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भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 3.82 अरब डॉलर की वृद्धि के साथ 700 अरब डॉलर के पार

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भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 3.82 अरब डॉलर की वृद्धि के साथ 700 अरब डॉलर के पार

सारांश

भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 3.825 अरब डॉलर बढ़कर 700.946 अरब डॉलर पर पहुँच गया है। यह वृद्धि पिछले सप्ताह की गति के बाद आई है। जानें इसके पीछे के कारण और अर्थव्यवस्था पर प्रभाव।

मुख्य बातें

विदेशी मुद्रा भंडार 700.946 अरब डॉलर पर पहुँच गया।
3.825 अरब डॉलर की वृद्धि हुई।
विदेशी मुद्रा संपत्तियों में वृद्धि मुख्य कारण है।
सोने के भंडार में भी बढ़ोतरी देखी गई।

नई दिल्ली, 17 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में निरंतर वृद्धि देखने को मिल रही है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा शुक्रवार को साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, 10 अप्रैल को समाप्त सप्ताह में देश का फॉरेक्स रिजर्व 3.825 अरब डॉलर बढ़कर 700.946 अरब डॉलर तक पहुँच गया है।

यह वृद्धि पिछले सप्ताह की रफ्तार के बाद आई है, जब 3 अप्रैल को समाप्त सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार 9.063 अरब डॉलर बढ़कर 697.121 अरब डॉलर पर पहुँच गया था। उल्लेखनीय है कि इस वर्ष फरवरी के अंत में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 728.494 अरब डॉलर के ऐतिहासिक स्तर पर पहुँच गया था।

हालांकि, इसके बाद पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण कुछ समय के लिए भंडार में गिरावट आई थी, क्योंकि रुपए पर दबाव को नियंत्रित करने के लिए आरबीआई को डॉलर बेचकर बाजार में हस्तक्षेप करना पड़ा था।

आंकड़ों के अनुसार, इस बार विदेशी मुद्रा भंडार में वृद्धि का प्रमुख कारण विदेशी मुद्रा संपत्तियों (एफसीए) में वृद्धि रही है, जो कि कुल भंडार का सबसे बड़ा हिस्सा होती हैं। रिपोर्टिंग सप्ताह में एफसीए 3.127 अरब डॉलर बढ़कर 555.983 अरब डॉलर हो गया।

इन विदेशी मुद्रा संपत्तियों में यूरो, पाउंड और येन जैसी गैर-अमेरिकी मुद्राओं के मूल्य में उतार-चढ़ाव का भी प्रभाव शामिल होता है।

इसके अतिरिक्त, देश के सोने के भंडार में भी वृद्धि देखने को मिली है। सोने का भंडार 601 मिलियन डॉलर बढ़कर 121.343 अरब डॉलर हो गया।

आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार, विशेष ड्रॉइंग राइट्स (एसडीआर) में भी 56 मिलियन डॉलर की वृद्धि हुई, जिससे यह 18.763 अरब डॉलर तक पहुँच गया। वहीं, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के साथ भारत की रिजर्व स्थिति 41 मिलियन डॉलर बढ़कर 4.857 अरब डॉलर हो गई।

विदेशी मुद्रा भंडार में निरंतर वृद्धि को देश की अर्थव्यवस्था के लिए एक सकारात्मक संकेत के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि इससे बाहरी झटकों से सुरक्षा मिलती है और मुद्रा बाजार में स्थिरता बनाए रखने में मदद मिलती है।

फॉरेक्स रिजर्व किसी भी देश की आर्थिक मजबूती का एक महत्वपूर्ण संकेतक होता है। यह केंद्रीय बैंक को आवश्यकतानुसार बाजार में हस्तक्षेप करने और रुपए को स्थिर रखने की क्षमता प्रदान करता है, साथ ही यह देश में विदेशी निवेश के प्रवाह का भी संकेत देता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह स्पष्ट है कि भारत का बढ़ता विदेशी मुद्रा भंडार हमारे आर्थिक स्थिरता के लिए एक सकारात्मक संकेत है। यह न केवल बाहरी झटकों से सुरक्षा प्रदान करता है, बल्कि विदेशी निवेश को भी आकर्षित करता है।
RashtraPress
20 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विदेशी मुद्रा भंडार में वृद्धि का क्या महत्व है?
विदेशी मुद्रा भंडार में वृद्धि अर्थव्यवस्था की मजबूती, बाहरी झटकों से सुरक्षा और विदेशी निवेश को आकर्षित करने में मदद करती है।
आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी मुद्रा भंडार में वृद्धि का मुख्य कारण क्या है?
इस बार विदेशी मुद्रा भंडार में वृद्धि का मुख्य कारण विदेशी मुद्रा संपत्तियों (एफसीए) में वृद्धि है।
राष्ट्र प्रेस
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