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एफआईआई ने सरकारी उपायों के बाद भारत में किया $7 अरब निवेश, रुपया 2.2% मज़बूत: एसबीआई रिसर्च

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एफआईआई ने सरकारी उपायों के बाद भारत में किया $7 अरब निवेश, रुपया 2.2% मज़बूत: एसबीआई रिसर्च

सारांश

सरकार और RBI के नीतिगत हस्तक्षेप के बाद FII ने भारत में $7 अरब डाले और रुपया 2.2% मज़बूत हुआ — लेकिन अमेरिका-ईरान तनाव के बाद ब्रेंट क्रूड में उछाल ने फिर से दबाव बढ़ा दिया है। एसबीआई रिसर्च का आउटलुक फिर भी सकारात्मक है।

मुख्य बातें

सरकारी उपायों के बाद FII ने भारत में $7 अरब का निवेश किया — एसबीआई रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार।
रुपया 20 मई के निचले स्तर ( 96.8 प्रति डॉलर) से जून अंत तक 2.2% मज़बूत हुआ।
उपायों में सॉवरेन बॉन्ड पर कर छूट, FCNR(B) हेजिंग सब्सिडी और PSU के लिए डॉलर-स्वैप सुविधा शामिल।
RBI का विदेशी मुद्रा भंडार दो हफ्तों में $4.4 अरब बढ़ा; ₹7 लाख करोड़ की रिकॉर्ड डिपॉजिट वृद्धि दर्ज।
वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही में बैंक क्रेडिट ₹5.6 लाख करोड़ — पिछले साल के ₹2.4 लाख करोड़ से लगभग दोगुना।
जून में CP जारी करना 55 महीनों के उच्चतम स्तर पर; अमेरिका-ईरान तनाव से ब्रेंट क्रूड में उछाल से नया दबाव।

एसबीआई रिसर्च की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, सरकार और भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा विदेशी निवेश आकर्षित करने और रुपए की अस्थिरता को नियंत्रित करने के उपाय लागू किए जाने के बाद विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने भारत में $7 अरब का निवेश किया है। इस दौरान अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपए में 20 मई के निचले स्तर से जून के अंत तक करीब 2.2 प्रतिशत की मज़बूती दर्ज की गई।

सरकार और RBI ने क्या उपाय किए

मध्य पूर्व में जारी भू-राजनीतिक तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आने पर केंद्र सरकार और RBI ने विदेशी निवेश एवं रुपए की स्थिति सुधारने के लिए कई नीतिगत कदम उठाए। इन उपायों में सॉवरेन बॉन्ड पर FII और FPI को कर छूट, FCNR(B) डिपॉजिट के लिए सब्सिडी वाली हेजिंग लागत, और PSU ऋण के लिए रियायती डॉलर-स्वैप सुविधा शामिल है।

रिपोर्ट के अनुसार ये कदम उस समय उठाए गए जब कच्चे तेल की ऊँची कीमतें चालू खाते के घाटे पर दबाव बना रही थीं और विदेशी मुद्रा बाज़ार में अनिश्चितता बढ़ रही थी।

नए भू-राजनीतिक तनाव से फिर बढ़ा दबाव

हालाँकि, हालिया घटनाक्रम ने विनिमय दर पर फिर से दबाव डाला है। अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा अमेरिका-ईरान सीजफायर समाप्त करने की घोषणा के बाद भू-राजनीतिक तनाव और गहरा गया, जिससे ब्रेंट क्रूड की कीमतों में उछाल आया और रुपए पर पुनः अवमूल्यन का दबाव बना।

यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपने तेल आयात बिल को नियंत्रित रखने की कोशिश कर रहा है। गौरतलब है कि 20 मई को डॉलर के मुकाबले रुपया 96.8 के निचले स्तर तक पहुँच गया था।

कच्चे तेल का आउटलुक और बचत का अनुमान

इन चुनौतियों के बावजूद, एसबीआई रिसर्च का समग्र आउटलुक सकारात्मक है। रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि इंडियन बास्केट के लिए कच्चे तेल की औसत कीमत $80 प्रति बैरल या उससे कम रह सकती है। इससे तेल आयात बिल में कम से कम $30-35 अरब की बचत होने की संभावना है, जबकि पहले के अनुमान में तेल की कीमत $130 प्रति बैरल से ऊपर जाने की आशंका थी।

