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आरबीआई के नए उपायों से वित्त वर्ष 27 में ₹4–4.2 लाख करोड़ तक का फॉरेक्स इनफ्लो संभव: मोतीलाल ओसवाल रिपोर्ट

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आरबीआई के नए उपायों से वित्त वर्ष 27 में ₹4–4.2 लाख करोड़ तक का फॉरेक्स इनफ्लो संभव: मोतीलाल ओसवाल रिपोर्ट

सारांश

RBI के FCNR (B) और ECB रियायती फ्रेमवर्क से वित्त वर्ष 27 में 40–50 अरब डॉलर का फॉरेक्स इनफ्लो संभव है — 2013 के उस कार्यक्रम की पुनरावृत्ति, जिसने 34 अरब डॉलर खींचे थे। MOFSL का अनुमान है कि रुपया 93–94 की रेंज तक मज़बूत हो सकता है।

मुख्य बातें

RBI के FCNR (B) और ECB रियायती उपायों से वित्त वर्ष 2026–27 में 40–50 अरब डॉलर का फॉरेक्स इनफ्लो अनुमानित है।
ECB रूट से उधार लागत में 200–250 आधार अंकों की कमी संभव; बैंकों को 60–65 आधार अंकों का स्प्रेड फायदा।
FCNR (B) डिपॉजिट अभी कुल बैंक डिपॉजिट का केवल 1.2% — विस्तार की बड़ी गुंजाइश।
2013 के समान कार्यक्रम में FCNR (B) से 27 अरब डॉलर और कुल NRI डिपॉजिट में 34 अरब डॉलर का इनफ्लो हुआ था।
MOFSL के अनुसार रुपया निकट भविष्य में 93–94 प्रति डॉलर तक मज़बूत हो सकता है।
मज़बूत विदेशी नेटवर्क वाले बैंकों को इनफ्लो का सबसे बड़ा हिस्सा मिलने की संभावना।

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के हालिया नीतिगत कदमों से वित्त वर्ष 2026–27 में देश में 40–50 अरब डॉलर (लगभग ₹4–4.2 लाख करोड़) तक का विदेशी मुद्रा (फॉरेक्स) इनफ्लो आ सकता है। 12 जून 2026 को जारी मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड (MOFSL) की एक रिपोर्ट में यह अनुमान लगाया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, इन उपायों से भारत के विदेशी मुद्रा भंडार, बैंकिंग प्रणाली की तरलता और भारतीय रुपए की स्थिरता को एक साथ मज़बूती मिलने की उम्मीद है।

RBI के नए उपाय क्या हैं

केंद्रीय बैंक ने हाल ही में फॉरेन करेंसी नॉन-रेसिडेंट [FCNR (B)] डिपॉजिट और एक्सटर्नल कमर्शियल बॉरोइंग (ECB) के लिए विशेष रियायती सुविधाएँ शुरू की हैं। इनका उद्देश्य बैंकों को अपेक्षाकृत कम लागत पर विदेशी पूंजी जुटाने में सक्षम बनाना है। MOFSL की रिपोर्ट के मुताबिक, RBI के रियायती स्वैप फ्रेमवर्क के तहत ECB रूट से उधार लेने की लागत में लगभग 200–250 आधार अंकों की कमी आ सकती है, जो बैंकों के लिए सीधा लाभकारी होगा।

2013 के प्रोग्राम से तुलना

यह नई पहल RBI के 2013 में शुरू किए गए एक समान कार्यक्रम की याद दिलाती है। उस कार्यक्रम के तहत FCNR (B) डिपॉजिट में लगभग 27 अरब डॉलर और कुल NRI डिपॉजिट में करीब 34 अरब डॉलर का इनफ्लो हुआ था। गौरतलब है कि उस कार्यक्रम ने भारत के विदेशी मुद्रा भंडार को मज़बूत करने और करेंसी बाज़ार में स्थिरता लाने में अहम भूमिका निभाई थी। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि फिलहाल FCNR (B) डिपॉजिट बैंकिंग प्रणाली के कुल डिपॉजिट का महज 1.2 प्रतिशत है, जो दर्शाता है कि इसमें विस्तार की पर्याप्त गुंजाइश मौजूद है।

बैंकिंग सेक्टर पर असर

रिपोर्ट के अनुसार, फंडिंग की कम लागत से क्रेडिट ग्रोथ को बढ़ावा मिलने, ऋण गतिविधियों के मज़बूत होने और बैंकिंग सेक्टर की समग्र फंडिंग क्षमता बेहतर होने की उम्मीद है। FCNR (B)-लिंक्ड फंडिंग बैंकों को पारंपरिक होलसेल डिपॉजिट की तुलना में लगभग 60–65 आधार अंकों का स्प्रेड फायदा देती है, क्योंकि इस पर कैश रिज़र्व रेशियो (CRR) और स्टैच्युटरी लिक्विडिटी रेशियो (SLR) की बाध्यताओं से छूट मिलती है। MOFSL के अनुसार, जिन बैंकों का ग्राहक आधार मज़बूत है और जिनका विदेशी नेटवर्क पहले से स्थापित है, उन्हें इस इनफ्लो का सबसे बड़ा हिस्सा मिलने की संभावना है।

