आरबीआई के नए उपायों से वित्त वर्ष 27 में ₹4–4.2 लाख करोड़ तक का फॉरेक्स इनफ्लो संभव: मोतीलाल ओसवाल रिपोर्ट
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के हालिया नीतिगत कदमों से वित्त वर्ष 2026–27 में देश में 40–50 अरब डॉलर (लगभग ₹4–4.2 लाख करोड़) तक का विदेशी मुद्रा (फॉरेक्स) इनफ्लो आ सकता है। 12 जून 2026 को जारी मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड (MOFSL) की एक रिपोर्ट में यह अनुमान लगाया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, इन उपायों से भारत के विदेशी मुद्रा भंडार, बैंकिंग प्रणाली की तरलता और भारतीय रुपए की स्थिरता को एक साथ मज़बूती मिलने की उम्मीद है।
RBI के नए उपाय क्या हैं
केंद्रीय बैंक ने हाल ही में फॉरेन करेंसी नॉन-रेसिडेंट [FCNR (B)] डिपॉजिट और एक्सटर्नल कमर्शियल बॉरोइंग (ECB) के लिए विशेष रियायती सुविधाएँ शुरू की हैं। इनका उद्देश्य बैंकों को अपेक्षाकृत कम लागत पर विदेशी पूंजी जुटाने में सक्षम बनाना है। MOFSL की रिपोर्ट के मुताबिक, RBI के रियायती स्वैप फ्रेमवर्क के तहत ECB रूट से उधार लेने की लागत में लगभग 200–250 आधार अंकों की कमी आ सकती है, जो बैंकों के लिए सीधा लाभकारी होगा।
2013 के प्रोग्राम से तुलना
यह नई पहल RBI के 2013 में शुरू किए गए एक समान कार्यक्रम की याद दिलाती है। उस कार्यक्रम के तहत FCNR (B) डिपॉजिट में लगभग 27 अरब डॉलर और कुल NRI डिपॉजिट में करीब 34 अरब डॉलर का इनफ्लो हुआ था। गौरतलब है कि उस कार्यक्रम ने भारत के विदेशी मुद्रा भंडार को मज़बूत करने और करेंसी बाज़ार में स्थिरता लाने में अहम भूमिका निभाई थी। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि फिलहाल FCNR (B) डिपॉजिट बैंकिंग प्रणाली के कुल डिपॉजिट का महज 1.2 प्रतिशत है, जो दर्शाता है कि इसमें विस्तार की पर्याप्त गुंजाइश मौजूद है।
बैंकिंग सेक्टर पर असर
रिपोर्ट के अनुसार, फंडिंग की कम लागत से क्रेडिट ग्रोथ को बढ़ावा मिलने, ऋण गतिविधियों के मज़बूत होने और बैंकिंग सेक्टर की समग्र फंडिंग क्षमता बेहतर होने की उम्मीद है। FCNR (B)-लिंक्ड फंडिंग बैंकों को पारंपरिक होलसेल डिपॉजिट की तुलना में लगभग 60–65 आधार अंकों का स्प्रेड फायदा देती है, क्योंकि इस पर कैश रिज़र्व रेशियो (CRR) और स्टैच्युटरी लिक्विडिटी रेशियो (SLR) की बाध्यताओं से छूट मिलती है। MOFSL के अनुसार, जिन बैंकों का ग्राहक आधार मज़बूत है और जिनका विदेशी नेटवर्क पहले से स्थापित है, उन्हें इस इनफ्लो का सबसे बड़ा हिस्सा मिलने की संभावना है।
रुपए और निवेशकों पर प्रभाव
MOFSL का अनुमान है कि जैसे-जैसे इनफ्लो में तेज़ी आएगी, रुपया निकट भविष्य में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 93–94 की रेंज तक मज़बूत हो सकता है। ब्रोकरेज का कहना है कि विदेशी मुद्रा का अधिक इनफ्लो, बेहतर लिक्विडिटी और बड़ा रिज़र्व बफर मिलकर करेंसी की स्थिरता को सपोर्ट कर सकते हैं और निवेशकों का भरोसा बढ़ा सकते हैं। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक बाज़ारों में उतार-चढ़ाव और पूंजी प्रवाह के रुझान पर बाज़ार की नज़र टिकी है। आने वाले हफ्तों में बैंकों द्वारा FCNR (B) दरों में और बढ़ोतरी तथा इनफ्लो के वास्तविक आँकड़े इस अनुमान की पुष्टि करेंगे।