विदेशी मुद्रा भंडार और बैंक क्रेडिट में सुधार

30 जून को समाप्त हुए दो हफ्तों के दौरान RBI के विदेशी मुद्रा भंडार में $4.4 अरब की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इसी अवधि में रिकॉर्ड ₹7 लाख करोड़ की डिपॉजिट वृद्धि के कारण बाज़ार में तरलता की स्थिति और बेहतर होने की संभावना जताई गई है।

वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही में बैंक क्रेडिट बढ़कर ₹5.6 लाख करोड़ हो गया, जो पिछले साल की समान अवधि में ₹2.4 लाख करोड़ था — यानी लगभग दोगुनी वृद्धि।

कमर्शियल पेपर बाज़ार में उछाल

वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही में कमर्शियल पेपर (CP) जारी करने में तेज़ी आई और जून में जारी किए गए CP 55 महीनों के उच्चतम स्तर पर पहुँच गए। एसबीआई रिसर्च के अनुसार, जिन क्षेत्रों में सबसे अधिक CP जारी हुए, वहाँ बैंक क्रेडिट ग्रोथ भी मज़बूत रही और नए प्रोजेक्ट की घोषणाओं में उनकी हिस्सेदारी लगभग 69 प्रतिशत रही।

रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि बैंक सर्टिफिकेट ऑफ डिपॉजिट (CD) के ज़रिए फंड जुटाने का ट्रेंड बदलने की उम्मीद है, जो समग्र वित्तीय प्रणाली में तरलता के सामान्यीकरण का संकेत देता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या ये प्रवाह टिकाऊ हैं या महज़ नीतिगत प्रोत्साहन से उपजी अल्पकालिक प्रतिक्रिया। FCNR(B) सब्सिडी और टैक्स छूट जैसे उपाय रुपए को थामने में कारगर रहे, पर ये राजकोषीय लागत के साथ आते हैं जिसका हिसाब रिपोर्ट में नहीं दिया गया। अमेरिका-ईरान तनाव के बाद कच्चे तेल की कीमतों में नई उथल-पुथल यह याद दिलाती है कि भारत की मुद्रा स्थिरता अभी भी बाहरी झटकों के प्रति संवेदनशील है। बैंक क्रेडिट में दोगुनी वृद्धि उत्साहजनक है, पर इसकी गुणवत्ता और क्षेत्रीय वितरण की जाँच ज़रूरी है।
RashtraPress
27 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एफआईआई ने भारत में $7 अरब का निवेश कब और क्यों किया?
एसबीआई रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार, सरकार और RBI द्वारा सॉवरेन बॉन्ड पर कर छूट, FCNR(B) हेजिंग सब्सिडी और PSU के लिए डॉलर-स्वैप सुविधा जैसे उपाय घोषित किए जाने के बाद FII ने यह निवेश किया। ये उपाय मध्य पूर्व तनाव के कारण कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और रुपए की अस्थिरता के जवाब में उठाए गए थे।
रुपया कितना मज़बूत हुआ और किस स्तर से?
रुपया 20 मई को दर्ज 96.8 प्रति डॉलर के निचले स्तर से जून के अंत तक करीब 2.2 प्रतिशत मज़बूत हुआ। हालाँकि, अमेरिका-ईरान सीजफायर टूटने के बाद ब्रेंट क्रूड में उछाल से रुपए पर फिर से दबाव बढ़ा है।
वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही में बैंक क्रेडिट कितना बढ़ा?
एसबीआई रिसर्च के अनुसार, वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही में बैंक क्रेडिट बढ़कर ₹5.6 लाख करोड़ हो गया, जो पिछले साल की समान अवधि में ₹2.4 लाख करोड़ था — यानी लगभग दोगुनी वृद्धि।
कमर्शियल पेपर बाज़ार में क्या बदलाव आया?
वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही में CP जारी करने में तेज़ी आई और जून में जारी किए गए CP 55 महीनों के उच्चतम स्तर पर पहुँच गए। जिन क्षेत्रों में सर्वाधिक CP जारी हुए, वहाँ बैंक क्रेडिट ग्रोथ भी मज़बूत रही और नए प्रोजेक्ट घोषणाओं में उनकी हिस्सेदारी लगभग 69 प्रतिशत रही।
RBI के विदेशी मुद्रा भंडार की स्थिति क्या है?
30 जून को समाप्त दो हफ्तों के दौरान RBI के विदेशी मुद्रा भंडार में $4.4 अरब की बढ़ोतरी हुई। इसी अवधि में रिकॉर्ड ₹7 लाख करोड़ की डिपॉजिट वृद्धि के कारण बाज़ार में तरलता की स्थिति और बेहतर होने की संभावना है।
राष्ट्र प्रेस
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