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'बेल्लारी चलो' पदयात्रा: कर्नाटक भाजपा का 175 किमी मार्च, आदिवासी कल्याण घोटाले पर कांग्रेस को घेरने की तैयारी

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'बेल्लारी चलो' पदयात्रा: कर्नाटक भाजपा का 175 किमी मार्च, आदिवासी कल्याण घोटाले पर कांग्रेस को घेरने की तैयारी

सारांश

कर्नाटक भाजपा का 'बेल्लारी चलो' मार्च महज एक पदयात्रा नहीं — यह आदिवासी कल्याण घोटाले को चुनावी हथियार बनाने की कोशिश है। 175 किमी, 10 दिन, 9 विधानसभा क्षेत्र — विजयेंद्र और अशोक के नेतृत्व में भाजपा उत्तर कर्नाटक में कांग्रेस को सीधे चुनौती दे रही है।

मुख्य बातें

कर्नाटक भाजपा 2 सितंबर 2026 से 175 किलोमीटर लंबी 'बेल्लारी चलो' पदयात्रा शुरू करेगी।
मार्च रायचूर के लिंगसगूर से शुरू होकर 10 सितंबर को बेल्लारी में समाप्त होगा।
नेतृत्व प्रदेश अध्यक्ष बी.वाई.
नारायणस्वामी करेंगे; प्रहलाद जोशी व बी.एस.
येदियुरप्पा उद्घाटन में शामिल होंगे।
मार्ग रायचूर, कोप्पल और बेल्लारी जिलों की 9 विधानसभा सीटों से गुजरेगा; प्रतिदिन 2 जनसभाएँ होंगी।
मुख्य मुद्दा: कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम में कथित अनियमितताएँ और कांग्रेस सरकार से जवाबदेही की माँग।

कर्नाटक में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने आदिवासी कल्याण घोटाले और राज्य की कांग्रेस सरकार की कथित विफलताओं के विरोध में 2 सितंबर 2026 से 175 किलोमीटर लंबी 'बेल्लारी चलो' पदयात्रा शुरू करने का ऐलान किया है। यह 10 दिवसीय मार्च रायचूर जिले के लिंगसगूर से शुरू होकर 10 सितंबर को बेल्लारी में समापन समारोह के साथ खत्म होगा। यह मार्च कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम घोटाले को लेकर भाजपा के चल रहे अभियान की अगली कड़ी है।

मार्च का नेतृत्व और उद्घाटन

पदयात्रा का नेतृत्व प्रदेश अध्यक्ष बी.वाई. विजयेंद्र, विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक और आर. नारायणस्वामी करेंगे। उद्घाटन कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री प्रहलाद जोशी और पूर्व मुख्यमंत्री बी.एस. येदियुरप्पा भी शामिल होंगे। मार्च का आधिकारिक शुभारंभ लिंगसगूर में बेंगलुरु बाईपास रोड के निकट होगा, जिससे पहले भाजपा नेता गुरुगुंटा अमरेश्वर मंदिर में दर्शन करेंगे।

मार्ग और कार्यक्रम

पहले दिन उद्घाटन और जनसभा के बाद नेता एवं कार्यकर्ता 12 किलोमीटर की पदयात्रा करेंगे तथा रात्रि विश्राम संतेकल्लूरु घाना मतेश्वर मठ में होगा। मार्ग के अनुसार यात्रा रायचूर जिले के लिंगसगूर, मास्की और सिंधनूर से गुजरेगी, फिर कोप्पल जिले के करातगी और गंगावती होते हुए बेल्लारी जिले के कुदातिनी और कम्पली पहुँचेगी। यह पदयात्रा उत्तर कर्नाटक के तीन जिलों — रायचूर, कोप्पल और बेल्लारी — की नौ विधानसभा सीटों से होकर निकलेगी। प्रतिदिन रास्ते में दो जनसभाएँ आयोजित की जाएंगी।

भाजपा का आरोप और मुख्य मुद्दे

भाजपा के अनुसार, इस मार्च का केंद्रीय उद्देश्य आदिवासी कल्याण विभाग में कथित अनियमितताओं को सार्वजनिक रूप से उजागर करना और कांग्रेस सरकार से जवाबदेही सुनिश्चित कराना है। पार्टी किसानों की समस्याओं के प्रति सरकार की कथित उदासीनता और भ्रष्टाचार के मुद्दों को भी इस विरोध प्रदर्शन के जरिए उठाएगी। गौरतलब है कि कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम घोटाले को लेकर भाजपा पहले से ही कांग्रेस सरकार के विरुद्ध मोर्चा खोले हुए है।

