रुपया डॉलर के मुकाबले 50 पैसे मज़बूत, RBI की FPI निवेश नियमों में ढील से बाज़ार को राहत
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय रुपया शुक्रवार, 5 जून को अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाज़ार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 50 पैसे की तेज़ बढ़त के साथ 95.24 प्रति डॉलर पर पहुँच गया — यह उछाल भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) के लिए निवेश नियमों में ढील और पूँजी प्रवाह बढ़ाने के उपायों की घोषणा के तुरंत बाद आया। घरेलू मुद्रा ने 95.72 के स्तर पर कारोबार शुरू किया था, जबकि पिछले सत्र में यह 95.74 प्रति डॉलर पर बंद हुई थी।
मौद्रिक नीति: रेपो दर स्थिर, रुख तटस्थ
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी द्विमासिक मौद्रिक नीति की घोषणा करते हुए बताया कि मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने सर्वसम्मति से रेपो दर को 5.25 प्रतिशत पर बरकरार रखने का फ़ैसला किया है। यह लगातार दूसरी बैठक है जब दरें अपरिवर्तित रखी गई हैं। केंद्रीय बैंक ने तटस्थ (न्यूट्रल) नीति रुख भी जारी रखा है।
निवेश नियमों में क्या बदला
RBI ने अनिवासी भारतीयों (NRI) और भारतीय मूल के विदेशी नागरिकों (OCI) के लिए इक्विटी साधनों में निवेश की सीमा बढ़ा दी है। इसके साथ ही सरकारी प्रतिभूतियों में FPI निवेश से जुड़े नियमों को भी सरल बनाया गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, बॉन्ड के लिए पूरी तरह सुलभ मार्ग (FAR) का विस्तार, FPI के ऋण निवेश नियमों में ढील, अस्थायी FCNR (B) जमा सुविधा और रियायती विदेशी मुद्रा स्वैप जैसे कदम डॉलर प्रवाह को बढ़ाने और घरेलू मुद्रा को समर्थन देने में मददगार साबित होंगे।
विनिमय दर नीति पर RBI का स्पष्टीकरण
गवर्नर मल्होत्रा ने दोहराया कि RBI की विनिमय दर नीति में कोई बदलाव नहीं किया गया है और केंद्रीय बैंक रुपये के लिए किसी विशेष स्तर या दायरे को लक्ष्य नहीं बनाता। उन्होंने स्पष्ट किया कि विनिमय दर का निर्धारण बाज़ार की शक्तियों के आधार पर होने दिया जाता है।
आर्थिक अनुमानों में संशोधन
RBI ने अपने व्यापक आर्थिक अनुमानों में भी बदलाव किया है। वित्त वर्ष 2026-27 के लिए GDP वृद्धि दर का अनुमान पहले के 6.9 प्रतिशत से घटाकर 6.6 प्रतिशत कर दिया गया है। वहीं, CPI आधारित महंगाई का अनुमान 4.6 प्रतिशत से बढ़ाकर 5.1 प्रतिशत कर दिया गया है। केंद्रीय बैंक ने कच्चे तेल की ऊँची कीमतों से जुड़े जोखिमों को स्वीकार किया है, हालाँकि लगभग 682 अरब डॉलर के मज़बूत विदेशी मुद्रा भंडार को लेकर उसका भरोसेमंद संदेश बाज़ार की धारणा को सकारात्मक बनाए रखने में सहायक रहा।
वैश्विक कारक: कच्चा तेल दबाव में
इस बीच वैश्विक बाज़ार में कच्चे तेल की कीमतें ऊँचे स्तर पर बनी हुई हैं। अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड वायदा कारोबार में लगभग 1 प्रतिशत की बढ़त के साथ 95.37 डॉलर प्रति बैरल के आसपास था। विशेषज्ञों का मानना है कि इन कदमों से विदेशी निवेशकों का भरोसा मज़बूत होगा और भारतीय बाज़ारों में निवेश आकर्षित होगा — हालाँकि कच्चे तेल की ऊँची कीमतें आयात बिल के ज़रिये रुपये पर दबाव बनाए रख सकती हैं।