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भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 675.16 अरब डॉलर पर पहुंचा, एक सप्ताह में 96.4 करोड़ डॉलर की बढ़त

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भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 675.16 अरब डॉलर पर पहुंचा, एक सप्ताह में 96.4 करोड़ डॉलर की बढ़त

सारांश

भारत का विदेशी मुद्रा भंडार लगातार दूसरे सप्ताह बढ़ा — 10 जुलाई को 675.16 अरब डॉलर पर पहुंचा। फरवरी के 728.49 अरब डॉलर के शिखर से अभी दूरी बाकी है, लेकिन RBI की सतर्क नीति और PM मोदी की विदेशी खर्च कम करने की अपील के बीच यह क्रमिक सुधार उत्साहजनक है।

मुख्य बातें

10 जुलाई को समाप्त सप्ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 96.4 करोड़ डॉलर बढ़कर 675.16 अरब डॉलर पर पहुंचा।
फॉरेन करेंसी एसेट्स (FCA) 93 करोड़ डॉलर बढ़कर 546.51 अरब डॉलर हुईं — भंडार का सबसे बड़ा घटक।
गोल्ड रिज़र्व 2.4 करोड़ डॉलर की वृद्धि के साथ 105.23 अरब डॉलर पर पहुंचा।
IMF में SDR होल्डिंग 18.626 अरब डॉलर और रिज़र्व ट्रेंच पोजिशन 4.793 अरब डॉलर हुई।
इस वर्ष 27 फरवरी को भंडार अपने सर्वोच्च स्तर 728.494 अरब डॉलर पर था; मध्य-पूर्व तनाव के बाद RBI हस्तक्षेप से गिरावट आई थी।
PM मोदी ने 11 मई से नागरिकों से गैर-ज़रूरी विदेशी यात्रा, ईंधन खपत और सोने की खरीद घटाने की अपील की थी।

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा शुक्रवार, 17 जुलाई को जारी आंकड़ों के अनुसार, देश का विदेशी मुद्रा भंडार 10 जुलाई को समाप्त सप्ताह में 96.4 करोड़ डॉलर की बढ़त के साथ 675.16 अरब डॉलर पर पहुंच गया। यह लगातार दूसरे सप्ताह की वृद्धि है, जो रुपए की स्थिरता और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत की मज़बूत होती वित्तीय स्थिति को दर्शाती है।

मुख्य घटनाक्रम

इससे पूर्व के रिपोर्टिंग सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार 7.26 अरब डॉलर की उल्लेखनीय बढ़त के साथ 674.19 अरब डॉलर पर पहुंचा था। इस तरह पिछले कुछ सप्ताहों में आई गिरावट की भरपाई क्रमशः हो रही है।

भंडार का सबसे बड़ा घटक फॉरेन करेंसी एसेट्स (FCA) समीक्षा अवधि में 93 करोड़ डॉलर बढ़कर 546.51 अरब डॉलर पर पहुंच गया। FCA में यूरो, पाउंड स्टर्लिंग और जापानी येन जैसी प्रमुख वैश्विक मुद्राओं की तुलना में अमेरिकी डॉलर की विनिमय दर में उतार-चढ़ाव का प्रभाव भी परिलक्षित होता है।

स्वर्ण भंडार और IMF होल्डिंग्स

देश का गोल्ड रिज़र्व भी इस अवधि में 2.4 करोड़ डॉलर बढ़कर 105.23 अरब डॉलर पर पहुंच गया। वहीं, अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) में भारत की स्पेशल ड्रॉइंग राइट्स (SDR) होल्डिंग 30 लाख डॉलर बढ़कर 18.626 अरब डॉलर हो गई। इसके अतिरिक्त, IMF में भारत की रिज़र्व ट्रेंच पोजिशन 70 लाख डॉलर की वृद्धि के साथ 4.793 अरब डॉलर पर पहुंची।

ऐतिहासिक संदर्भ और गिरावट की पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि भारत का विदेशी मुद्रा भंडार इस वर्ष 27 फरवरी को समाप्त सप्ताह में अपने अब तक के सर्वोच्च स्तर 728.494 अरब डॉलर पर पहुंचा था। इसके बाद मध्य-पूर्व में बढ़े भू-राजनीतिक तनाव के चलते रुपए पर दबाव बढ़ा और RBI को रुपए को स्थिर रखने के लिए विदेशी मुद्रा बाजार में डॉलर बेचकर हस्तक्षेप करना पड़ा, जिससे अगले कुछ सप्ताहों में भंडार में गिरावट दर्ज हुई।

