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होर्मुज स्ट्रेट से व्यापारिक आवाजाही युद्ध-पूर्व स्तर के मात्र 20%, UKMTO रिपोर्ट में खुलासा

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होर्मुज स्ट्रेट से व्यापारिक आवाजाही युद्ध-पूर्व स्तर के मात्र 20%, UKMTO रिपोर्ट में खुलासा

सारांश

होर्मुज स्ट्रेट से व्यापारिक जहाजों की आवाजाही युद्ध-पूर्व स्तर के मात्र 20% पर सिमटी है। IRGC की ड्रोन निगरानी, रेडियो संपर्क और बारूदी सुरंगों के खतरे के बीच 6 जुलाई से 18 में से 16 प्रोजेक्टाइल हमले दक्षिणी ओमानी मार्ग पर हो चुके हैं — वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए यह संकट गहराता जा रहा है।

मुख्य बातें

UKMTO के अनुसार होर्मुज स्ट्रेट से कुल आवाजाही युद्ध-पूर्व के सात-दिवसीय औसत का मात्र 20 प्रतिशत है।
पिछले सप्ताह 103 जहाज दाखिल और 89 जहाज बाहर निकले; दैनिक आवाजाही अभी भी सिंगल डिजिट में।
6 जुलाई से दर्ज 18 प्रोजेक्टाइल हमलों में से 16 दक्षिणी ओमानी मार्ग पर हुए।
सीमित आवाजाही में तेल और तरल ईंधन टैंकरों की हिस्सेदारी सर्वाधिक 45 प्रतिशत ।
IRGC की ड्रोन निगरानी, रेडियो संपर्क और समुद्री बारूदी सुरंगों का खतरा जहाज संचालकों के लिए प्रमुख जोखिम।

होर्मुज स्ट्रेट से वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही अब भी सामान्य स्थिति से कोसों दूर है। ब्रिटेन के यूके मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, इस रणनीतिक जलमार्ग से दैनिक आवाजाही अभी भी सिंगल डिजिट में बनी हुई है — और दोनों दिशाओं की कुल आवाजाही युद्ध-पूर्व के सात-दिवसीय औसत का महज 20 प्रतिशत है। ईरानी सैन्य गतिविधियों और समुद्री सुरक्षा जोखिमों को इसका प्रमुख कारण बताया जा रहा है।

मुख्य घटनाक्रम

UKMTO के आँकड़ों के अनुसार, पिछले एक सप्ताह में 103 जहाज होर्मुज स्ट्रेट में दाखिल हुए, जबकि 89 जहाज बाहर निकले। यह संख्या सुनने में भले ही ठीक-ठाक लगे, लेकिन जब इसे युद्ध-पूर्व के सात-दिवसीय औसत से तुलना की जाती है, तो यह उस स्तर का केवल 20 प्रतिशत है। गौरतलब है कि होर्मुज वैश्विक तेल व्यापार के लिए सर्वाधिक महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है।

ईरानी गतिविधियों से बढ़ा खतरा

रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की गतिविधियाँ जहाज संचालकों के लिए गंभीर जोखिम बनी हुई हैं। इनमें ड्रोन निगरानी उड़ानें, रेडियो के ज़रिए जहाजों से संपर्क करना, और उन क्षेत्रों में आवाजाही का खतरा शामिल है जहाँ समुद्री बारूदी सुरंगों की आशंका जताई गई है। पिछले कुछ महीनों में कई जहाज हमलों का शिकार भी हो चुके हैं।

सर्वाधिक जोखिम वाला क्षेत्र

UKMTO के आँकड़ों के अनुसार, स्ट्रेट का दक्षिणी ओमानी मार्ग विशेष रूप से खतरनाक माना जा रहा है। 6 जुलाई से UKMTO द्वारा दर्ज 18 प्रोजेक्टाइल हमलों में से 16 इसी क्षेत्र में हुए हैं — यह आँकड़ा इस मार्ग की संवेदनशीलता को स्पष्ट रूप से रेखांकित करता है।

