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आचार्य प्रशांत का सोनम वांगचुक से आग्रह — अनशन तोड़ें, सरकार से संवाद हो

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आचार्य प्रशांत का सोनम वांगचुक से आग्रह — अनशन तोड़ें, सरकार से संवाद हो

सारांश

आचार्य प्रशांत ने नीट पेपर लीक को महज प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि उस मूल्य-व्यवस्था का उत्पाद बताया जो घर और परिवारों में बनती है। 22 लाख परीक्षार्थियों के टूटे भरोसे और वांगचुक के 18-दिनी अनशन के बीच उन्होंने सरकार से संवाद और समाज से आत्म-शिक्षा की माँग की।

मुख्य बातें

आचार्य प्रशांत ने 16 जुलाई को गोवा में नीट यूजी पेपर लीक संकट को 'शिक्षा तंत्र और समाज के गहरे संकट का संकेत' बताया।
उन्होंने शिक्षाविद सोनम वांगचुक से 18 दिन से जारी अनशन तोड़ने का आग्रह किया और सरकार से संवाद की अपील की।
22 लाख परीक्षार्थियों के वर्षों के परिश्रम और टूटे भरोसे को उन्होंने संकट की मानवीय गहराई बताया।
पेपर लीक को उन्होंने घर और परिवारों में बनी 'मूल्य-व्यवस्था का उत्पाद' करार दिया, न कि केवल प्रशासनिक विफलता।
उन्होंने भारत के लिए 'मास-एजुकेशन-ऑफ-द-सेल्फ' यानी आत्म की सामूहिक शिक्षा की माँग रखी।

दार्शनिक और लेखक आचार्य प्रशांत ने 16 जुलाई को गोवा में मीडिया से बातचीत में नीट यूजी पेपर लीक और छात्रों की आत्महत्या से उपजे संकट को 'केवल प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि शिक्षा तंत्र और समाज के किसी अधिक गहरे संकट का संकेत' बताया। उन्होंने शिक्षाविद सोनम वांगचुक से उनका अठारह दिन से जारी अनशन तोड़ने का आग्रह किया और सरकार से संवाद की अपील की।

छात्रों का टूटा भरोसा

आचार्य प्रशांत ने 22 लाख परीक्षार्थियों की पीड़ा को रेखांकित करते हुए कहा कि इन छात्रों ने दो से पाँच वर्षों की तैयारी में खेल के मैदान, बचपन और त्योहार-उत्सव सब छोड़े। उनके अनुसार, 'जब पेपर लीक की खबर मिलती है, तो सिर्फ एक परीक्षा नहीं टूटती — इनका भरोसा टूट जाता है।' उन्होंने चेताया कि ये छात्र पूरा जीवन इस निष्कर्ष के साथ जी सकते हैं कि सच्चाई, ईमानदारी और श्रम की कोई कीमत नहीं।

वांगचुक के अनशन पर प्रतिक्रिया

जंतर-मंतर पर जारी छात्र प्रदर्शन और वांगचुक के अनशन के संदर्भ में आचार्य प्रशांत ने कहा कि वांगचुक का पूरा जीवन उनकी गंभीरता की गवाही है। उन्होंने कहा, 'लद्दाख जैसे सूखे, ठंडे रेगिस्तान में, जहाँ औपचारिक व्यवस्था शिक्षा तक नहीं पहुँचा पाई, उन्होंने बच्चों को स्कूल तक पहुँचाया।' साथ ही उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि 'बातचीत सज्जनता की निशानी है — लोकतंत्र को यह शोभा नहीं देता कि एक समझदार और सम्माननीय नागरिक को केवल बात करने के लिए अपने प्राण दाँव पर लगाने पड़ें।'

पेपर लीक की जड़ें

आचार्य प्रशांत ने पेपर लीक को महज प्रशासनिक विफलता नहीं, बल्कि एक बाजार का उत्पाद बताया। उनके अनुसार, '22 लाख अभ्यर्थी और कुछ हजार सीटें — इतनी भगदड़ में दलाल पैदा होंगे ही।' उन्होंने कहा कि यह मूल्य-व्यवस्था घर में, रिश्तेदारों की बैठकों में और अभिभावकों की निगरानी में बनी है — न किसी मंत्रालय ने इसे सजाया, न किसी दलाल ने।

