डॉलर के मुकाबले रुपए में 13 वर्षों की सबसे बड़ी तेजी, 93.10 पर हुआ बंद

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डॉलर के मुकाबले रुपए में 13 वर्षों की सबसे बड़ी तेजी, 93.10 पर हुआ बंद

सारांश

भारतीय रुपए ने गुरुवार को डॉलर के मुकाबले 13 वर्षों में सबसे बड़ी तेजी दर्ज की। इस वृद्धि के पीछे आरबीआई के सख्त कदम और अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के भाषण का सकारात्मक असर शामिल है। जानें इस महत्वपूर्ण बदलाव के बारे में।

Key Takeaways

  • रुपए ने डॉलर के मुकाबले 93.10 पर बंद होकर 13 वर्षों की सबसे बड़ी तेजी दर्ज की।
  • आरबीआई ने सट्टेबाजी को नियंत्रित करने के लिए सख्त कदम उठाए हैं।
  • अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भाषण का सकारात्मक प्रभाव पड़ा।
  • भारत का 700 अरब डॉलर से अधिक का विदेशी मुद्रा भंडार।
  • वैश्विक बाजारों की गिरावट के बावजूद रुपए में उछाल।

नई दिल्ली, 2 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपए में गुरुवार को 13 वर्षों में सबसे बड़ी तेजी देखने को मिली, जिससे अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले रुपया 93.10 के स्तर पर बंद हुआ।

इस तेजी का कारण आरबीआई द्वारा भारतीय मुद्रा में सट्टेबाजी को कम करने के लिए उठाए गए कदम हैं।

हाल ही में, भारतीय रिजर्व बैंक ने रुपए में गिरावट को रोकने के लिए बाजार में नियमों को कड़ा किया है।

एक विश्लेषक ने कहा, "अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भाषण के बाद जोखिम की भावना में सुधार आया, जिससे रुपए में तेजी आई। उनके भाषण ने तनाव को बढ़ाने के बजाय संवाद का संकेत दिया, जिससे बाजार में सकारात्मकता आई। हालांकि, अनिश्चितता का स्तर अभी भी ऊंचा है, जिससे मुद्रा बाजारों में अस्थिरता बनी हुई है।"

तीन दिन की छुट्टी के बाद कारोबार फिर से शुरू हुआ, जिसमें रुपया दिन के दौरान 1.7 प्रतिशत तक बढ़कर 93.25 पर पहुंच गया, जो सितंबर 2013 के बाद से डॉलर के मुकाबले रुपए की सबसे मजबूत वृद्धि है।

केंद्रीय बैंक ने हाल ही में बैंकों को निवासी और अनिवासी दोनों ग्राहकों को रुपए के नॉन-डिलीवरी वाले फॉरवर्ड जारी करने से रोका है, और कंपनियों को रद्द किए गए फॉरवर्ड कॉन्ट्रैक्ट्स को पुनः बुक करने से भी प्रतिबंधित किया है।

इन कदमों में बैंकों की रुपए में नेट ओपन पॉजिशन को 100 मिलियन डॉलर तक सीमित करना और विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव सौदों पर रोक लगाना शामिल है।

इन प्रयासों का उद्देश्य मुद्रा बाजार में सट्टेबाजी की गतिविधियों को कम करना और रुपए को स्थिर करना है।

विश्लेषकों का मानना है कि भारत का मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार, जो 700 अरब डॉलर से अधिक है, अस्थिरता से सुरक्षा प्रदान करता है और केंद्रीय बैंक को आवश्यकता पड़ने पर हस्तक्षेप करने की गुंजाइश देता है।

वैश्विक बाजारों में कमजोर संकेतों के बावजूद रुपए में उछाल आया। आज एशियाई बाजारों में गिरावट देखी गई, जापान का निक्केई, हांगकांग का हैंग सेंग और दक्षिण कोरिया का कोस्पी जैसे प्रमुख सूचकांक 3 प्रतिशत तक गिर गए।

इस बीच, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से उछाल आया, जिससे वैश्विक अनिश्चितता और बढ़ गई। ब्रेंट क्रूड वायदा 5.24 प्रतिशत बढ़कर 106.47 डॉलर प्रति बैरल हो गया, जबकि अमेरिकी डब्ल्यूटीआई वायदा 4.5 प्रतिशत बढ़कर 104.64 डॉलर हो गया।

महावीर जयंती और नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत की छुट्टियों के कारण इस सप्ताह की शुरुआत में मुद्रा बाजार बंद रहे थे और यह गुड फ्राइडे के कारण शुक्रवार को भी बंद रहेंगे।

Point of View

NationPress
10/04/2026

Frequently Asked Questions

डॉलर के मुकाबले रुपए में तेजी का मुख्य कारण क्या है?
इसकी मुख्य वजह आरबीआई द्वारा उठाए गए कदम हैं, जो रुपए में सट्टेबाजी को कम करने के लिए लागू किए गए हैं।
क्या डॉलर के मुकाबले रुपया 93.10 पर बंद होना सामान्य है?
यह 13 वर्षों में सबसे बड़ी तेजी है, जो दर्शाता है कि रुपए में स्थिरता आई है।
क्या वैश्विक बाजारों की स्थिति रुपए को प्रभावित कर सकती है?
जी हां, वैश्विक बाजारों में अस्थिरता का असर मुद्रा बाजार पर पड़ सकता है।
आरबीआई ने क्या कदम उठाए हैं?
आरबीआई ने नियमों को सख्त किया है और बैंकों को रुपए के फॉरवर्ड कॉन्ट्रैक्ट्स को सीमित करने के लिए कहा है।
क्या रुपए की मजबूती के लिए कोई अन्य कारण हैं?
भारत का मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार भी रुपए की स्थिरता में योगदान दे रहा है।
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