ऊर्जा आपूर्ति पर असर

होर्मुज स्ट्रेट से गुज़रने वाली सीमित वाणिज्यिक आवाजाही में तेल और तरल ईंधन टैंकरों की हिस्सेदारी सर्वाधिक 45 प्रतिशत है। यह इस जलमार्ग के वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति नेटवर्क में केंद्रीय भूमिका को दर्शाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि यह व्यवधान लंबे समय तक जारी रहा, तो वैश्विक तेल कीमतों और आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव और बढ़ सकता है।

क्या होगा आगे

यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक ऊर्जा बाज़ार पहले से ही कई मोर्चों पर दबाव में है। जहाज संचालक फिलहाल सुरक्षा जोखिमों को देखते हुए इस मार्ग से गुज़रने में अत्यधिक सावधानी बरत रहे हैं। जब तक क्षेत्र में सुरक्षा की स्थिति में ठोस सुधार नहीं होता, होर्मुज स्ट्रेट पर व्यापारिक गतिविधियों के सामान्य होने की संभावना कम बनी रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो 80% की कमी का असर सीधे तेल कीमतों और आयातक देशों — भारत सहित — की ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ता है। 6 जुलाई के बाद से 18 में से 16 हमले केवल दक्षिणी ओमानी मार्ग पर केंद्रित होना बताता है कि यह अव्यवस्था यादृच्छिक नहीं, बल्कि रणनीतिक है। मुख्यधारा की कवरेज जहाज संख्या पर रुक जाती है; असली सवाल यह है कि इस व्यवधान के दीर्घकालिक आर्थिक और कूटनीतिक परिणामों के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय के पास कोई ठोस योजना है या नहीं।
RashtraPress
22 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

होर्मुज स्ट्रेट से व्यापारिक आवाजाही इतनी कम क्यों है?
UKMTO के अनुसार, ईरान के IRGC की ड्रोन निगरानी, रेडियो संपर्क और समुद्री बारूदी सुरंगों के खतरे के कारण जहाज संचालक इस मार्ग से बचने की कोशिश कर रहे हैं। इसके अलावा, 6 जुलाई से अब तक 18 प्रोजेक्टाइल हमले दर्ज किए जा चुके हैं, जिनमें से 16 दक्षिणी ओमानी मार्ग पर हुए हैं।
UKMTO क्या है और इसकी रिपोर्ट कितनी विश्वसनीय है?
UKMTO यानी यूके मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस ब्रिटेन की एक सरकारी समुद्री निगरानी संस्था है जो हिंद महासागर और खाड़ी क्षेत्र में जहाजों की सुरक्षा पर नज़र रखती है। इसकी रिपोर्टें अंतरराष्ट्रीय शिपिंग उद्योग और सरकारों द्वारा व्यापक रूप से संदर्भित की जाती हैं।
होर्मुज स्ट्रेट पर व्यवधान से भारत पर क्या असर पड़ सकता है?
भारत अपनी तेल ज़रूरतों का एक बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आयात करता है, जिनमें से अधिकांश होर्मुज स्ट्रेट से होकर आता है। यदि यह व्यवधान लंबे समय तक जारी रहा, तो कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि और आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव बढ़ सकता है।
होर्मुज स्ट्रेट से कितना तेल गुज़रता है?
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के तेल और गैस व्यापार के लिए सर्वाधिक महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। वर्तमान में इस मार्ग से गुज़रने वाली सीमित आवाजाही में तेल और तरल ईंधन टैंकरों की हिस्सेदारी 45 प्रतिशत है, जो इस जलमार्ग के ऊर्जा आपूर्ति में केंद्रीय महत्व को दर्शाती है।
क्या होर्मुज स्ट्रेट पर स्थिति सुधरने की संभावना है?
फिलहाल UKMTO की रिपोर्ट के अनुसार स्थिति में कोई उल्लेखनीय सुधार नहीं हुआ है। जब तक क्षेत्र में सुरक्षा की स्थिति में ठोस बदलाव नहीं आता और IRGC की गतिविधियाँ कम नहीं होतीं, व्यापारिक जहाज इस मार्ग से सावधानी बरतते रहेंगे।
राष्ट्र प्रेस
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