भारत का विदेशी मुद्रा भंडार $10.5 अरब उछला, 692.9 अरब डॉलर पर पहुंचा — जनवरी के बाद सबसे बड़ी साप्ताहिक बढ़त
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा 7 अगस्त 2026 को जारी साप्ताहिक आँकड़ों के अनुसार, 31 जुलाई 2026 को समाप्त सप्ताह में देश का विदेशी मुद्रा भंडार (फॉरेक्स रिज़र्व) 10.512 अरब डॉलर की छलाँग के साथ 692.866 अरब डॉलर पर पहुँच गया। यह जनवरी 2026 के अंत के बाद की सबसे बड़ी एकल-सप्ताह बढ़त है और फरवरी 2026 में दर्ज 728.494 अरब डॉलर के सर्वकालिक उच्चतम स्तर की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है।
मुख्य घटनाक्रम
यह उछाल 24 जुलाई को समाप्त सप्ताह में हुई 6.118 अरब डॉलर की बढ़ोतरी के ठीक बाद आया है, जिससे लगातार पाँच सप्ताह से जारी वृद्धि की प्रवृत्ति और पुख्ता हुई है। RBI के साप्ताहिक सांख्यिकी अनुपूरक के अनुसार, भंडार के प्रमुख घटक विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों (FCA) में 8.750 अरब डॉलर की वृद्धि दर्ज हुई और यह 564.680 अरब डॉलर पर पहुँच गया।
डॉलर में व्यक्त FCA में यूरो, पाउंड और येन जैसी गैर-अमेरिकी मुद्राओं के मूल्य परिवर्तन का प्रभाव भी शामिल रहता है, जो वैश्विक विनिमय दरों में उतार-चढ़ाव के अनुसार बदलता है।
स्वर्ण भंडार और SDR में भी बढ़त
इसी सप्ताह के दौरान स्वर्ण भंडार (गोल्ड रिज़र्व) का मूल्य 1.685 अरब डॉलर बढ़कर 104.743 अरब डॉलर हो गया। इसके अलावा, विशेष आहरण अधिकार (SDR) में 4.8 करोड़ डॉलर की वृद्धि हुई और यह 18.666 अरब डॉलर पर पहुँचा। ये दोनों घटक भंडार की समग्र मज़बूती को रेखांकित करते हैं।
वृद्धि के पीछे के कारण
आँकड़ों के अनुसार, जून 2026 की शुरुआत से विदेशी पूँजी प्रवाह में उल्लेखनीय तेज़ी आई है। इस अवधि में अनिवासी भारतीयों (NRI) की जमा योजनाओं और विदेशी उधारी के माध्यम से लगभग 40.8 अरब डॉलर का अतिरिक्त निवेश भारत में आया है। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच वर्ष की शुरुआत में भंडार में गिरावट देखी गई थी, और अब यह पुनर्बहाली चरण में है।
रुपये और अर्थव्यवस्था पर असर
विदेशी मुद्रा भंडार में बढ़त का सकारात्मक प्रभाव भारतीय रुपये पर भी दिखाई दे रहा है। मई 2026 में रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुँचने के बाद रुपया अब तक लगभग 1.8 प्रतिशत मज़बूत हो चुका है। मज़बूत भंडार से RBI को मुद्रा बाज़ार में हस्तक्षेप करने और ज़रूरत पड़ने पर रुपये को समर्थन देने की अधिक वित्तीय क्षमता मिलती है। इसके अलावा, यह आयात भुगतान, विनिमय दर की स्थिरता और समग्र वित्तीय प्रणाली की सुदृढ़ता को भी बल देता है।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
बाज़ार विशेषज्ञों का मानना है कि विदेशी मुद्रा भंडार में वृद्धि का यह सिलसिला निकट भविष्य में जारी रह सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि वैश्विक परिस्थितियाँ अनुकूल बनी रहीं और विदेशी निवेश का प्रवाह बरकरार रहा, तो भारत जल्द ही अपना नया सर्वकालिक रिकॉर्ड स्थापित कर सकता है — जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं के बीच भारत की वित्तीय साख और मज़बूत होगी।