होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजी आवाजाही घटी: बुधवार को सिर्फ 6 जहाज, IMF प्रमुख ने विकासशील देशों को चेताया
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम एशिया में अमेरिका-ईरान तनाव के बीच रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य से 3 सितंबर (बुधवार) को केवल 6 कमोडिटी जहाज गुजरे — जो एक दिन पहले के 11 जहाजों और पिछले 10 दिनों के प्रतिदिन औसतन 13 जहाजों की तुलना में उल्लेखनीय रूप से कम है। इस बीच अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की प्रमुख क्रिस्टालिना जॉर्जिवा ने चेतावनी दी है कि इस संकट का सबसे गहरा असर विकासशील देशों पर पड़ेगा।
कौन-से जहाज गुजरे, क्या कहते हैं आंकड़े
शिप-ट्रैकिंग कंपनी केप्लर के प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार, बुधवार को जलडमरूमध्य से गुजरने वाले 6 जहाजों में 2 बहुत बड़े गैस कैरियर, 2 लॉन्ग-रेंज टैंकर, 1 सुप्रामैक्स टैंकर और 1 पैनामैक्स टैंकर शामिल थे। केप्लर ने स्पष्ट किया है कि ये आंकड़े प्रारंभिक हैं और इनमें बदलाव संभव है, क्योंकि कुछ जहाज यात्रा के दौरान अपने ट्रांसपोंडर बंद कर लेते हैं, जिससे उनकी वास्तविक आवाजाही तत्काल ट्रैकिंग में दर्ज नहीं हो पाती।
तनाव की पृष्ठभूमि और समुद्री सुरक्षा
जहाजों की आवाजाही में यह गिरावट ऐसे समय में आई है जब अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव फिर से तेज हो गया है। अमेरिकी हमलों के बाद ईरान की जवाबी कार्रवाई ने क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएँ पैदा कर दी हैं। ईरान ने हाल ही में कई वाणिज्यिक जहाजों को अपनी ब्लैकलिस्ट में भी शामिल किया है, जिससे तेल और गैस व्यापार के लिए जोखिम और बढ़ गया है। गौरतलब है कि होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का एक अपरिहार्य मार्ग है — दुनिया के तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी से होकर गुजरता है।
IMF प्रमुख की चेतावनी
IMF प्रमुख क्रिस्टालिना जॉर्जिवा ने अमेरिका के नॉर्थ कैरोलिना राज्य में आयोजित G20 बैठक के दौरान कहा कि होर्मुज जलमार्ग के बंद रहने से दुनिया भर में कर्ज लेने की लागत बढ़ रही है और विकासशील देशों की कर्ज से जुड़ी प्रगति खतरे में पड़ रही है। उन्होंने कहा, "यह सिर्फ कम आय वाले विकासशील देशों की समस्या नहीं है। विकसित अर्थव्यवस्थाओं में कर्ज का ऊँचा स्तर और लगातार बनी हुई महंगाई, कम आय वाले देशों, उभरते बाजारों और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं सहित सभी के लिए कर्ज चुकाने की लागत बढ़ा सकती है।"
जॉर्जिवा ने यह भी रेखांकित किया कि कुल कर्ज के बढ़ते स्तर के साथ-साथ, इस जलमार्ग के बंद रहने से उपजा महंगाई का दबाव बॉन्ड यील्ड को ऊपर ले जा रहा है, जो वैश्विक वित्तीय स्थिरता के लिए एक गंभीर संकेत है।
आम जनता और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर
होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों की संख्या में यह तीव्र गिरावट वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर सीधा दबाव डाल सकती है। तेल और गैस की आपूर्ति बाधित होने से कच्चे तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं, जिसका असर भारत सहित उन सभी देशों पर पड़ेगा जो ऊर्जा आयात पर निर्भर हैं। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक अर्थव्यवस्था पहले से ही महंगाई और धीमी वृद्धि की दोहरी चुनौती से जूझ रही है।
आगे क्या होगा
विश्लेषकों के अनुसार, यदि होर्मुज जलडमरूमध्य पर तनाव इसी तरह बना रहा, तो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला में और व्यवधान आ सकता है। केप्लर के आंकड़ों पर नजर रखने वाले विशेषज्ञ अगले कुछ दिनों में जहाजी आवाजाही के रुझान को वैश्विक व्यापार के स्वास्थ्य का एक प्रमुख संकेतक मान रहे हैं। IMF की चेतावनी इस बात का संकेत है कि यह संकट केवल क्षेत्रीय नहीं, बल्कि वैश्विक आर्थिक प्रभाव वाला हो सकता है।