रुपए और निवेशकों पर प्रभाव

MOFSL का अनुमान है कि जैसे-जैसे इनफ्लो में तेज़ी आएगी, रुपया निकट भविष्य में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 93–94 की रेंज तक मज़बूत हो सकता है। ब्रोकरेज का कहना है कि विदेशी मुद्रा का अधिक इनफ्लो, बेहतर लिक्विडिटी और बड़ा रिज़र्व बफर मिलकर करेंसी की स्थिरता को सपोर्ट कर सकते हैं और निवेशकों का भरोसा बढ़ा सकते हैं। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक बाज़ारों में उतार-चढ़ाव और पूंजी प्रवाह के रुझान पर बाज़ार की नज़र टिकी है। आने वाले हफ्तों में बैंकों द्वारा FCNR (B) दरों में और बढ़ोतरी तथा इनफ्लो के वास्तविक आँकड़े इस अनुमान की पुष्टि करेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन वैश्विक ब्याज दरों का परिदृश्य तब से काफी बदल चुका है — तब फेडरल रिज़र्व की दरें शून्य के करीब थीं, अब नहीं। 40–50 अरब डॉलर का अनुमान आशावादी है और काफी हद तक NRI समुदाय की भागीदारी पर निर्भर करता है, जो ब्याज दरों के साथ-साथ रुपए की दिशा और भू-राजनीतिक स्थिरता देखकर फैसला करता है। FCNR (B) डिपॉजिट का 1.2% हिस्सा विस्तार की गुंजाइश तो दिखाता है, पर यह कम हिस्सा इस उत्पाद की सीमित लोकप्रियता भी दर्शाता है। असली परीक्षा यह होगी कि बैंक किस हद तक दरें बढ़ाते हैं और क्या RBI इस बार परिपक्वता पर हेजिंग जोखिम को बेहतर ढंग से प्रबंधित करता है।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

RBI के नए FCNR (B) और ECB उपाय क्या हैं?
RBI ने फॉरेन करेंसी नॉन-रेसिडेंट [FCNR (B)] डिपॉजिट और एक्सटर्नल कमर्शियल बॉरोइंग (ECB) के लिए रियायती स्वैप फ्रेमवर्क शुरू किया है, जिससे बैंक कम लागत पर विदेशी पूंजी जुटा सकते हैं। इनका मकसद विदेशी पूंजी आकर्षित करना और बैंकिंग प्रणाली की तरलता सुधारना है।
वित्त वर्ष 27 में कितना फॉरेक्स इनफ्लो अनुमानित है?
MOFSL की रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 2026–27 में 40–50 अरब डॉलर का फॉरेक्स इनफ्लो आ सकता है। यह अनुमान FCNR (B) डिपॉजिट में बढ़ती भागीदारी और ECB रूट से सस्ती फंडिंग पर आधारित है।
इन उपायों से भारतीय रुपए पर क्या असर पड़ेगा?
MOFSL का अनुमान है कि इनफ्लो बढ़ने पर रुपया निकट भविष्य में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 93–94 की रेंज तक मज़बूत हो सकता है। बेहतर विदेशी मुद्रा भंडार और तरलता मिलकर करेंसी स्थिरता को सपोर्ट करेंगे।
2013 के RBI कार्यक्रम से यह पहल कैसे मिलती-जुलती है?
2013 में RBI के समान कार्यक्रम से FCNR (B) डिपॉजिट में 27 अरब डॉलर और कुल NRI डिपॉजिट में 34 अरब डॉलर का इनफ्लो हुआ था। वर्तमान पहल उसी ढाँचे पर आधारित है, लेकिन रियायती स्वैप और ECB सुविधाओं के साथ इसे और व्यापक बनाया गया है।
किन बैंकों को सबसे अधिक फायदा होगा?
MOFSL के अनुसार, जिन बैंकों का NRI ग्राहक आधार मज़बूत है और जिनका विदेशी नेटवर्क पहले से स्थापित है, वे इस इनफ्लो का सबसे बड़ा हिस्सा हासिल करेंगे। इसके अलावा, FCNR (B)-लिंक्ड फंडिंग पर CRR और SLR से छूट के कारण बैंकों को 60–65 आधार अंकों का अतिरिक्त स्प्रेड लाभ मिलेगा।
राष्ट्र प्रेस
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