रथ यात्रा 2025: ओम बिरला, नड्डा, चौहान और धर्मेंद्र प्रधान ने दी जगन्नाथ महोत्सव की शुभकामनाएं
सारांश
मुख्य बातें
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला सहित कई वरिष्ठ केंद्रीय मंत्रियों ने 16 जुलाई को महाप्रभु श्री जगन्नाथ की पावन रथ यात्रा के अवसर पर देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं दीं। सभी नेताओं ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए इस महोत्सव को भारतीय सनातन संस्कृति और लोकआस्था का जीवंत प्रतीक बताया।
ओम बिरला का संदेश
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने एक्स पर संस्कृत श्लोक 'नीलांचल निवासाय नित्याय परमात्मने। बलभद्र सुभद्राभ्याम् जगन्नाथाय ते नमः।।' साझा किया। उन्होंने लिखा कि यह रथयात्रा भारतीय संस्कृति की उस शाश्वत चेतना का दिव्य उत्सव है, जहाँ आस्था, अध्यात्म और लोकमंगल का अनुपम संगम साकार होता है।
बिरला ने यह भी कहा कि भगवान जगन्नाथ, भ्राता बलभद्र एवं माता सुभद्रा की यह पावन यात्रा केवल देवविग्रहों का नगर-भ्रमण नहीं, बल्कि लोक-आस्था की गहराइयों से निकलकर राष्ट्र की आत्मा को स्पर्श करने वाला दिव्य लोकमंगल अभियान है। उन्होंने राष्ट्र की समृद्धि और प्रत्येक नागरिक के सुख-शांति की मंगलकामना करते हुए 'जय जगन्नाथ' के उद्घोष के साथ अपना संदेश समाप्त किया।
स्वास्थ्य मंत्री नड्डा का आह्वान
केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने एक्स पर लिखा कि यह पावन रथयात्रा भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपरा की प्रतीक है और सेवा, समर्पण तथा एकता का संदेश लेकर आती है। उन्होंने महाप्रभु से देशवासियों के जीवन में सुख, समृद्धि, सौभाग्य और आरोग्य की प्रार्थना की।
कृषि मंत्री चौहान और शिक्षा मंत्री प्रधान की शुभकामनाएं
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक्स पर सभी श्रद्धालुओं को बधाई देते हुए कामना की कि महाप्रभु जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी माँ सुभद्रा की कृपा अनवरत बरसती रहे और हर घर-आंगन धन-धान्य से भरा रहे।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने भी एक्स पर इस उत्सव को सनातन आस्था, समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और लोककल्याण की भावना का प्रतीक बताया। उन्होंने सभी देशवासियों के उत्तम स्वास्थ्य और मंगलमय जीवन की प्रार्थना की।
रथ यात्रा का राष्ट्रीय महत्व
गौरतलब है कि जगन्नाथ रथ यात्रा भारत के सबसे प्राचीन और भव्य धार्मिक आयोजनों में से एक है, जो मुख्य रूप से ओडिशा के पुरी में आयोजित होती है और देशभर में लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। यह महोत्सव सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक एकता का भी प्रतीक माना जाता है। इस वर्ष भी देश के कोने-कोने से श्रद्धालु इस पर्व में शामिल होने के लिए उमड़े।