27 जुलाई 2026
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FCNR(B) डिपॉजिट ने 45 दिनों में पार किया 2013 का $26 अरब का रिकॉर्ड, 30 सितंबर तक $65-70 अरब का अनुमान: SBI रिपोर्ट

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FCNR(B) डिपॉजिट ने 45 दिनों में पार किया 2013 का $26 अरब का रिकॉर्ड, 30 सितंबर तक $65-70 अरब का अनुमान: SBI रिपोर्ट

सारांश

RBI की विशेष FCNR(B) योजना ने महज 45 दिनों में 2013 का $26 अरब का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। SBI रिसर्च का अनुमान है कि 30 सितंबर तक यह आँकड़ा $65-70 अरब तक पहुँच सकता है — लेकिन इतनी बड़ी पूंजी आमद के बावजूद रुपए की कमज़ोरी बाज़ार के लिए एक अनुत्तरित सवाल बनी हुई है।

मुख्य बातें

FCNR(B) डिपॉजिट ने केवल 45 दिनों में 2013 के $26 अरब के स्तर को पार कर लिया है।
17 जुलाई 2026 तक $20 अरब का कुल पूंजी प्रवाह दर्ज, जिसमें $17.4 अरब FCNR(B) डिपॉजिट।
SBI रिसर्च के अनुसार 30 सितंबर 2026 तक FCNR(B) डिपॉजिट $65-70 अरब , कुल प्रवाह $80-85 अरब तक पहुँचने का अनुमान।
आधारभूत अनुमान से अतिरिक्त करीब $10 अरब कर-रियायत वाले देशों से आने की संभावना।
सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक (PSB) अभियान की अगुवाई कर रहे हैं; ऑनशोर-ऑफशोर रणनीति का संतुलित उपयोग।
भारी पूंजी आमद के बावजूद रुपए में कमज़ोरी और RBI के अनियमित हस्तक्षेप पर बाज़ार में चिंता।

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की विशेष योजना के तहत जुटाई जा रही FCNR(B) (फॉरेन करेंसी नॉन-रेजिडेंट बैंक) डिपॉजिट ने महज 45 दिनों में 2013 के $26 अरब के ऐतिहासिक स्तर को पार कर लिया है। SBI रिसर्च की 27 जुलाई 2026 को जारी रिपोर्ट के अनुसार, 30 सितंबर 2026 तक यह डिपॉजिट $65-70 अरब तक पहुँच सकती है, जबकि कुल प्रवाह $80-85 अरब के दायरे में रहने का अनुमान है।

अब तक का पूंजी प्रवाह

RBI के आँकड़ों के अनुसार, 17 जुलाई 2026 तक कुल $20 अरब का पूंजी प्रवाह दर्ज किया गया, जिसमें $17.4 अरब की FCNR(B) डिपॉजिट का प्रमुख योगदान रहा। रिपोर्ट में कहा गया है कि 45 दिनों में जुटाई गई यह राशि 2013 में तीन महीनों के दौरान एकत्र की गई कुल राशि से अधिक हो चुकी है — जो इस अभियान की असाधारण गति को दर्शाती है।

SBI के समूह मुख्य आर्थिक सलाहकार डॉ. सौम्य कांति घोष ने कहा, 'हमारा अनुमान है कि केवल 45 दिनों में ही FCNR(B) डिपॉजिट 2013 के $26 अरब के स्तर को पार कर चुकी है।'

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की अग्रणी भूमिका

रिपोर्ट के अनुसार, बड़े सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक (PSB) इस जमा अभियान की अगुवाई कर रहे हैं। ये बैंक केवल डिपॉजिट दरों के आधार पर नहीं, बल्कि विभिन्न देशों में अपने विश्वसनीय और उच्च साख वाले ग्राहकों के साथ दीर्घकालिक संबंधों का लाभ उठाकर पूंजी आकर्षित कर रहे हैं। साथ ही, ये बैंक ऑनशोर और ऑफशोर रणनीतियों के संतुलित मिश्रण के जरिए अपनी रणनीति को लचीले ढंग से आगे बढ़ा रहे हैं।

नवीनीकरण और अतिरिक्त प्रवाह की संभावना

रिपोर्ट में बताया गया है कि अगस्त और सितंबर 2026 में परिपक्व (मैच्योर) होने वाली मौजूदा FCNR जमाओं का बड़ा हिस्सा नई योजना के तहत अधिक ब्याज दरों के कारण दोबारा जमा (रिन्यू) किया जाएगा, जिससे कुल आमद और बढ़ेगी। प्रारंभिक अनुमान के अनुसार, आधारभूत अनुमान के अतिरिक्त करीब $10 अरब की अतिरिक्त राशि भी जुटाई जा सकती है, जो मुख्यतः उन देशों से आने की संभावना है जहाँ कर संबंधी रियायतें उपलब्ध हैं।

रुपए की भूमिका और बाज़ार की उलझन

रिपोर्ट में एक महत्वपूर्ण विरोधाभास की ओर ध्यान दिलाया गया है — व्यापक वित्तीय बाज़ार अब भी इस बात को लेकर अनिश्चित हैं कि इन पूंजी प्रवाहों का विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों (FCA) की स्थिति से क्या संबंध है और इतनी मज़बूत पूंजी आमद के बावजूद रुपए में कमज़ोरी क्यों बनी हुई है।

