंगशुक का घर दुर्गापुर के बिधाननगर में है, लेकिन घटना के बाद वह ओडिशा भाग गया था।

राजनीतिक प्रतिक्रिया

दुर्गापुर पूर्व से भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायक चंद्र शेखर बनर्जी ने कहा कि पुलिस बिना किसी भेदभाव के जाँच कर रही है और इस गंभीर अपराध में शामिल सभी लोगों को दंडित किया जाएगा।

आगे क्या होगा

पुलिस अब यह जाँच कर रही है कि नाबालिगों को रक्तदान के लिए किस तरह से तैयार किया गया, उन्हें अस्पताल कौन ले गया और क्या इस पूरे मामले में कोई बड़ा संगठित गिरोह सक्रिय था। किंगशुक की गिरफ्तारी के बाद जाँच के नए सिरे खुलने की संभावना जताई जा रही है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गापुर नाबालिग रक्तदान मामला क्या है?
पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर में एक निजी स्कूल के नाबालिग छात्रों को पैसे का लालच देकर बिधाननगर के एक निजी अस्पताल में ले जाया गया और उनका रक्त लिया गया। मामला उजागर होने पर दुर्गापुर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज की गई और जाँच शुरू हुई।
किंगशुक मुखर्जी को कहाँ से और कब गिरफ्तार किया गया?
मुख्य आरोपी किंगशुक मुखर्जी को 13 अगस्त को ओडिशा से गिरफ्तार किया गया। घटना के बाद से वह अपने घर दुर्गापुर के बिधाननगर को छोड़कर ओडिशा में छिपा हुआ था।
इस मामले में अब तक कितने लोग गिरफ्तार हुए हैं?
अब तक कुल चार लोग गिरफ्तार हो चुके हैं। 6 अगस्त को पुलिस ने देबप्रिया चक्रवर्ती, मोहम्मद हबीबुल्लाह और अमित प्रसाद यादव को पकड़ा था। 13 अगस्त को मुख्य आरोपी किंगशुक मुखर्जी को ओडिशा से गिरफ्तार किया गया।
क्या इस मामले में किसी राजनीतिक दल का कोई सदस्य शामिल है?
जाँच के दौरान तृणमूल छात्र परिषद (TMCP) के सदस्य अमित प्रसाद यादव का नाम सामने आया और उन्हें 6 अगस्त को गिरफ्तार किया गया। पुलिस इस पहलू की भी जाँच कर रही है।
पुलिस आगे क्या जाँच कर रही है?
पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि नाबालिगों को रक्तदान के लिए किस तरह से तैयार किया गया और क्या इसके पीछे कोई बड़ा संगठित गिरोह काम कर रहा था। किंगशुक की गिरफ्तारी से जाँच में नए सिरे खुलने की उम्मीद है।
राष्ट्र प्रेस
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