भारत का विदेशी मुद्रा भंडार रिकॉर्ड ऊँचाई पर, 729.33 अरब डॉलर के साथ फरवरी 2026 का शिखर टूटा
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा 28 अगस्त 2026 को जारी आँकड़ों के अनुसार, 21 अगस्त 2026 को समाप्त सप्ताह में देश का विदेशी मुद्रा भंडार 12.4 अरब डॉलर की साप्ताहिक छलाँग के साथ 729.33 अरब डॉलर के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुँच गया। इसने फरवरी 2026 में दर्ज 728.5 अरब डॉलर के पिछले रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है, और भारत की बाहरी वित्तीय स्थिति को नई मज़बूती मिली है।
मुख्य घटकों में बढ़ोतरी
भंडार में सबसे बड़ा योगदान विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों (FCA) का रहा, जो कुल भंडार का प्रमुख हिस्सा होती हैं। समीक्षाधीन सप्ताह में FCA 9.482 अरब डॉलर बढ़कर 591.333 अरब डॉलर पर पहुँच गईं।
स्वर्ण भंडार (गोल्ड रिज़र्व) में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज हुई — यह 2.801 अरब डॉलर बढ़कर 114.218 अरब डॉलर हो गया, जो RBI की परिसंपत्ति संरचना को और सुदृढ़ बनाता है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) में भारत की स्पेशल ड्रॉइंग राइट्स (SDR) होल्डिंग 11.2 करोड़ डॉलर बढ़कर 18.852 अरब डॉलर हो गई, जबकि IMF में रिज़र्व ट्रेंच पोज़िशन 2.6 करोड़ डॉलर की बढ़त के साथ 4.925 अरब डॉलर पर पहुँची।
पूँजी प्रवाह और RBI के उपाय
यह ऐसे समय में आया है जब जून 2026 की शुरुआत में RBI ने विदेशी पूँजी आकर्षित करने के लिए कई विशेष उपाय किए थे, जिनमें प्रवासी भारतीयों (NRI) के लिए विशेष जमा कार्यक्रम भी शामिल था। आँकड़ों के अनुसार, इन उपायों के ज़रिए 21 अगस्त 2026 तक 72.8 अरब डॉलर का निवेश प्रवाह भारत में आया। इन प्रवाहों ने देश के भुगतान संतुलन को मज़बूती दी है और भारत को लगातार तीसरे वर्ष संभावित घाटे की स्थिति से बचाने में सहायता की है।
रुपये पर असर और चुनौतियाँ
गौरतलब है कि मई 2026 में रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुँचने के बाद भारतीय रुपया करीब 1.7% की रिकवरी कर चुका है। विशाल विदेशी मुद्रा भंडार RBI को रुपये की स्थिरता बनाए रखने के लिए अधिक संसाधन उपलब्ध कराता है, जो हाल के महीनों में एशिया की कमज़ोर प्रदर्शन करने वाली मुद्राओं में शामिल रहा है। हालाँकि, ऊँची कच्चे तेल की कीमतें अब भी रुपये पर दबाव बनाए हुई हैं, क्योंकि भारत अपनी ऊर्जा ज़रूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के पूँजी प्रवाह को आकर्षित करने की एक लागत भी होती है, क्योंकि RBI को बैंकों की हेजिंग लागत वहन करनी पड़ती है। वर्तमान में अमेरिकी ब्याज दरें 2013 की तुलना में काफी ऊँची हैं, जिससे ऐसे कार्यक्रमों की लागत बढ़ गई है। विश्लेषकों के अनुसार, 729 अरब डॉलर से अधिक का विदेशी मुद्रा भंडार वैश्विक वित्तीय अस्थिरता, कमोडिटी मूल्य उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक जोखिमों के विरुद्ध एक मज़बूत सुरक्षा कवच का काम करेगा।
आगे की राह
विदेशी मुद्रा भंडार का यह रिकॉर्ड स्तर भारत की मज़बूत व्यापक आर्थिक स्थिति और वैश्विक निवेशकों के बढ़ते भरोसे का संकेत है। यह देश को आयात भुगतान क्षमता, बाहरी दायित्वों की पूर्ति और मुद्रा स्थिरता — तीनों मोर्चों पर अधिक वित्तीय लचीलापन प्रदान करेगा। आने वाले महीनों में कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक ब्याज दर परिदृश्य पर नज़र रखना ज़रूरी होगा।