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आरबीआई की FCNR(B) जमा स्कीम में ₹127 अरब डॉलर का इनफ्लो, अनुमान से 27% अधिक

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आरबीआई की FCNR(B) जमा स्कीम में ₹127 अरब डॉलर का इनफ्लो, अनुमान से 27% अधिक

सारांश

RBI की FCNR(B) स्कीम ने 100 अरब डॉलर के अनुमान को पार करते हुए 127.226 अरब डॉलर का इनफ्लो खींचा — मध्य पूर्व तनाव के बीच रुपए को थामने की केंद्रीय बैंक की रणनीति का अब तक का सबसे बड़ा दांव। ECB और OFCB मिलाकर कुल प्रवाह 136 अरब डॉलर से ऊपर।

मुख्य बातें

RBI की FCNR(B) जमा स्कीम में 31 अगस्त 2026 तक 127.226 अरब डॉलर का इनफ्लो दर्ज हुआ।
यह प्रवाह 100 अरब डॉलर के शुरुआती अनुमान से करीब 27% अधिक है।
ECB में 3.891 अरब डॉलर और OFCB में 5.260 अरब डॉलर का अतिरिक्त प्रवाह भी दर्ज किया गया।
स्कीम की अंतिम तिथि 11 सितंबर से संशोधित कर 31 अगस्त 2026 की गई, जबकि स्वैप का लाभ 11 सितंबर 2026 तक लिया जा सकता है।
ECB और OFCB स्कीमों में निवेश की सुविधा 31 दिसंबर 2026 तक जारी रहेगी।
इस प्रवाह से भारत के भुगतान संतुलन और रुपए की स्थिति को मज़बूती मिलने की उम्मीद है।

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की विदेशी मुद्रा अनिवासी बैंक — FCNR(B) — जमा स्कीम को निवेशकों से अभूतपूर्व प्रतिक्रिया मिली है। 31 अगस्त 2026 तक इस स्कीम में कुल 127.226 अरब डॉलर का इनफ्लो दर्ज किया गया, जो 100 अरब डॉलर के शुरुआती अनुमान से करीब 27% अधिक है। रुपए को सहारा देने और भारत के विदेशी मुद्रा भंडार को मज़बूत करने के उद्देश्य से शुरू की गई यह स्कीम केंद्रीय बैंक की हालिया मुद्रा-स्थिरीकरण रणनीति का अहम हिस्सा है।

स्कीम में क्या-क्या आया

RBI के आँकड़ों के अनुसार, 31 अगस्त 2026 तक तीन माध्यमों से विदेशी मुद्रा प्रवाह दर्ज हुआ। FCNR(B) जमा में 127.226 अरब डॉलर, बाह्य वाणिज्यिक उधारी (ECB) में 3.891 अरब डॉलर, और विदेशों से विदेशी मुद्रा में उधार (OFCB) में 5.260 अरब डॉलर का इनफ्लो आया। इस प्रकार तीनों माध्यमों से कुल प्रवाह 136 अरब डॉलर से अधिक रहा।

स्कीम की समयसीमा में बदलाव क्यों हुआ

RBI ने शुरुआत में FCNR(B) जमा में निवेश की अंतिम तिथि 11 सितंबर 2026 निर्धारित की थी। हालाँकि, निवेशकों की जबरदस्त प्रतिक्रिया को देखते हुए केंद्रीय बैंक ने यह समयसीमा संशोधित करके 31 अगस्त 2026 कर दी। RBI ने अपने आधिकारिक बयान में स्पष्ट किया: 'FCNR(B) जमा के लिए स्वैप सुविधा केवल 31 अगस्त 2026 तक जुटाई गई जमा के लिए उपलब्ध होगी। इस सुविधा के तहत स्वैप का लाभ RBI से 11 सितंबर 2026 तक लिया जा सकता है।' गौरतलब है कि ECB और OFCB स्कीमों में निवेशक 31 दिसंबर 2026 तक निवेश कर सकते हैं।

स्कीम की पृष्ठभूमि

RBI ने विशेष अमेरिकी-डॉलर स्वैप सुविधा के तहत FCNR(B), ECB और OFCB तीनों स्कीमों को 8 जून 2026 को शुरू करने का ऐलान किया था। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया जब मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण रुपया दबाव में था और डॉलर की माँग बढ़ रही थी। यह ऐसे समय में आया है जब भारत का चालू खाता घाटा (CAD) वैश्विक अनिश्चितता के बीच प्रबंधन की दृष्टि से संवेदनशील स्थिति में है।