अभिभावकों और शिक्षा-तंत्र पर सवाल

अभिभावकों को संबोधित करते हुए उन्होंने पूछा, 'आपके घर एक साधारण, सुंदर बच्चा जन्मा था — आपने उसे एंट्रेंस एग्जाम का प्रोजेक्ट कब बना दिया?' उन्होंने शिक्षा में दो आयामों का भेद किया: 'एक जो जीविका देती है और एक जो जीवन देती है।' उनका मानना है कि शिक्षकों ने बच्चे के सामने केवल जीविका की दौड़ रख दी और शिक्षा को व्यक्ति के विकास के बजाय उसके दमन का जरिया बना दिया।

आत्म-शिक्षा की माँग

आचार्य प्रशांत ने कहा कि भारत को केवल व्यावसायिक शिक्षा नहीं, बल्कि 'आत्म की सामूहिक शिक्षा — मास-एजुकेशन-ऑफ-द-सेल्फ' चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इस आंतरिक बदलाव से बचते रहे, तो ऐसे हादसे बार-बार होते रहेंगे। उन्होंने एक रूपक से बात स्पष्ट की कि आज की दुनिया हर संकट में उस समाज की तरह बरतती है जो नशे में धुत चालक की हालत सुधारने के बजाय बेहतर सड़कें बनाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि सरकार संवाद के लिए कब और किन शर्तों पर तैयार होगी।
RashtraPress
16 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आचार्य प्रशांत ने सोनम वांगचुक से क्या आग्रह किया?
आचार्य प्रशांत ने सोनम वांगचुक से उनका 18 दिन से जारी अनशन तोड़ने का आग्रह किया। साथ ही उन्होंने सरकार से संवाद की अपील करते हुए कहा कि लोकतंत्र में एक सम्माननीय नागरिक को केवल बात करने के लिए अपने प्राण दाँव पर नहीं लगाने चाहिए।
नीट पेपर लीक पर आचार्य प्रशांत का क्या मानना है?
आचार्य प्रशांत के अनुसार नीट पेपर लीक केवल प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि उस मूल्य-व्यवस्था का उत्पाद है जो घरों, रिश्तेदारों की बैठकों और अभिभावकों की निगरानी में बनती है। उन्होंने कहा कि 22 लाख अभ्यर्थियों और कुछ हजार सीटों की भगदड़ में दलाल पैदा होना अपरिहार्य हो जाता है।
आचार्य प्रशांत ने छात्रों की आत्महत्या को किस नजरिए से देखा?
उन्होंने कहा कि किसी का भीतर से टूट जाना अपने आप में एक बड़ा आत्मघात है जिसके आँकड़े कभी दर्ज नहीं होते। उनके अनुसार, किसी ने युवाओं को यह सिखा दिया है कि एक रैंक की कीमत उनकी जिंदगी से ज्यादा है — और यही संकट की असली गहराई है।
आचार्य प्रशांत ने शिक्षा सुधार के लिए क्या माँग रखी?
उन्होंने भारत के लिए 'मास-एजुकेशन-ऑफ-द-सेल्फ' यानी आत्म की सामूहिक शिक्षा की माँग रखी। उनका कहना था कि केवल बाहरी व्यवस्था बदलने से काम नहीं चलेगा — अगर भीतर से बदलाव नहीं आया, तो ऐसे हादसे बार-बार होते रहेंगे।
सोनम वांगचुक का अनशन किस मुद्दे पर है?
सोनम वांगचुक जंतर-मंतर पर छात्र आंदोलन के समर्थन में अनशन पर थे, जो नीट यूजी पेपर लीक और उससे जुड़े छात्रों की पीड़ा के विरोध में शुरू हुआ था। आचार्य प्रशांत ने उनके ट्रैक रिकॉर्ड की सराहना करते हुए उन्हें 'गंभीर और सच्चे व्यक्ति' बताया।
राष्ट्र प्रेस
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