विपक्ष के नेता आर. अशोक का बयान

विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक ने कहा, 'हमने विधानसभा में कांग्रेस के भ्रष्टाचार का जिक्र किया है, भ्रष्टाचार में शामिल लोगों के अहंकार को चुनौती दी है और दलितों के लिए बने फंड की कथित लूट में दागी लोगों का इस्तीफा सुनिश्चित कराया है।' उन्होंने कार्यकर्ताओं से आह्वान किया, 'आइए एक ऐसी सरकार के खिलाफ एकजुट हों जो किसानों की कठिनाइयों का जवाब देने में विफल रही है और भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रही है। हमारी लड़ाई तब तक जारी रहेगी जब तक कर्नाटक और कन्नड़ लोगों को जन-केंद्रित और विकास-उन्मुख सरकार नहीं मिल जाती।'

आगे क्या होगा

यह पदयात्रा 10 सितंबर 2026 को बेल्लारी में एक बड़े समापन समारोह के साथ संपन्न होगी। यह ऐसे समय में आई है जब कर्नाटक में कांग्रेस सरकार पर कई मोर्चों पर दबाव है और भाजपा राज्य में अपनी जमीन मजबूत करने की कोशिश में है। आने वाले दिनों में इस मार्च की राजनीतिक प्रतिक्रिया और सरकार का रुख स्पष्ट होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन भाजपा की असली परीक्षा यह है कि क्या वह सत्ता में रहते हुए इसी तरह की जवाबदेही के लिए तैयार थी। आलोचकों का कहना है कि पदयात्राएँ तब तक प्रभावशाली नहीं होतीं जब तक उनके पीछे ठोस वैकल्पिक नीति न हो। फिर भी, यह मार्च कांग्रेस को रक्षात्मक स्थिति में ला सकता है — खासकर तब जब घोटाले के आरोप अभी तक न्यायिक जाँच के दायरे में हैं।
RashtraPress
1 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'बेल्लारी चलो' पदयात्रा क्या है और यह क्यों निकाली जा रही है?
यह कर्नाटक भाजपा की 10 दिवसीय, 175 किलोमीटर लंबी पदयात्रा है जो 2 सितंबर 2026 को लिंगसगूर से शुरू होकर 10 सितंबर को बेल्लारी में समाप्त होगी। इसका उद्देश्य आदिवासी कल्याण विभाग में कथित अनियमितताओं और कांग्रेस सरकार की विफलताओं को उजागर करना है।
कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम घोटाला क्या है?
यह कर्नाटक में अनुसूचित जनजाति के कल्याण के लिए बने सरकारी निगम में कथित वित्तीय अनियमितताओं से जुड़ा मामला है, जिसमें दलितों और आदिवासियों के लिए आवंटित फंड के दुरुपयोग का आरोप है। भाजपा इस मुद्दे पर कांग्रेस सरकार के खिलाफ लगातार अभियान चला रही है।
पदयात्रा का नेतृत्व कौन करेगा?
पदयात्रा का नेतृत्व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बी.वाई. विजयेंद्र, विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक और आर. नारायणस्वामी करेंगे। उद्घाटन में केंद्रीय मंत्री प्रहलाद जोशी और पूर्व मुख्यमंत्री बी.एस. येदियुरप्पा भी उपस्थित रहेंगे।
यह मार्च किन जिलों और विधानसभा क्षेत्रों से गुजरेगा?
पदयात्रा रायचूर, कोप्पल और बेल्लारी — उत्तर कर्नाटक के तीन जिलों की 9 विधानसभा सीटों से होकर निकलेगी। मार्ग में लिंगसगूर, मास्की, सिंधनूर, करातगी, गंगावती, कुदातिनी और कम्पली शामिल हैं।
मार्च का समापन कब और कहाँ होगा?
पदयात्रा 10 सितंबर 2026 को बेल्लारी शहर में एक बड़े समापन समारोह के साथ संपन्न होगी। 10 दिनों के दौरान प्रतिदिन दो जनसभाएँ आयोजित की जाएंगी।
राष्ट्र प्रेस
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