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क्या भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 3.2 बिलियन डॉलर बढ़कर 696.6 बिलियन डॉलर हुआ?

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क्या भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 3.2 बिलियन डॉलर बढ़कर 696.6 बिलियन डॉलर हुआ?

सारांश

भारत का विदेशी मुद्रा भंडार एक महत्वपूर्ण आर्थिक संकेतक है। हाल ही में, यह 3.293 बिलियन डॉलर बढ़कर 696.610 बिलियन डॉलर हो गया है। जानें इसके पीछे के कारण और इससे देश की अर्थव्यवस्था पर क्या प्रभाव पड़ता है।

मुख्य बातें

विदेशी मुद्रा भंडार में 3.293 बिलियन डॉलर की वृद्धि हुई है।
यह 696.610 बिलियन डॉलर तक पहुँच गया है।
गोल्ड रिजर्व की वैल्यू 113.320 बिलियन डॉलर हो गई है।
बढ़ता हुआ भंडार देश की आर्थिक स्थिति को मजबूत करता है।
यह मुद्रा विनिमय दर को स्थिर रखने में सहायक है।

नई दिल्ली, 2 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 26 दिसंबर को समाप्त हुए हफ्ते में 3.293 बिलियन डॉलर की वृद्धि के साथ 696.610 बिलियन डॉलर तक पहुँच गया है। यह जानकारी भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा शुक्रवार को जारी किए गए आंकड़ों में दी गई।

पिछले हफ्ते के दौरान विदेशी मुद्रा भंडार में 4.368 बिलियन डॉलर की बढ़ोतरी देखी गई थी।

आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार, 26 दिसंबर को समाप्त हुए हफ्ते में विदेशी मुद्रा भंडार का सबसे बड़ा हिस्सा फॉरेन करेंसी एसेट्स की वैल्यू में 184 मिलियन डॉलर की वृद्धि के साथ 559.612 बिलियन डॉलर हो गया है।

गोल्ड रिजर्व की वैल्यू 2.956 बिलियन डॉलर की वृद्धि के साथ 113.320 बिलियन डॉलर हो गई है।

गोल्ड रिजर्व में यह तेज बढ़ोतरी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोने की कीमतों में उछाल के कारण हुई है, जो कि वर्तमान में 4,400 डॉलर प्रति औंस के आसपास है।

अर्थात, एसडीआर की वैल्यू 60 मिलियन डॉलर की वृद्धि के साथ 18.803 बिलियन डॉलर हो गई है। वहीं, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के पास रिजर्व पॉजिशन की वैल्यू 93 मिलियन डॉलर की वृद्धि के साथ 4.875 बिलियन डॉलर हो गई है।

किसी भी देश के लिए उसका विदेशी मुद्रा भंडार अत्यंत महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह उस देश की आर्थिक स्थिति का संकेत देता है। यह मुद्रा की विनिमय दर को स्थिर रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

उदाहरण के लिए, यदि डॉलर के मुकाबले रुपये पर दबाव बढ़ता है और इसकी वैल्यू घटती है, तो केंद्रीय बैंक विदेशी मुद्रा भंडार का उपयोग कर डॉलर के मुकाबले रुपये को गिरने से रोक सकता है और विनिमय दर को स्थिर रखता है।

बढ़ता हुआ विदेशी मुद्रा भंडार यह दर्शाता है कि देश में डॉलर की आवक बड़ी मात्रा में बनी हुई है, जिससे देश की अर्थव्यवस्था मजबूत होती है। इसके अलावा, यह विदेशों में व्यापार को भी सरल बनाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

हमें यह समझना होगा कि विदेशी मुद्रा भंडार का बढ़ना हमारे देश की आर्थिक स्वास्थ्य का आईना है। यह न केवल मुद्रा की स्थिरता में मदद करता है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार में भी सहायक है।
RashtraPress
8 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत का विदेशी मुद्रा भंडार क्यों महत्वपूर्ण है?
विदेशी मुद्रा भंडार एक देश की आर्थिक स्थिति का संकेतक होता है और यह मुद्रा की विनिमय दर को स्थिर रखने में मदद करता है।
विदेशी मुद्रा भंडार में वृद्धि का अर्थ क्या है?
विदेशी मुद्रा भंडार में वृद्धि का अर्थ है कि देश में डॉलर की आवक बनी हुई है, जो आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाती है।
राष्ट्र प्रेस
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