रिपोर्ट में कहा गया, 'रुपए ने 360 डिग्री का बदलाव देखा है। पहले यह बाहरी झटकों को अपने ऊपर लेकर अर्थव्यवस्था की रक्षा करने वाला शॉक एब्जॉर्बर था, लेकिन अब यह भूमिका कमज़ोर पड़ती दिख रही है। इसलिए ज़रूरी है कि रुपए को दोबारा उसी स्थिति में न पहुँचने दिया जाए और उसकी अंतर्निहित मज़बूती बनाए रखी जाए, ताकि वह प्रतिस्पर्धात्मकता खोए बिना बाहरी झटकों का प्रभावी ढंग से सामना कर सके।'

भू-राजनीतिक जोखिम और आगे की राह

रिपोर्ट में यह भी रेखांकित किया गया है कि पश्चिम एशिया में तनाव शुरू होने के बाद से विदेशी मुद्रा बाज़ार में RBI का हस्तक्षेप कुछ हद तक अनियमित रहा है और पूरी क्षमता के साथ नहीं किया गया है। वैश्विक व्यापार, आपूर्ति एवं मूल्य श्रृंखलाओं में बढ़ते तनाव, भू-राजनीतिक जोखिम और असंतुलित पूंजी प्रवाह को देखते हुए रुपए की स्थिरता और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार, 30 सितंबर 2026 की समयसीमा तक FCNR(B) अभियान के परिणाम भारत की विदेशी मुद्रा नीति की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएँगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि इतनी बड़ी विदेशी पूंजी आमद के बावजूद रुपया कमज़ोर क्यों है — यह विरोधाभास RBI की हस्तक्षेप रणनीति पर गंभीर सवाल उठाता है। पश्चिम एशिया के तनाव के बाद RBI का अनियमित हस्तक्षेप यह संकेत देता है कि नीति-निर्माता विदेशी मुद्रा भंडार और विनिमय दर स्थिरता के बीच कठिन संतुलन साध रहे हैं। SBI रिपोर्ट का 'शॉक एब्जॉर्बर' वाला तर्क महत्वपूर्ण है — यदि रुपए की यह भूमिका स्थायी रूप से कमज़ोर पड़ी, तो $80-85 अरब का यह प्रवाह भी दीर्घकालिक स्थिरता की गारंटी नहीं देगा।
RashtraPress
27 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

FCNR(B) डिपॉजिट क्या होती है और यह योजना क्यों शुरू की गई?
FCNR(B) यानी फॉरेन करेंसी नॉन-रेजिडेंट (बैंक) डिपॉजिट एक ऐसी योजना है जिसके तहत अनिवासी भारतीय (NRI) विदेशी मुद्रा में भारतीय बैंकों में जमा कर सकते हैं। RBI ने यह विशेष योजना विदेशी मुद्रा भंडार मज़बूत करने और रुपए को स्थिरता देने के उद्देश्य से शुरू की है।
45 दिनों में FCNR(B) डिपॉजिट ने कितना रिकॉर्ड तोड़ा?
SBI रिसर्च के अनुसार, केवल 45 दिनों में FCNR(B) डिपॉजिट 2013 के $26 अरब के स्तर को पार कर चुकी है, जबकि 2013 में यह राशि तीन महीनों में जुटाई गई थी। 17 जुलाई 2026 तक $17.4 अरब की FCNR(B) डिपॉजिट दर्ज की जा चुकी है।
30 सितंबर 2026 तक FCNR(B) डिपॉजिट कितनी हो सकती है?
SBI रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार, 30 सितंबर 2026 तक FCNR(B) डिपॉजिट $65-70 अरब तक पहुँच सकती है और कुल पूंजी प्रवाह $80-85 अरब के दायरे में रहने का अनुमान है। अगस्त-सितंबर में मैच्योर होने वाली पुरानी जमाओं के नवीनीकरण और कर-रियायत वाले देशों से अतिरिक्त $10 अरब के प्रवाह से यह आँकड़ा और बढ़ सकता है।
इतनी बड़ी पूंजी आमद के बावजूद रुपया कमज़ोर क्यों है?
SBI रिपोर्ट के अनुसार, वित्तीय बाज़ार इस बात को लेकर अनिश्चित हैं कि FCNR(B) प्रवाह का विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों (FCA) से क्या संबंध है। साथ ही, पश्चिम एशिया में तनाव के बाद RBI का हस्तक्षेप अनियमित रहा है, जिससे रुपए की 'शॉक एब्जॉर्बर' भूमिका कमज़ोर पड़ी है।
इस अभियान में कौन से बैंक सबसे आगे हैं?
रिपोर्ट के अनुसार, बड़े सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक (PSB) इस अभियान की अगुवाई कर रहे हैं। ये बैंक विभिन्न देशों में अपने विश्वसनीय ग्राहकों के साथ मज़बूत संबंधों और ऑनशोर-ऑफशोर रणनीतियों के संतुलित उपयोग के जरिए अतिरिक्त पूंजी आकर्षित कर रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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