रुपया 67 पैसे उछला, दो महीनों के उच्चतम स्तर पर; FCNR-B में ₹127 अरब डॉलर का रिकॉर्ड इनफ्लो
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय रुपया गुरुवार, 3 सितंबर 2026 को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 67 पैसे की तेज़ बढ़त के साथ दो महीनों के उच्चतम स्तर पर पहुँच गया। जून 2026 के बाद यह घरेलू मुद्रा की सबसे बड़ी एकल-दिवसीय छलांग है, जिसे भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की विदेशी मुद्रा अनिवासी (बैंक) यानी FCNR(B) जमा योजना में अनुमान से कहीं अधिक इनफ्लो ने संभव किया।
मुख्य घटनाक्रम
रुपए की शुरुआत 94.30 के स्तर पर हुई, जबकि पिछले कारोबारी सत्र में यह 94.97 पर बंद हुआ था। दोपहर 1 बजे IST तक रुपया 94.46 प्रति डॉलर पर कारोबार कर रहा था। यह उठान तब आई जब RBI के आँकड़ों ने पुष्टि की कि 31 अगस्त 2026 की समयसीमा तक FCNR(B) जमा में कुल 127.226 अरब डॉलर का इनफ्लो दर्ज हुआ — जो 100 अरब डॉलर के आधिकारिक अनुमान से 27% अधिक है।
योजना का विवरण और आँकड़े
RBI ने 8 जून 2026 को रुपए की स्थिति को मज़बूत करने के उद्देश्य से एक विशेष अमेरिकी-डॉलर स्वैप सुविधा के अंतर्गत तीन योजनाएँ शुरू की थीं — FCNR(B), बाह्य वाणिज्यिक उधारी (ECB) और विदेशों से विदेशी मुद्रा में उधार (OFCB)। RBI द्वारा जारी आँकड़ों के अनुसार, 31 अगस्त 2026 तक:
— FCNR(B) जमा में 127.226 अरब डॉलर
— ECB में 3.891 अरब डॉलर
— OFCB में 5.260 अरब डॉलर का इनफ्लो दर्ज किया गया।
गौरतलब है कि FCNR(B) योजना निवेशकों के लिए 31 अगस्त 2026 को बंद हो गई, जबकि ECB और OFCB योजनाओं में निवेश की अंतिम तिथि 31 दिसंबर 2026 निर्धारित है।
बाज़ार विशेषज्ञों की राय
करेंसी बाज़ार के जानकारों के अनुसार, निकट भविष्य में रुपए की ट्रेडिंग रेंज 94.10–95.50 के दायरे में रहने की संभावना है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि रुपया 94.10 के स्तर से नीचे मज़बूती से टूटता है, तो यह 93.50 तक फिसल सकता है। RBI की सुदृढ़ विदेशी मुद्रा स्थिति केंद्रीय बैंक को रुपए में अत्यधिक गिरावट रोकने के साथ-साथ विदेशी मुद्रा भंडार को पुनः बढ़ाने की पर्याप्त गुंजाइश देती है।
आम जनता और अर्थव्यवस्था पर असर
यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय आयातकों पर डॉलर की महँगाई का दबाव बना हुआ था। रुपए की मज़बूती से कच्चे तेल और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे आयात बिल में कमी आने की उम्मीद है, जिसका सकारात्मक असर महँगाई के मोर्चे पर भी दिख सकता है। वहीं, निर्यातकों के लिए यह तेज़ी अल्पकालिक मार्जिन दबाव बन सकती है।
आगे क्या होगा
ECB और OFCB योजनाओं में 31 दिसंबर 2026 तक निवेश की खिड़की खुली है, जिससे आने वाले महीनों में भी डॉलर इनफ्लो जारी रहने की संभावना है। बाज़ार की नज़र अब RBI की अगली मौद्रिक नीति समीक्षा और वैश्विक डॉलर सूचकांक की चाल पर टिकी है।