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बेल्लारी चलो पदयात्रा: विजयेंद्र का आरोप — 3,655 किसानों की आत्महत्या पर कर्नाटक सरकार दे जवाब

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बेल्लारी चलो पदयात्रा: विजयेंद्र का आरोप — 3,655 किसानों की आत्महत्या पर कर्नाटक सरकार दे जवाब

सारांश

भाजपा की 'बेल्लारी चलो' पदयात्रा के तीसरे दिन विजयेंद्र ने कर्नाटक सरकार को घेरा — 3,655 किसान आत्महत्याओं के आँकड़े, दलित निधि के कथित दुरुपयोग और ₹145 करोड़ की लंबित मक्का भुगतान माँग के साथ। यह अभियान कल्याणा कर्नाटक के सूखाग्रस्त क्षेत्र में सरकार की जवाबदेही को सीधे चुनौती दे रहा है।

मुख्य बातें

विजयेंद्र ने 3 सितंबर को रायचूर में 'बेल्लारी चलो' पदयात्रा के तीसरे दिन कर्नाटक सरकार पर हमला बोला।
उनके अनुसार पिछले तीन वर्षों में 3,655 किसानों ने आत्महत्या की, जिनमें कल्याणा कर्नाटक क्षेत्र के 937 किसान शामिल हैं।
आरोप लगाया कि दलित कल्याण की एससीएसपी-टीएसपी निधि को गारंटी योजनाओं के वित्तपोषण में मोड़ा जा रहा है।
190 से अधिक तालुकों में सूखे की स्थिति का हवाला देते हुए ₹5 लाख तक के फसल ऋण माफी और ₹145 करोड़ के लंबित मक्का भुगतान की माँग।
कृषि संकट पर चर्चा के लिए विशेष विधानसभा सत्र बुलाने और तुंगभद्रा बांध की गाद निकालने की माँग।

कर्नाटक भाजपा अध्यक्ष और विधायक बी.वाई. विजयेंद्र ने 3 सितंबर को रायचूर में 'बेल्लारी चलो' पदयात्रा के तीसरे दिन कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि दलित कल्याण के लिए निर्धारित एससीएसपी-टीएसपी निधि को गारंटी योजनाओं के वित्तपोषण में मोड़ा जा रहा है और सरकार किसानों के गहराते संकट से आँखें मूँद रही है। विजयेंद्र ने दावा किया कि पिछले तीन वर्षों में 3,655 किसानों ने आत्महत्या की है, जिनमें से 937 मौतें अकेले कल्याणा कर्नाटक क्षेत्र में हुई हैं।

पदयात्रा का तीसरा दिन और मुख्य मुद्दे

विजयेंद्र ने रायचूर में पदयात्रा को हरी झंडी दिखाने के बाद मीडिया से कहा कि यह अभियान राज्यभर में सरकार की विफलताओं, भ्रष्टाचार और किसानों की समस्याओं को उजागर करने के लिए है। उनके अनुसार, जिलेवार आँकड़े इस प्रकार हैं — कलबुर्गी में 295, बीदर में 220, रायचूर में 169 और कोप्पल में 80 से अधिक किसानों की आत्महत्या। उन्होंने कहा, "ये आँकड़े सरकार के किसान-विरोधी रवैये को दर्शाते हैं। प्रियांक खड़गे को इस तथ्य पर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए।"

दलित निधि के कथित दुरुपयोग का आरोप

विजयेंद्र ने बुधवार को दलित नेताओं के साथ हुई बैठक का हवाला देते हुए कहा कि शोषित समुदायों के लिए आवंटित धनराशि विशेष रूप से उन्हीं के कल्याण पर खर्च होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया, "कांग्रेस दलितों और शोषित समुदायों का इस्तेमाल सिर्फ वोट बैंक के तौर पर कर रही है। एससीएसपी-टीएसपी निधि का उपयोग गारंटी योजनाओं के लिए किया जा रहा है।" हालाँकि, कर्नाटक सरकार की ओर से इन आरोपों पर कोई तत्काल प्रतिक्रिया नहीं आई।

किसानों के लिए माँगें

विजयेंद्र ने सरकार से 190 से अधिक तालुकों में सूखे जैसी स्थिति को देखते हुए किसानों के ₹5 लाख तक के फसल ऋण माफ करने की माँग की। इसके अलावा उन्होंने मक्का खरीद के लिए कथित तौर पर लंबित ₹145 करोड़ के तत्काल भुगतान और दुग्ध उत्पादकों को देय प्रोत्साहन राशि जारी करने की भी माँग की। उन्होंने याद दिलाया कि पूर्व मुख्यमंत्री बी.एस. येदियुरप्पा के कार्यकाल में दूध उत्पादकों को यह प्रोत्साहन नियमित रूप से मिलता था, जो अब बंद हो गया है।

