FCNR(B) जमा प्रवाह $80 अरब के पार जा सकता है, RBI की स्वैप विंडो जल्दी बंद करने के बावजूद: BofA रिपोर्ट
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा विदेशी मुद्रा गैर-निवासी (बैंक) — FCNR(B) — जमा योजना की विशेष स्वैप विंडो की समयसीमा 30 सितंबर से घटाकर 31 अगस्त करने के बावजूद, इस योजना के तहत कुल विदेशी मुद्रा प्रवाह $80 अरब से अधिक हो सकता है। बैंक ऑफ अमेरिका (BofA) सिक्योरिटीज की एक ताज़ा रिपोर्ट में यह अनुमान लगाया गया है, जो पहले के $70 अरब के अनुमान से उल्लेखनीय रूप से अधिक है।
अनुमान क्यों बढ़ाया गया
BofA सिक्योरिटीज ने अपनी रिपोर्ट में कहा, "मजबूत प्रवाह को देखते हुए हमने अपना अनुमान बढ़ाकर $80 अरब से अधिक कर दिया है।" ब्रोकरेज फर्म का यह भी मानना है कि यदि RBI यह सुविधा सितंबर के अंत तक जारी रखता, तो कुल प्रवाह का आँकड़ा इससे भी ऊँचा जा सकता था।
गौरतलब है कि योजना शुरू होने के बाद से निवेश प्रवाह शुरुआती अपेक्षाओं से कहीं अधिक मज़बूत रहा है। 8 जून से 13 अगस्त के बीच बैंकों ने FCNR(B) जमा के ज़रिए $52.3 अरब जुटाए हैं — यह आँकड़ा अनिवासी भारतीयों (NRI) और वैश्विक निवेशकों की इस योजना में गहरी रुचि को दर्शाता है।
RBI की स्वैप विंडो में बदलाव
RBI ने FCNR(B) जमा पर उपलब्ध शून्य-लागत हेजिंग सुविधा की अंतिम तिथि 30 सितंबर से घटाकर 31 अगस्त कर दी है। इसका अर्थ यह है कि बैंकों को इस विशेष सुविधा का लाभ उठाने के लिए पहले की तुलना में लगभग एक माह कम समय मिलेगा।
यह ऐसे समय में आया है जब विदेशी मुद्रा भंडार को मज़बूत करने के लिए RBI की यह पहल बेहद अहम मानी जा रही थी। बावजूद इसके, जमा जुटाने की रफ्तार में कोई उल्लेखनीय कमी नहीं देखी गई है।
अन्य विदेशी मुद्रा स्रोतों से भी प्रवाह
FCNR(B) जमा के अतिरिक्त अन्य चैनलों से भी उल्लेखनीय विदेशी मुद्रा प्रवाह दर्ज हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, इसी अवधि में RBI को बाहरी वाणिज्यिक उधार (ECB) के लिए स्वैप सुविधाओं के ज़रिए $1.7 अरब और अधिकृत ऋणदाताओं द्वारा विदेशी मुद्रा उधारी के माध्यम से $2.8 अरब प्राप्त हुए हैं।
भुगतान संतुलन और चालू खाते पर असर
BofA का मानना है कि यह मज़बूत विदेशी मुद्रा प्रवाह भारत के भुगतान संतुलन को सँभालने में निर्णायक भूमिका निभाएगा। चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में भारत का चालू खाते का घाटा (CAD) बढ़कर $3.1 अरब, यानी GDP के लगभग 0.3 प्रतिशत पर पहुँच गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, इस घाटे में वृद्धि का मुख्य कारण माल व्यापार (Merchandise Trade) घाटे का बढ़ना रहा, हालाँकि सेवाओं के निर्यात और विदेशों से आने वाले प्रेषण (Remittances) ने इस दबाव को काफी हद तक संतुलित किया।
आगे क्या होगा
ब्रोकरेज का अनुमान है कि दूसरी तिमाही में भी CAD नियंत्रित स्तर पर बना रहेगा। यदि वस्तुओं के निर्यात में और सुधार होता है या प्रवासी भारतीयों से आने वाली धनराशि मज़बूत बनी रहती है, तो घाटा अनुमान से भी कम रह सकता है। 31 अगस्त की समयसीमा नज़दीक आने के साथ, आने वाले हफ्तों में FCNR(B) जमा के अंतिम आँकड़े इस योजना की वास्तविक सफलता का पैमाना तय करेंगे।