भारत का विदेशी मुद्रा भंडार चार महीनों बाद फिर $700 बिलियन के पार, RBI डेटा में $707 बिलियन दर्ज
सारांश
मुख्य बातें
भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 7 अगस्त 2026 को समाप्त सप्ताह में $14.136 बिलियन की उछाल के साथ $707.002 बिलियन पर पहुँच गया — यह आँकड़ा भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने 14 अगस्त को जारी साप्ताहिक डेटा में प्रकाशित किया। मध्य पूर्व तनाव के कारण आई गिरावट के बाद यह पहला मौका है जब भंडार $700 बिलियन की सीमा को पार कर गया है।
चार महीनों का इंतज़ार खत्म
इससे पहले 17 अप्रैल 2026 को समाप्त सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार $703.308 बिलियन था। उसके बाद भू-राजनीतिक दबावों के चलते भंडार में क्रमिक गिरावट आई थी। अब चार महीनों बाद यह स्तर फिर से पार हुआ है, जो भारत की बाहरी क्षेत्र की मज़बूती का संकेत माना जा रहा है।
भंडार के प्रमुख घटकों की स्थिति
RBI के आँकड़ों के अनुसार, विदेशी मुद्रा भंडार के सबसे बड़े घटक फॉरेन करेंसी एसेट्स (FCA) की कुल वैल्यू $9.9946 बिलियन बढ़कर $574.625 बिलियन हो गई। FCA में अमेरिकी डॉलर के अलावा येन, यूरो और पाउंड जैसी प्रमुख वैश्विक मुद्राएँ शामिल होती हैं, जिनकी वैल्यू डॉलर में प्रदर्शित की जाती है।
वहीं, भंडार के दूसरे सबसे बड़े घटक स्वर्ण भंडार (Gold Reserve) की वैल्यू इस अवधि में $3.995 बिलियन घटकर $108.738 बिलियन रह गई। यह गिरावट अंतरराष्ट्रीय सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव से जुड़ी मानी जा रही है।
इसके अतिरिक्त, विशेष आहरण अधिकार (SDR) की वैल्यू $79 मिलियन बढ़कर $18.745 बिलियन हो गई, जबकि IMF में RBI की रिज़र्व पोज़िशन $116 मिलियन बढ़कर $4.894 बिलियन पर पहुँच गई।
विदेशी मुद्रा भंडार क्यों अहम है
किसी भी देश के लिए विदेशी मुद्रा भंडार उसकी आर्थिक सेहत का प्रमुख पैमाना होता है। यह भंडार रुपये की विनिमय दर को स्थिर रखने में निर्णायक भूमिका निभाता है — जब डॉलर के मुकाबले रुपये पर दबाव बढ़ता है, तो RBI इस भंडार का उपयोग कर मुद्रा को संभालती है।
गौरतलब है कि बढ़ता भंडार यह भी दर्शाता है कि देश में विदेशी पूँजी का प्रवाह मज़बूत बना हुआ है, जो निर्यात आय, विदेशी निवेश और प्रेषण (remittances) से आता है। इससे भारत की विदेशी व्यापार क्षमता और वैश्विक साख दोनों मज़बूत होती हैं।
आगे की संभावनाएँ
आर्थिक विश्लेषकों के अनुसार, यदि वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक अनिश्चितता नियंत्रण में रही और विदेशी संस्थागत निवेश (FII) का प्रवाह जारी रहा, तो भंडार में और वृद्धि की संभावना है। RBI की मौद्रिक नीति और वैश्विक डॉलर सूचकांक की दिशा इस पर निर्णायक प्रभाव डालेगी।