SBI ने जुटाए $50 करोड़ डॉलर, 88 बेसिस प्वाइंट्स के रिकॉर्ड-न्यून स्प्रेड पर बॉन्ड जारी — चेयरमैन सेट्टी
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने अपनी लंदन शाखा के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय पूंजी बाज़ार में 50 करोड़ डॉलर (500 मिलियन डॉलर) के रेगुलेशन-एस बॉन्ड सफलतापूर्वक जारी किए हैं — और यह निर्गम भारतीय सार्वजनिक क्षेत्र की संस्थाओं द्वारा जारी बॉन्ड्स में आरबीआई के स्वैप विंडो की घोषणा के बाद से सबसे कम स्प्रेड पर मूल्यांकित हुआ है। 13 अगस्त 2026 को बैंक के चेयरमैन चल्ला श्रीनिवासुलु सेट्टी ने इस उपलब्धि को भारत की आर्थिक विकास गाथा और SBI की क्रेडिट प्रोफाइल पर वैश्विक निवेशकों के बढ़ते विश्वास का प्रमाण बताया।
बॉन्ड निर्गम की मुख्य शर्तें
इन बॉन्ड्स पर 5.25 प्रतिशत की कूपन दर निर्धारित की गई है। मूल्य निर्धारण अमेरिकी 5-वर्षीय ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड के ऊपर मात्र 88 बेसिस प्वाइंट्स के स्प्रेड पर किया गया। शुरुआत में बैंक ने निवेशकों को 120 बेसिस प्वाइंट्स का मूल्य-संकेत दिया था, लेकिन भारी माँग के चलते अंतिम स्प्रेड को 32 बेसिस प्वाइंट्स घटाकर 88 पर लाया गया — जिससे बैंक की उधारी लागत में उल्लेखनीय बचत हुई।
निवेशकों की ज़बरदस्त प्रतिक्रिया
इस निर्गम को वैश्विक स्तर पर असाधारण प्रतिसाद मिला। कुल 145 निवेशकों से माँग प्राप्त हुई और ऑर्डर बुक बढ़कर 2.46 अरब डॉलर तक पहुँच गई — जो इश्यू आकार का लगभग पाँच गुना थी। यह अभिदान स्तर वैश्विक अनिश्चितताओं के मौजूदा दौर में किसी भारतीय सरकारी बैंक के लिए उल्लेखनीय माना जा रहा है।
चेयरमैन सेट्टी ने कहा, 'वर्तमान वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच इस निर्गम का सफल मूल्य निर्धारण SBI के बॉन्ड्स के प्रति मज़बूत निवेशक रुचि और अंतरराष्ट्रीय पूंजी बाज़ारों में बैंक के व्यापक निवेशक आधार को दर्शाता है।' उन्होंने यह भी बताया कि दुनिया भर के प्रमुख फिक्स्ड-इनकम निवेशकों के समर्थन से पूंजी जुटाने की प्रक्रिया अधिक प्रभावी और प्रतिस्पर्धी लागत पर पूरी हो सकी।
रेटिंग और सूचीकरण
इन बॉन्ड्स को वैश्विक रेटिंग एजेंसियों से निवेश-योग्य श्रेणी की रेटिंग प्राप्त हुई है। S&P ने BBB, Fitch ने BBB- और CareEdge Global ने BBB+/स्टेबल की रेटिंग दी है। इन बॉन्ड्स को सिंगापुर एक्सचेंज (SGX), इंडिया इंटरनेशनल एक्सचेंज (India INX) और NSE इंटरनेशनल एक्सचेंज (NSE IX) पर सूचीबद्ध किया जाएगा।
व्यापक संदर्भ और महत्व
यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक ब्याज दरों में उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक तनावों के बीच उभरते बाज़ारों से पूंजी प्रवाह पर दबाव बना हुआ है। गौरतलब है कि SBI का यह निर्गम न केवल बैंक की साख को रेखांकित करता है, बल्कि यह भी संकेत देता है कि वैश्विक निवेशक भारत की दीर्घकालिक आर्थिक संभावनाओं को लेकर आश्वस्त हैं। सेट्टी के अनुसार, इस आक्रामक मूल्य निर्धारण से भारतीय संस्थाओं की उधारी लागत को नियंत्रित रखने में निवेशकों का भरोसा महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
आगे चलकर यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या अन्य भारतीय सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक भी इसी तरह के अनुकूल स्प्रेड पर अंतरराष्ट्रीय बाज़ार से पूंजी जुटा पाते हैं।