एफआईआई ने सरकारी उपायों के बाद भारत में किया $7 अरब निवेश, रुपया 2.2% मज़बूत: एसबीआई रिसर्च
सारांश
मुख्य बातें
एसबीआई रिसर्च की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, सरकार और भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा विदेशी निवेश आकर्षित करने और रुपए की अस्थिरता को नियंत्रित करने के उपाय लागू किए जाने के बाद विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने भारत में $7 अरब का निवेश किया है। इस दौरान अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपए में 20 मई के निचले स्तर से जून के अंत तक करीब 2.2 प्रतिशत की मज़बूती दर्ज की गई।
सरकार और RBI ने क्या उपाय किए
मध्य पूर्व में जारी भू-राजनीतिक तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आने पर केंद्र सरकार और RBI ने विदेशी निवेश एवं रुपए की स्थिति सुधारने के लिए कई नीतिगत कदम उठाए। इन उपायों में सॉवरेन बॉन्ड पर FII और FPI को कर छूट, FCNR(B) डिपॉजिट के लिए सब्सिडी वाली हेजिंग लागत, और PSU ऋण के लिए रियायती डॉलर-स्वैप सुविधा शामिल है।
रिपोर्ट के अनुसार ये कदम उस समय उठाए गए जब कच्चे तेल की ऊँची कीमतें चालू खाते के घाटे पर दबाव बना रही थीं और विदेशी मुद्रा बाज़ार में अनिश्चितता बढ़ रही थी।
नए भू-राजनीतिक तनाव से फिर बढ़ा दबाव
हालाँकि, हालिया घटनाक्रम ने विनिमय दर पर फिर से दबाव डाला है। अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा अमेरिका-ईरान सीजफायर समाप्त करने की घोषणा के बाद भू-राजनीतिक तनाव और गहरा गया, जिससे ब्रेंट क्रूड की कीमतों में उछाल आया और रुपए पर पुनः अवमूल्यन का दबाव बना।
यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपने तेल आयात बिल को नियंत्रित रखने की कोशिश कर रहा है। गौरतलब है कि 20 मई को डॉलर के मुकाबले रुपया 96.8 के निचले स्तर तक पहुँच गया था।
कच्चे तेल का आउटलुक और बचत का अनुमान
इन चुनौतियों के बावजूद, एसबीआई रिसर्च का समग्र आउटलुक सकारात्मक है। रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि इंडियन बास्केट के लिए कच्चे तेल की औसत कीमत $80 प्रति बैरल या उससे कम रह सकती है। इससे तेल आयात बिल में कम से कम $30-35 अरब की बचत होने की संभावना है, जबकि पहले के अनुमान में तेल की कीमत $130 प्रति बैरल से ऊपर जाने की आशंका थी।
विदेशी मुद्रा भंडार और बैंक क्रेडिट में सुधार
30 जून को समाप्त हुए दो हफ्तों के दौरान RBI के विदेशी मुद्रा भंडार में $4.4 अरब की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इसी अवधि में रिकॉर्ड ₹7 लाख करोड़ की डिपॉजिट वृद्धि के कारण बाज़ार में तरलता की स्थिति और बेहतर होने की संभावना जताई गई है।
वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही में बैंक क्रेडिट बढ़कर ₹5.6 लाख करोड़ हो गया, जो पिछले साल की समान अवधि में ₹2.4 लाख करोड़ था — यानी लगभग दोगुनी वृद्धि।
कमर्शियल पेपर बाज़ार में उछाल
वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही में कमर्शियल पेपर (CP) जारी करने में तेज़ी आई और जून में जारी किए गए CP 55 महीनों के उच्चतम स्तर पर पहुँच गए। एसबीआई रिसर्च के अनुसार, जिन क्षेत्रों में सबसे अधिक CP जारी हुए, वहाँ बैंक क्रेडिट ग्रोथ भी मज़बूत रही और नए प्रोजेक्ट की घोषणाओं में उनकी हिस्सेदारी लगभग 69 प्रतिशत रही।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि बैंक सर्टिफिकेट ऑफ डिपॉजिट (CD) के ज़रिए फंड जुटाने का ट्रेंड बदलने की उम्मीद है, जो समग्र वित्तीय प्रणाली में तरलता के सामान्यीकरण का संकेत देता है।