विशेष विधानसभा सत्र और अवसंरचना माँगें

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने माँग की कि कृषि संकट पर चर्चा के लिए विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया जाए। साथ ही उन्होंने तुंगभद्रा बांध पर गाद निकालने का काम शुरू करने और जल भंडारण क्षमता बढ़ाने के लिए नवाली जलाशय परियोजना को प्राथमिकता देने का आग्रह किया। गौरतलब है कि कल्याणा कर्नाटक का यह क्षेत्र ऐतिहासिक रूप से सूखे और कृषि संकट से जूझता रहा है, और यह पदयात्रा उसी पृष्ठभूमि में आयोजित की जा रही है।

कांग्रेस के काले झंडों पर पलटवार

केपीसीसी अध्यक्ष आर.बी. हरिप्रसाद द्वारा पदयात्रा के विरोध में कांग्रेस कार्यकर्ताओं को काले झंडे दिखाने के निर्देश पर विजयेंद्र ने कहा, "हरिप्रसाद और डी.के. शिवकुमार को भाजपा की पदयात्रा को काले झंडे दिखाने के बजाय किसानों के आँसू पोंछने चाहिए। किसान आत्महत्या कर रहे हैं और कृषि समुदाय संकट में है।" उन्होंने यह भी जोड़ा कि जनता सब कुछ देख रही है और उचित समय पर जवाब देगी। पदयात्रा का अंतिम गंतव्य बेल्लारी है और आने वाले दिनों में यह अभियान और तेज होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

655 किसान आत्महत्याओं के आँकड़े गंभीर हैं, लेकिन ये भाजपा के अपने कार्यकाल के वर्षों को भी आंशिक रूप से समेटते हैं — यह विरोधाभास मुख्यधारा की कवरेज में प्रायः अनदेखा रह जाता है। एससीएसपी-टीएसपी निधि के कथित दुरुपयोग का आरोप संवैधानिक दायित्व से जुड़ा गंभीर मामला है, जिसकी स्वतंत्र जाँच होनी चाहिए — केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं रहना चाहिए। कल्याणा कर्नाटक ऐतिहासिक रूप से पिछड़ा और सूखाप्रवण क्षेत्र है; यहाँ की कृषि पीड़ा नई नहीं, बल्कि दशकों की नीतिगत उपेक्षा का परिणाम है। असली परीक्षा यह है कि पदयात्रा के बाद भाजपा इन माँगों को विधायी दबाव में बदलती है या यह महज चुनावी मौसम की राजनीतिक कवायद बनकर रह जाती है।
RashtraPress
3 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बेल्लारी चलो पदयात्रा क्या है और इसका उद्देश्य क्या है?
यह भारतीय जनता पार्टी (BJP) द्वारा कर्नाटक में आयोजित एक राजनीतिक पदयात्रा है, जिसका लक्ष्य कांग्रेस सरकार की कथित विफलताओं — विशेषकर किसान संकट और दलित निधि के दुरुपयोग — को उजागर करना है। यह पदयात्रा 3 सितंबर को अपने तीसरे दिन रायचूर से गुजरी और बेल्लारी तक जाएगी।
विजयेंद्र ने कितने किसान आत्महत्याओं का दावा किया और किन जिलों का उल्लेख किया?
बी.वाई. विजयेंद्र ने दावा किया कि पिछले तीन वर्षों में कर्नाटक में 3,655 किसानों ने आत्महत्या की है। इनमें कल्याणा कर्नाटक क्षेत्र के 937 किसान शामिल हैं — कलबुर्गी में 295, बीदर में 220, रायचूर में 169 और कोप्पल में 80 से अधिक।
एससीएसपी-टीएसपी निधि क्या है और इस पर विवाद क्यों है?
अनुसूचित जाति उप-योजना (SCSP) और जनजातीय उप-योजना (TSP) संवैधानिक रूप से निर्धारित वे निधियाँ हैं जो विशेष रूप से दलित और आदिवासी समुदायों के विकास के लिए होती हैं। विजयेंद्र का आरोप है कि कर्नाटक सरकार इस निधि को गारंटी योजनाओं के वित्तपोषण में लगा रही है, जो इन समुदायों के अधिकारों का उल्लंघन है।
भाजपा ने किसानों के लिए क्या माँगें रखी हैं?
विजयेंद्र ने सूखाग्रस्त 190 से अधिक तालुकों के किसानों के ₹5 लाख तक के फसल ऋण माफ करने, मक्का खरीद के लिए कथित तौर पर लंबित ₹145 करोड़ का तत्काल भुगतान, दुग्ध उत्पादकों को प्रोत्साहन राशि जारी करने और कृषि संकट पर विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की माँग की है।
कांग्रेस ने इस पदयात्रा पर क्या रुख अपनाया?
केपीसीसी अध्यक्ष आर.बी. हरिप्रसाद ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं से पदयात्रा के दौरान काले झंडे प्रदर्शित करने का आह्वान किया। इस पर विजयेंद्र ने पलटवार करते हुए कहा कि सरकार को विरोध रोकने के बजाय किसानों की समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए।
राष्ट्र प्रेस
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