आरबीआई के नए उपायों से ₹4.2 लाख करोड़ का विदेशी निवेश संभव, बॉन्ड इंडेक्स भागीदारी से और बढ़ेगा प्रवाह
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा विदेशी पूंजी आकर्षित करने के लिए हाल ही में घोषित उपायों से देश में करीब 50 अरब डॉलर (लगभग ₹4.2 लाख करोड़) का निवेश आ सकता है। ICICI बैंक ग्लोबल मार्केट्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, यदि भारत को वैश्विक बॉन्ड इंडेक्स में और अधिक भागीदारी मिलती है, तो यह प्रवाह इससे भी ऊपर जा सकता है। 6 जून 2026 को जारी इस रिपोर्ट ने वित्तीय बाज़ारों में उम्मीद की नई लहर पैदा की है।
RBI के प्रमुख नीतिगत उपाय
केंद्रीय बैंक ने इस बार रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रखते हुए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। इनमें विदेशी मुद्रा जमा को समर्थन देना, कुछ बाहरी उधारों के लिए रियायती विदेशी मुद्रा स्वैप सुविधा और विदेशी निवेशकों को बाज़ार में अधिक पहुँच प्रदान करना शामिल है।
एक अहम फैसले के तहत फुली एक्सेसिबल रूट (FAR) का विस्तार किया गया है, जिससे विदेशी निवेशकों को सरकारी प्रतिभूतियों (Government Securities) में निवेश करना और सुगम हो जाएगा। यह कदम हाल में बॉन्ड निवेश पर दिए गए कर प्रोत्साहनों के साथ मिलकर भारत को वैश्विक ऋण बाज़ारों में और गहराई से जोड़ सकता है।
मौद्रिक नीति समिति का रुख
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता वाली मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने शुक्रवार को ब्याज दरें यथावत रखने और तटस्थ रुख बनाए रखने का निर्णय लिया। समिति ने इसके पीछे पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव, ऊँची ऊर्जा कीमतें और वैश्विक विकास एवं महंगाई को लेकर बनी अनिश्चितताओं को प्रमुख कारण बताया।
गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक केंद्रीय बैंक मुद्रास्फीति और आर्थिक मंदी के दोहरे दबाव के बीच नीतिगत संतुलन साधने की कोशिश कर रहे हैं।
बाज़ार पर असर
ICICI बैंक ग्लोबल मार्केट्स के विश्लेषकों के अनुसार, विदेशी निवेश में बढ़ोतरी से रुपए को मज़बूती मिल सकती है, बैंकिंग प्रणाली पर फंडिंग का दबाव कम हो सकता है और बाज़ार में समग्र तरलता की स्थिति बेहतर हो सकती है। इन घोषणाओं के बाद वित्तीय बाज़ारों ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दिखाई — रुपया हाल की कमज़ोरी से उबरता नज़र आया, जबकि बॉन्ड बाज़ार में विदेशी निवेशकों की बढ़ती भागीदारी की उम्मीदों के अनुरूप बदलाव देखा गया।
जोखिम और चुनौतियाँ
हालाँकि विदेशी निवेश प्रवाह को लेकर उम्मीदें मज़बूत हुई हैं, विश्लेषकों ने सावधान किया है कि महंगाई अभी भी एक बड़ा जोखिम बनी हुई है। कच्चे तेल की ऊँची कीमतें और भू-राजनीतिक अनिश्चितताएँ आर्थिक परिदृश्य पर दबाव बनाए हुए हैं।
आलोचकों का कहना है कि वास्तविक निवेश प्रवाह वैश्विक जोखिम धारणा और अमेरिकी फेडरल रिज़र्व की नीतिगत दिशा पर भी निर्भर करेगा, जो फिलहाल अनिश्चित बनी हुई है।
आगे की राह
विश्लेषकों का मानना है कि यदि भारत को व्यापक वैश्विक बॉन्ड इंडेक्स में अधिक प्रतिनिधित्व मिलता है, तो अतिरिक्त विदेशी पूंजी का प्रवाह और तेज़ हो सकता है। FAR विस्तार और कर प्रोत्साहनों का संयुक्त प्रभाव भारत को दीर्घकालिक वैश्विक निवेशकों के लिए एक आकर्षक गंतव्य बना सकता है।