भारत का विदेशी मुद्रा भंडार $6.295 अरब बढ़कर $696.988 अरब, सोने के भंडार में $5.637 अरब की छलांग

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भारत का विदेशी मुद्रा भंडार $6.295 अरब बढ़कर $696.988 अरब, सोने के भंडार में $5.637 अरब की छलांग

सारांश

पश्चिम एशिया संकट के बाद हफ्तों की गिरावट से उबरते हुए भारत का विदेशी मुद्रा भंडार $696.988 अरब पर पहुँचा। असली इंजन रहा स्वर्ण भंडार — जो $5.637 अरब उछलकर $120.853 अरब हो गया। $700 अरब का मनोवैज्ञानिक स्तर अब दस्तक की दूरी पर है।

मुख्य बातें

8 मई 2026 को समाप्त सप्ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार $6.295 अरब बढ़कर $696.988 अरब हो गया।
स्वर्ण भंडार का मूल्य $5.637 अरब उछलकर $120.853 अरब पर पहुँचा — वृद्धि का मुख्य कारण।
विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियाँ (FCA) $562 मिलियन बढ़कर $552.387 अरब हुईं।
इससे पहले वाले सप्ताह में भंडार $7.794 अरब घटकर $690.693 अरब रह गया था।
रिकॉर्ड स्तर $728.494 अरब ( 27 फरवरी 2026 ) से भंडार अभी भी करीब $31.5 अरब नीचे है।
SDR $84 मिलियन बढ़कर $18.873 अरब ; IMF रिज़र्व पोज़िशन $12 मिलियन बढ़कर $4.875 अरब हुई।

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा शुक्रवार, 15 मई 2026 को जारी आँकड़ों के अनुसार, 8 मई को समाप्त सप्ताह में देश का विदेशी मुद्रा भंडार (फॉरेक्स रिज़र्व) $6.295 अरब की बढ़त के साथ $696.988 अरब पर पहुँच गया। यह उछाल मुख्य रूप से स्वर्ण भंडार (गोल्ड रिज़र्व) में आई तेज़ वृद्धि के कारण संभव हुई, जो पश्चिम एशिया संकट के दौरान हुई कई हफ्तों की गिरावट के बाद भंडार की वापसी का संकेत है।

मुख्य घटनाक्रम

RBI के आँकड़ों के अनुसार, 8 मई को समाप्त सप्ताह में स्वर्ण भंडार का मूल्य $5.637 अरब बढ़कर $120.853 अरब हो गया — जो कुल साप्ताहिक वृद्धि में सबसे बड़ा योगदानकर्ता रहा। इससे पहले वाले सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार $7.794 अरब घटकर $690.693 अरब रह गया था।

विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियाँ (FCA), जो कुल भंडार का सबसे बड़ा हिस्सा हैं, इस दौरान $562 मिलियन बढ़कर $552.387 अरब हो गईं। उल्लेखनीय है कि डॉलर के संदर्भ में FCA में यूरो, पाउंड और येन जैसी गैर-अमेरिकी मुद्राओं में होने वाले उतार-चढ़ाव का प्रभाव भी समाहित होता है।

अन्य घटक

स्पेशल ड्रॉइंग राइट्स (SDR) $84 मिलियन बढ़कर $18.873 अरब हो गए। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) में भारत की रिज़र्व पोज़िशन $12 मिलियन बढ़कर $4.875 अरब पर पहुँच गई।

ऐतिहासिक संदर्भ और गिरावट की वजह

गौरतलब है कि 27 फरवरी 2026 को समाप्त सप्ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार रिकॉर्ड $728.494 अरब के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुँचा था। इसके बाद पश्चिम एशिया संकट के चलते रुपये पर दबाव बढ़ा और RBI को डॉलर बेचकर विदेशी मुद्रा बाज़ार में हस्तक्षेप करना पड़ा, जिससे भंडार में लगातार गिरावट दर्ज की गई। वर्तमान स्तर रिकॉर्ड से करीब $31.5 अरब नीचे है।

आम जनता और अर्थव्यवस्था पर असर

विदेशी मुद्रा भंडार में यह सुधार रुपये की स्थिरता के लिए सकारात्मक संकेत है। पर्याप्त भंडार RBI को आयात के लिए करीब 11 महीने का कवर देता है, जो वैश्विक अनिश्चितता के दौर में भारतीय अर्थव्यवस्था की बाहरी मज़बूती का प्रमाण है। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक बाज़ारों में सोने की कीमतें ऊँचाई पर हैं, जिसका सीधा लाभ भारत के स्वर्ण भंडार के मूल्यांकन को मिल रहा है।

क्या होगा आगे

विश्लेषकों के अनुसार, यदि पश्चिम एशिया में तनाव कम होता है और वैश्विक जोखिम-धारणा सुधरती है, तो भंडार के $700 अरब के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार करने की संभावना बनी हुई है। हालाँकि, डॉलर की मज़बूती और वैश्विक पूँजी प्रवाह की दिशा इस गति को प्रभावित कर सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि स्वर्ण भंडार में है — $5.637 अरब की एकल-सप्ताह वृद्धि यह बताती है कि RBI ने सोने में विविधीकरण की नीति को गंभीरता से अपनाया है, जो डॉलर-केंद्रित भंडार पर निर्भरता घटाने की दिशा में सोची-समझी रणनीति है। हालाँकि $700 अरब का आँकड़ा मनोवैज्ञानिक रूप से महत्वपूर्ण है, असली सवाल यह है कि पश्चिम एशिया संकट के दौरान डॉलर बेचकर किए गए हस्तक्षेप की वास्तविक लागत क्या रही और रुपये की रक्षा के लिए कितना भंडार खर्च हुआ — जिसका पूरा हिसाब अभी सामने नहीं आया है।
RashtraPress
15 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत का विदेशी मुद्रा भंडार अभी कितना है?
RBI के आँकड़ों के अनुसार, 8 मई 2026 को समाप्त सप्ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार $696.988 अरब है, जो पिछले सप्ताह से $6.295 अरब अधिक है।
विदेशी मुद्रा भंडार में इस हफ्ते बढ़ोतरी क्यों हुई?
इस सप्ताह की वृद्धि मुख्य रूप से स्वर्ण भंडार के मूल्य में $5.637 अरब की तेज़ बढ़त के कारण हुई, जो वैश्विक बाज़ारों में सोने की ऊँची कीमतों का परिणाम है। विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों में भी $562 मिलियन की मामूली वृद्धि दर्ज हुई।
भारत का विदेशी मुद्रा भंडार पहले क्यों घट रहा था?
पश्चिम एशिया संकट के कारण रुपये पर दबाव बढ़ने के बाद RBI को विदेशी मुद्रा बाज़ार में डॉलर बेचकर हस्तक्षेप करना पड़ा, जिससे कई हफ्तों तक भंडार में गिरावट आती रही। इससे पहले वाले सप्ताह में भंडार $7.794 अरब घटा था।
भारत का अब तक का सबसे अधिक विदेशी मुद्रा भंडार कितना रहा है?
27 फरवरी 2026 को समाप्त सप्ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार रिकॉर्ड $728.494 अरब के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुँचा था। वर्तमान स्तर उस रिकॉर्ड से करीब $31.5 अरब नीचे है।
विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ने से आम जनता को क्या फायदा होता है?
पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार रुपये की स्थिरता सुनिश्चित करता है, आयात को सुगम बनाता है और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के दौरान देश को बाहरी झटकों से बचाता है। यह निवेशकों के भरोसे का भी संकेतक है।
राष्ट्र प्रेस
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