रुपए और भुगतान संतुलन पर असर

FCNR(B) के ज़रिये बड़ी मात्रा में डॉलर आने से भारत के भुगतान संतुलन (Balance of Payment) को महत्वपूर्ण सहारा मिलने की उम्मीद है। साथ ही, डॉलर की बढ़ी हुई आपूर्ति से रुपए को भी स्थिरता मिलेगी, जो फिलहाल मध्य पूर्व में जारी तनाव के कारण दबाव झेल रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, इतने बड़े पैमाने पर डॉलर प्रवाह विदेशी मुद्रा भंडार को और मज़बूत करेगा और आयात-आधारित मुद्रास्फीति के जोखिम को कम करेगा।

आगे क्या

ECB और OFCB स्कीमों की समयसीमा 31 दिसंबर 2026 तक बनी हुई है, जिससे आने वाले महीनों में और अधिक विदेशी मुद्रा प्रवाह की संभावना है। RBI की यह रणनीति भारत की मुद्रा-प्रबंधन नीति में एक सक्रिय बदलाव को दर्शाती है — जहाँ केवल बाज़ार हस्तक्षेप पर निर्भर रहने के बजाय संरचनात्मक डॉलर-आकर्षण तंत्र तैयार किया जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि यह पूँजी कितनी स्थायी है — FCNR(B) जमाएँ परिपक्वता पर वापस जाती हैं, और 2013 के अनुभव से पता चलता है कि परिपक्वता के समय बड़े पैमाने पर निकासी रुपए पर उल्टा दबाव डाल सकती है। RBI ने समयसीमा घटाकर यह संकेत दिया है कि लक्ष्य जल्दी पूरा हो गया, लेकिन मध्यम अवधि में इन देनदारियों का प्रबंधन उतनी ही बड़ी चुनौती होगी। मुद्रा स्थिरता के लिए संरचनात्मक सुधार — जैसे चालू खाता घाटे में कमी — अभी भी अधूरे एजेंडे पर हैं।
RashtraPress
2 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

RBI की FCNR(B) जमा स्कीम क्या है?
FCNR(B) यानी विदेशी मुद्रा अनिवासी (बैंक) जमा स्कीम एक ऐसी योजना है जिसके तहत अनिवासी भारतीय (NRI) और विदेशी निवेशक भारतीय बैंकों में विदेशी मुद्रा — विशेषकर अमेरिकी डॉलर — में जमा कर सकते हैं। RBI ने 8 जून 2026 को विशेष डॉलर-स्वैप सुविधा के साथ इसे पुनः सक्रिय किया ताकि रुपए को सहारा दिया जा सके।
FCNR(B) स्कीम में कितना इनफ्लो आया और यह क्यों महत्वपूर्ण है?
31 अगस्त 2026 तक FCNR(B) स्कीम में 127.226 अरब डॉलर का इनफ्लो आया, जो 100 अरब डॉलर के अनुमान से 27% अधिक है। यह इनफ्लो भारत के भुगतान संतुलन को मज़बूत करता है और मध्य पूर्व तनाव के बीच दबाव झेल रहे रुपए को स्थिरता देने में मदद करता है।
FCNR(B) स्कीम की अंतिम तिथि क्यों बदली गई?
शुरुआत में निवेश की अंतिम तिथि 11 सितंबर 2026 थी, लेकिन निवेशकों की उम्मीद से कहीं अधिक प्रतिक्रिया के कारण RBI ने इसे संशोधित कर 31 अगस्त 2026 कर दिया। RBI के अनुसार, स्वैप सुविधा का लाभ 11 सितंबर 2026 तक लिया जा सकता है।
ECB और OFCB स्कीमों की समयसीमा क्या है?
बाह्य वाणिज्यिक उधारी (ECB) और विदेशों से विदेशी मुद्रा में उधार (OFCB) स्कीमों में निवेशक 31 दिसंबर 2026 तक निवेश कर सकते हैं। 31 अगस्त तक ECB में 3.891 अरब डॉलर और OFCB में 5.260 अरब डॉलर का इनफ्लो दर्ज हो चुका है।
इस इनफ्लो से रुपए और भारतीय अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ेगा?
बड़े पैमाने पर डॉलर प्रवाह से भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में इज़ाफा होगा और रुपए को डॉलर के मुकाबले स्थिरता मिलेगी। विशेषज्ञों के अनुसार, इससे आयात-आधारित मुद्रास्फीति का जोखिम कम होगा और भुगतान संतुलन की स्थिति बेहतर होगी।
राष्ट्र प्रेस
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