यह ऐसे समय में आया है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 11 मई से देशवासियों से गैर-ज़रूरी विदेशी यात्राएं सीमित करने, ईंधन की खपत घटाने और एक वर्ष तक सोने की खरीद टालने की अपील की थी — ताकि विदेशी मुद्रा भंडार सुरक्षित बना रहे।

RBI का रुख

केंद्रीय बैंक ने स्पष्ट किया है कि वह विदेशी मुद्रा बाजार की गतिविधियों पर सतत निगरानी रखेगा और आवश्यकता पड़ने पर बाजार में हस्तक्षेप करता रहेगा। हालांकि, RBI ने यह भी रेखांकित किया है कि उसका उद्देश्य किसी विशेष विनिमय दर को बनाए रखना नहीं, बल्कि बाजार में व्यवस्था और स्थिरता सुनिश्चित करना है।

आगे की राह

वैश्विक अनिश्चितताओं और भू-राजनीतिक दबावों के बीच भंडार की यह क्रमिक वापसी सकारात्मक संकेत है। विश्लेषकों के अनुसार, RBI की सतर्क हस्तक्षेप नीति और घरेलू स्तर पर मांग प्रबंधन के उपाय मिलकर भंडार को स्थिर रखने में सहायक हो सकते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन फरवरी के 728.49 अरब डॉलर के शिखर से अभी भी लगभग 53 अरब डॉलर की दूरी बाकी है — और यह अंतर केवल बाजार की अस्थिरता का नहीं, बल्कि RBI की सक्रिय डॉलर-बिक्री नीति का भी परिणाम है। सवाल यह है कि रुपए की रक्षा के लिए भंडार का उपयोग कहाँ तक उचित है और कहाँ से यह नीतिगत कमज़ोरी का संकेत बनता है। PM मोदी की नागरिकों से विदेशी खर्च घटाने की अपील असामान्य है और यह दर्शाती है कि दबाव केवल बाजार का नहीं, बल्कि व्यापक आर्थिक स्तर पर भी महसूस किया जा रहा है। RBI का 'कोई लक्षित विनिमय दर नहीं' वाला रुख पारदर्शी है, पर बाजार इसे पूरी तरह स्वीकार करे — इसके लिए निरंतर और विश्वसनीय संचार ज़रूरी होगा।
RashtraPress
17 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत का विदेशी मुद्रा भंडार अभी कितना है?
RBI के 17 जुलाई को जारी आंकड़ों के अनुसार, 10 जुलाई को समाप्त सप्ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 675.16 अरब डॉलर है। इसमें एक सप्ताह में 96.4 करोड़ डॉलर की वृद्धि दर्ज की गई।
फॉरेन करेंसी एसेट्स (FCA) क्या होती हैं और इनका महत्व क्यों है?
FCA विदेशी मुद्रा भंडार का सबसे बड़ा घटक है, जिसमें यूरो, पाउंड और येन जैसी मुद्राओं में रखी संपत्तियाँ शामिल हैं। 10 जुलाई सप्ताह में FCA 93 करोड़ डॉलर बढ़कर 546.51 अरब डॉलर पर पहुंची। इसमें अमेरिकी डॉलर की तुलना में अन्य मुद्राओं के उतार-चढ़ाव का प्रभाव भी शामिल होता है।
भारत का विदेशी मुद्रा भंडार अपने सर्वोच्च स्तर से कितना नीचे है?
इस वर्ष 27 फरवरी को भंडार 728.494 अरब डॉलर के सर्वकालिक उच्च स्तर पर था। वर्तमान 675.16 अरब डॉलर का स्तर उस शिखर से लगभग 53 अरब डॉलर कम है। मध्य-पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव और रुपए को स्थिर रखने के लिए RBI के हस्तक्षेप से यह गिरावट आई थी।
PM मोदी ने विदेशी यात्रा और सोने की खरीद कम करने की अपील क्यों की?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 11 मई से नागरिकों से गैर-ज़रूरी विदेशी यात्राएं सीमित करने, ईंधन खपत घटाने और एक वर्ष तक सोने की खरीद टालने की अपील की। यह कदम वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच विदेशी मुद्रा भंडार को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से उठाया गया।
RBI विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप क्यों करता है?
RBI विदेशी मुद्रा बाजार में बाजार स्थिरता बनाए रखने के लिए हस्तक्षेप करता है, विशेष रूप से तब जब रुपए पर असामान्य दबाव हो। केंद्रीय बैंक ने स्पष्ट किया है कि उसका लक्ष्य किसी विशेष विनिमय दर को बनाए रखना नहीं, बल्कि अत्यधिक उतार-चढ़ाव को रोकना है।
राष्ट्र प्रेस
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