पायला अविनाश का लक्ष्य: 'निडर नहीं, जिम्मेदार और निडर बल्लेबाज बनना है' — IPL से आगे की सोच
सारांश
मुख्य बातें
आंध्र प्रीमियर लीग में 58 गेंदों पर 11 छक्कों के साथ नाबाद 105 रन की पारी खेलकर सुर्खियों में आए युवा बल्लेबाज पायला अविनाश को आईपीएल 2025 के ऑक्शन में पंजाब किंग्स ने ₹30 लाख में अपनी टीम से जोड़ा। बचपन से रिकी पोंटिंग की बल्लेबाजी देखकर क्रिकेट की दुनिया में कदम रखने वाले अविनाश के लिए यह किसी सपने के पूरे होने जैसा था, क्योंकि पोंटिंग उसी टीम के हेड कोच थे। अविनाश ने राष्ट्र प्रेस से खास बातचीत में अपने सफर, अपनी बल्लेबाजी की फिलॉसफी और भविष्य की महत्वाकांक्षाओं को साझा किया।
घरेलू क्रिकेट से आईपीएल तक का सफर
आंध्र प्रीमियर लीग में लगातार तीन सीजन बेहतरीन प्रदर्शन करने के बाद पायला अविनाश पंजाब किंग्स की नजर में आए। अविनाश के अनुसार, जब उन्हें चुना गया, उस समय वे अपने तीसरे सीजन में एक शतक जड़ चुके थे। उन्होंने बताया, 'मैं बहुत किस्मत वाला था कि उस समय पंजाब किंग्स ने मुझे चुना। मैं आंध्र प्रीमियर लीग में बहुत अच्छा खेल रहा था और तीनों सीजन में मैंने लगातार अच्छा प्रदर्शन किया था।' ट्रायल्स में बेहतरीन प्रदर्शन के बाद शॉर्टलिस्ट होना और फिर आईपीएल की टीम में चुना जाना — यह एहसास अविनाश के लिए 'शब्दों में बयां न हो सके' जैसा था।
एक ओवर में पाँच छक्के और करियर का टर्निंग पॉइंट
आंध्र प्रीमियर लीग में एक ओवर में पाँच छक्के लगाने वाली पारी ने अविनाश को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कोई पूर्वनियोजित रणनीति नहीं थी — 'यह बस एक सहज प्रतिक्रिया थी। उस ओवर में दूसरी गेंद पर दो रन बने थे, इसीलिए छह छक्के मारने का कोई मौका ही नहीं था।' हालांकि, युवराज सिंह के छह छक्कों के रिकॉर्ड की बराबरी करने का सपना अभी भी जिंदा है। अविनाश ने कहा, 'किसी भी फॉर्मेट में एक ओवर में छह छक्के मारना हर बल्लेबाज का सपना होता है। मैं भी अपने नाम यह उपलब्धि दर्ज करने का इंतजार कर रहा हूं।'
पंजाब किंग्स का माहौल और रिकी पोंटिंग का असर
आईपीएल जैसे बड़े मंच पर पहले सीजन में कदम रखना किसी भी युवा खिलाड़ी के लिए दबाव भरा होता है, लेकिन अविनाश ने बताया कि पंजाब किंग्स के मालिकों, हेड कोच और पूरे स्टाफ ने उन्हें कभी अलग-थलग महसूस नहीं होने दिया। 'हर स्थिति में, चाहे मैदान पर हो या बाहर, उन्होंने मुझे बहुत सहज और आरामदायक महसूस कराया।'
जिस रिकी पोंटिंग की बल्लेबाजी देखकर वे बड़े हुए, उन्हीं से कोचिंग पाना अविनाश के लिए अविश्वसनीय अनुभव रहा। 'खेल के प्रति उनका रवैया और प्रतिबद्धता देखकर मैं सच में हैरान रह गया। उन्होंने मुझे बड़ी-बड़ी बातें नहीं बताईं, बल्कि छोटे-छोटे तकनीकी बदलाव किए जिनसे मेरी बल्लेबाजी में बहुत सुधार आया।'
निडर बनाम जिम्मेदार — अविनाश की बल्लेबाजी फिलॉसफी
अविनाश का स्वाभाविक खेल आक्रामक है, लेकिन वे 'निडर' और 'लापरवाह' के बीच के फर्क को अच्छी तरह समझते हैं। उनके अनुसार, पिछले दो वर्षों में डगआउट में बैठकर टीम के वरिष्ठ खिलाड़ियों को देखना और समझना एक बड़ा सबक रहा। 'मुझे अभी भी लगता है कि निडर होना मेरी खासियत है जिसे मैं छोड़ना नहीं चाहता, लेकिन मैं इसे लेकर लापरवाह नहीं हो सकता। इसीलिए मैं ज्यादा जिम्मेदार और निडर बनना चाहता हूं।' क्रीज पर जाकर वे पहली या आखिरी — हर गेंद पर एकदम क्लियर माइंड के साथ खेलते हैं, जो उनके अनुसार 'बहुत अधिक प्रैक्टिस और मैच में उसे उतारने' से आता है।
भाई का योगदान और आगे की राह
अविनाश ने स्वीकार किया कि उनके बड़े भाई ने उनके क्रिकेट करियर में सबसे अहम भूमिका निभाई। 'अगर उन्होंने क्रिकेट खेलना शुरू नहीं किया होता, तो मुझे वो विजन या परिवार का सपोर्ट नहीं मिलता। वे मुझे एक बड़े भाई की तरह नहीं, बल्कि एक मेंटर की तरह गाइड करते थे।' अगले पाँच वर्षों में अविनाश खुद को एक 'मैच विनर' के रूप में देखते हैं — ऐसा खिलाड़ी जो टीम के मुश्किल दौर में आगे आकर खेल का रुख पलट सके। 'अगर मैं क्रीज पर हूं, तो मैच हमारा है' — यह आत्मविश्वास ही उनकी असली पहचान है।