भारत का विदेशी मुद्रा भंडार $7.26 अरब बढ़कर $674.19 अरब पर, गोल्ड रिजर्व भी $105.2 अरब के पार
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा 10 जुलाई 2026 को जारी साप्ताहिक आँकड़ों के अनुसार, 3 जुलाई 2026 को समाप्त सप्ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार (फॉरेक्स रिजर्व) $7.26 अरब की बढ़ोतरी के साथ $674.193 अरब पर पहुँच गया। यह उछाल पिछले सप्ताह आई $5.65 अरब की गिरावट के बाद दर्ज की गई है, जो भंडार की मजबूत वापसी का संकेत देती है।
मुख्य घटनाक्रम: क्या-क्या बढ़ा
RBI के आँकड़ों के अनुसार, रिपोर्टिंग सप्ताह में गोल्ड रिजर्व का मूल्य $2.669 अरब बढ़कर $105.205 अरब हो गया — जो भारत के बढ़ते सोने के भंडार की निरंतर मज़बूती को दर्शाता है। इसके साथ ही, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के पास भारत के स्पेशल ड्रॉइंग राइट्स (SDR) में $6.5 करोड़ की वृद्धि हुई और यह $18.623 अरब पर पहुँच गया।
पिछले सप्ताह की तुलना और ऐतिहासिक संदर्भ
गौरतलब है कि 26 जून 2026 को समाप्त सप्ताह में भंडार $5.65 अरब घटकर $666.93 अरब रह गया था। हाल के महीनों में उतार-चढ़ाव के बावजूद, भारत का फॉरेक्स रिजर्व विश्व के सबसे बड़े भंडारों में शुमार है। हालाँकि, यह अभी भी 27 फरवरी 2026 को दर्ज $728.494 अरब के सर्वकालिक उच्च स्तर से नीचे बना हुआ है।
FCNR-B योजना से नई उम्मीद
इस बीच, RBI की संशोधित फॉरेन करेंसी नॉन-रेजिडेंट बैंक (FCNR-B) जमा योजना लागू होने के बाद विदेशों से आने वाले फंड के प्रवाह में धीरे-धीरे तेज़ी आ रही है। बैंकिंग क्षेत्र के अनुमान के अनुसार, अब तक बैंक इस योजना के तहत करीब $3 से $4 अरब जुटा चुके हैं।
बैंकर्स का मानना है कि ऊँची ब्याज दरें और बैंकों की हेजिंग लागत वहन करने के RBI के फैसले से इस योजना में निवेशकों की रुचि और बढ़ेगी। बैंकिंग क्षेत्र के आकलन के अनुसार, इस योजना के ज़रिए समय के साथ $40 से $50 अरब तक की नई जमा राशि आकर्षित की जा सकती है।
NRI निवेशकों पर फोकस
बैंकिंग क्षेत्र को उम्मीद है कि खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीय प्रवासी (NRI) इस योजना के तहत सबसे बड़े निवेशक साबित होंगे। इसके लिए बैंक प्रमुख विदेशी बाज़ारों में विशेष जागरूकता अभियान चला रहे हैं और NRI ग्राहकों से सक्रिय रूप से संपर्क किया जा रहा है। आने वाले हफ्तों में, खासकर खाड़ी क्षेत्र से, निवेश प्रवाह में और तेज़ी आने की संभावना जताई जा रही है।
आगे क्या
भंडार में यह साप्ताहिक उछाल भारतीय अर्थव्यवस्था की बाहरी स्थिरता को रेखांकित करता है। FCNR-B योजना के तहत बढ़ता NRI निवेश और वैश्विक बाज़ारों में सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव आने वाले हफ्तों में भंडार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे। RBI के नीतिगत कदम और डॉलर की चाल भी इस पर असर डालती रहेंगी।